प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय विचार परंपरा के कालातीत ज्ञान को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषितम साझा करते हुए वृक्षारोपण के चिरस्थायी लाभों पर प्रकाश डाला है।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए श्लोक का आशय यह है कि जिस प्रकार फल-फूल से युक्त वृक्ष पास रहने पर मनुष्य को तृप्ति प्रदान करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष दूर रहने पर भी उसे लगाने वाले व्यक्ति को हर प्रकार का लाभ पहुंचाते हैं। यह संदेश प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यह श्लोक साझा किया—
“पुष्पिताः फलवन्तश्च तर्पयन्ति हि मानवान।
वृक्षदं पुत्रवत् वृक्षास्तारायन्ति पात्र च॥”
प्रधानमंत्री का यह संदेश वृक्षारोपण को केवल वर्तमान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी निवेश के रूप में प्रस्तुत करता है।











