
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बड़ा संदेश: गोवा मुक्ति दिवस पर शौर्य को नमन, लोक सेवा आयोगों से ईमानदारी और सुशासन का आह्वान
President Droupadi Murmu on Goa Liberation Day and National Conference of Public Service Commissions: integrity, equality of outcomes, effective governance and civil services role explained.
गोवा मुक्ति दिवस से सुशासन तक: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संदेश—संवैधानिक मूल्य ही मजबूत भारत की नींव
✍️ प्रदेश खबर | नई दिल्ली/हैदराबाद | राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक ओर जहां गोवा मुक्ति दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों और सशस्त्र बलों के शौर्य को नमन किया, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक सेवा आयोगों (Public Service Commissions) के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक स्पष्ट और दूरदर्शी संदेश दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक मूल्य, ईमानदारी, संवेदनशीलता और दक्षता ही सुशासन और जनकल्याणकारी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की बुनियाद हैं।
गोवा मुक्ति दिवस: शौर्य और बलिदान को नमन
गोवा मुक्ति दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में कहा कि—
“इस अवसर पर राष्ट्र उन वीरों को कृतज्ञता के साथ स्मरण करता है, जिन्होंने गोवा को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए अथक संघर्ष किया। हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों और सशस्त्र बलों के अटूट संकल्प और अदम्य साहस को नमन करते हैं।”
राष्ट्रपति ने गोवा की जनता को उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गोवा की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और विकासशील सोच भारत की पहचान को और मजबूत करती है।
लोक सेवा आयोगों की भूमिका पर राष्ट्रव्यापी मंथन
हैदराबाद में तेलंगाना लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि—
“सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय तथा अवसर की समानता जैसे हमारे संवैधानिक आदर्श लोक सेवा आयोगों के कार्यकरण के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोक सेवा आयोग केवल भर्ती संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि वे भारत के प्रशासनिक भविष्य के शिल्पकार हैं।
सिविल सेवकों का योगदान: भारत की वैश्विक पहचान की नींव
राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरना, उन सिविल सेवकों के योगदान के बिना संभव नहीं होता, जिन्हें लोक सेवा आयोगों ने चुना और प्रशिक्षित किया है।
उनके अनुसार—
- नीति निर्माण
- प्रशासनिक क्रियान्वयन
- विकास योजनाओं की जमीनी डिलीवरी
में सिविल सेवकों की भूमिका निर्णायक रही है।
ईमानदारी और नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सम्मेलन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
“लोक सेवा आयोगों को उम्मीदवारों की भर्ती करते समय ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि—
- संवेदनशीलता
- नैतिक आचरण
- प्रशासनिक दक्षता
स्थायी कार्यपालिका (Permanent Executive) के लिए अनिवार्य गुण हैं, ताकि केंद्र और राज्यों में जनोन्मुखी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, प्रभावी शासन की जरूरत
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत—
- दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था
- अत्यधिक विविधताओं वाला राष्ट्र
है, ऐसे में हर स्तर पर सबसे प्रभावी शासन प्रणाली की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोगों को बदलती सामाजिक और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप खुद को निरंतर अपडेट करना होगा।
अवसर की समानता से आगे—परिणाम की समानता का लक्ष्य
राष्ट्रपति मुर्मु ने एक महत्वपूर्ण विचार रखते हुए कहा कि—
“लोक सेवा आयोगों को केवल अवसर की समानता के आदर्श तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि परिणाम की समानता के लक्ष्य को भी प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।”
यह बयान सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और प्रशासनिक संवेदनशीलता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उद्यान उत्सव 2026 की तैयारियों की समीक्षा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति निलयम, हैदराबाद में आयोजित होने वाले उद्यान उत्सव के द्वितीय संस्करण की तैयारियों की भी समीक्षा की।
इस अवसर पर उन्होंने—
- राष्ट्रपति निलयम की वनस्पति (Flora) पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन किया
- उद्यान उत्सव को 3 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक आम जनता के लिए खोलने की घोषणा की
उद्यान उत्सव का उद्देश्य प्राकृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देना है।
संवैधानिक संस्थाओं में विश्वास का संदेश
विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति के ये संदेश—
- संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती
- प्रशासनिक सुधार
- नैतिक शासन
की दिशा में स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करते हैं।
लोक सेवा आयोगों से जुड़े सम्मेलन में राष्ट्रपति की बातें आने वाले वर्षों में भर्ती प्रक्रिया, प्रशासनिक संस्कृति और सुशासन पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती हैं।
गोवा मुक्ति दिवस पर ऐतिहासिक स्मृति को नमन से लेकर लोक सेवा आयोगों को नैतिक मार्गदर्शन और उद्यान उत्सव के जरिए पर्यावरण चेतना तक—राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह संदेश स्पष्ट करता है कि—
- भारत का भविष्य संवैधानिक मूल्यों पर आधारित होगा
- प्रशासन की आत्मा ईमानदारी और संवेदनशीलता से संचालित होगी
- और विकास का मार्ग समावेशी व जनोन्मुखी रहेगा











