नई दिल्ली/जयपुर। कांग्रेस ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी के रिश्तों को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि राजस्थान की एक कमर्शियल कोर्ट के जज ने अडानी के खिलाफ फैसला सुनाया, लेकिन उसी दिन BJP सरकार ने जज को पद से हटा दिया और बाद में उनका ट्रांसफर भी कर दिया गया।
कांग्रेस के अनुसार, जिस फैसले में अडानी के खिलाफ आदेश दिया गया था, उस पर बाद में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। यह मामला करीब 1,400 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला
कांग्रेस ने बताया कि अडानी ने राजस्थान की एक सरकारी कंपनी के साथ कोयला खनन और परिवहन का अनुबंध किया था। इस अनुबंध के तहत—
- कोयला खदान से नजदीकी रेलवे लाइन तक रेल पटरी बिछाई जानी थी
- लेकिन पटरी बिछाने के बजाय ट्रकों से कोयला ढोया गया
- इसके बावजूद अडानी ने रेल परिवहन का 1,400 करोड़ रुपये किराया वसूला
कांग्रेस का आरोप है कि बाद में अडानी ने इसी राशि पर ब्याज (इंटरेस्ट) की भी मांग की, जिसके बाद सरकारी कंपनी कोर्ट पहुंची। कमर्शियल कोर्ट ने अडानी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए जुर्माना भी लगाया था।
“फैसला आया, जज हटाए गए”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जैसे ही अडानी के खिलाफ फैसला आया, नरेंद्र मोदी सरकार हरकत में आ गई और उसी दिन जज को पद से हटा दिया गया, फिर उनका ट्रांसफर कर दिया गया।
कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए कहा कि
“अडानी के खिलाफ कोई फैसला कैसे सुना सकता था? यही है ‘मोडानी गाथा’।”
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस ने कहा कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे
“नरेंद्र मोदी और अडानी मिलकर देश को लूट रहे हैं और इस लूट पर सवाल उठाने वालों को सजा दी जा रही है।”
पार्टी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है।











