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रेल किराया 107% बढ़ा, आम जनता पर 100-200 रुपये का बोझ: कांग्रेस ने ‘रील मंत्री’ अश्विनी वैष्णव पर साधा निशाना

रेल किराया बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस का सरकार पर बड़ा हमला

नई दिल्ली |रेल किराया बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि 2024 में नई सरकार बनने के बाद से अब तक दो बार रेल किराया बढ़ाया जा चुका है, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ा है।

कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर बयान जारी करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को ‘रील मंत्री’ करार दिया और कहा कि सरकार छोटे-छोटे आंकड़ों के जरिए जनता को भ्रमित कर रही है, जबकि हकीकत में यात्रियों को 100 से 200 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता डॉ. अजय कुमार ने दिल्ली में बयान देते हुए कहा कि रेल मंत्री यह बताने की कोशिश करते हैं कि किराया सिर्फ 1 पैसा या 2 पैसा प्रति किलोमीटर के हिसाब से बढ़ाया गया है, लेकिन जब इसे लंबी दूरी की यात्रा से जोड़ा जाता है, तो इसका असर सैकड़ों रुपये में सामने आता है।

डॉ. अजय कुमार ने कहा—

“ये इतने शातिर हैं कि आंकड़ों का खेल खेलते हैं। आम आदमी को यह नहीं बताया जाता कि वही 1-2 पैसे किलोमीटर के हिसाब से जोड़ने पर 100-200 रुपये ज्यादा देने पड़ते हैं। सरकार सच्चाई छुपा रही है।”


कांग्रेस का दावा है कि पिछले 10 वर्षों में रेलवे किराया कुल मिलाकर 107% तक बढ़ चुका है। पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार ने जहां एक तरफ रेलवे के निजीकरण को बढ़ावा दिया, वहीं दूसरी ओर आम यात्रियों से लगातार ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, पहले रेलवे को आम आदमी की सस्ती यात्रा का माध्यम माना जाता था, लेकिन अब यह मध्यम और गरीब वर्ग के लिए बोझ बनता जा रहा है।

कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने महंगाई, बेरोजगारी और अब रेल किराया बढ़ाकर जनता की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।

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पार्टी का आरोप है कि आज हालात यह हैं कि नौकरी, इलाज या पारिवारिक कारणों से ट्रेन से यात्रा करने वाला आम व्यक्ति हर बार टिकट बुक करते समय बढ़े हुए किराये से जूझ रहा है।

कांग्रेस का कहना है कि—

  • स्लीपर और जनरल कोच यात्रियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है
  • गरीब और मजदूर वर्ग के लिए लंबी दूरी की यात्रा मुश्किल होती जा रही है
  • छात्रों और नौकरीपेशा लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है

कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार रेलवे में सुधार और आधुनिकीकरण के नाम पर किराया क्यों बढ़ा रही है, जबकि रेलवे का बड़ा हिस्सा पहले से ही करदाताओं के पैसे से चलता है।

पार्टी का आरोप है कि—

  • वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों पर ज्यादा ध्यान
  • आम ट्रेनों की संख्या और सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं
  • प्लेटफॉर्म टिकट, रिजर्वेशन चार्ज और अन्य शुल्क भी बढ़े

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रेलवे को लाभ कमाने की मशीन बना दिया गया है, जबकि इसका मूल उद्देश्य सस्ती और सुलभ यात्रा था।

हालांकि इस मुद्दे पर सरकार की ओर से बार-बार यह कहा गया है कि

  • रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व बढ़ाना जरूरी है
  • किराया वृद्धि नाममात्र की है
  • यात्रियों को बेहतर सुविधा और सुरक्षा दी जा रही है

लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सुविधाओं का लाभ सीमित लोगों को मिल रहा है, जबकि किराया बढ़ोतरी का असर हर यात्री पर पड़ रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को आम जनता से सीधे जुड़ा विषय मानकर आगे बढ़ा रही है।
रेल किराया, महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों को जोड़कर विपक्ष सरकार पर जनविरोधी नीति का आरोप लगा रहा है।

कांग्रेस का कहना है कि वह संसद से लेकर सड़क तक रेल किराया बढ़ोतरी का विरोध जारी रखेगी और जनता को यह बताएगी कि सरकार कैसे “छोटे आंकड़ों में बड़ी मार” कर रही है।

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