दुर्ग : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बीमार बेसहारा एवं लावारिस वृद्धा को उपचार उपरांत वृद्धाश्रम में भर्ती कराया

दुर्ग : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बीमार बेसहारा एवं लावारिस वृद्धा को उपचार उपरांत वृद्धाश्रम में भर्ती कराया

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दुर्ग 18 जुलाई 2021/ राजेश श्रीवास्तव जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के दिशा निर्देश पर छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त जिलों में निवास करने वाले वृद्धजनों के सम्मान में ‘करुणा’ के नाम से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाई जा रही है।

सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री राहुल शर्मा ने बताया कि एक वृद्धा सकून बाई यादव गंजपारा क्षेत्र में बीमार अवस्था में लावारिस देखी गई। जिन्हें 108 की मदद से डिस्टिक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

उपचार पूर्ण होने के उपरांत यह ज्ञात हुआ कि वृद्धा का इस दुनिया में कोई नहीं है तत्पश्चात उनका कोविड टेस्ट कराकर उन्हें पुलगांव स्थित वृद्धाश्रम में भर्ती कराया गया।

वृद्धा की उम्र 60 साल है, वृद्धा को उनकी मर्जी से वृद्धाश्रम में भर्ती कराया गया वहां कई साल से अस्वस्थ थी एवं भीख मांग कर अपनी रोजी-रोटी किया करती थी, श्री राम देव गुप्ता एवं कांस्टेबल श्री कृपाराम ठाकुर के सहयोग से उक्त वर्ष जिनको उपचार करा कर दवाई दिलवा कर वृद्धाश्रम में भर्ती कराया गया।

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वरिष्ठ नागरिकों के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों भरण-पोषण कल्याण अधिनियम 2007 के तहत अपने संतान/परिवारजनों से भरण पोषण एवं रहन-सहन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं तथा इसके लिए विधि अनुसार परिवार न्यायालय में प्रकरण भी दर्ज किये जा सकते हैं ।

प्रायः यह देखने में आता है कि संतान अपने माता-पिता के संम्पत्ति का उपभोग करते हैं किन्तु उनके भरण-पोषण के दायित्व से अपने का अलग कर देते हैं ।

माता-पिता भी अपनी संतानों के इस कृत्य को आमजनों के सामने लाये जाने में संकोच करते हैं तथा अपने इज्जत एवं सामाजिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए संतानों के द्वारा दी जा रही पीड़ा को सहन करते हैं ।

वृद्ध माता-पिता संतानों के द्वारा दिये गये पीड़ा को सहन करते हैं तथा मानसिक रूप से कमजोर होते जाते हैं। वृद्धजनों को अपने संतानों से भरण-पोषण पाने का अधिकार है जिसके लिए उन्हें सामने आना चाहिए ।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे वृद्धजनों के लिए भरण-पोषण की राशि संतानों से दिलाये जाने के लिए प्रबल रूप से खड़ा होकर उन्हें पूरी तरह से विधिक सहायता हेतु मदद करेगा तथा उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करते हुए शासकीय व्यय पर पैनल अधिवक्ता भी उपलब्ध करायेगा ।