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अमेरिका में अश्विनी वैष्णव: भारत की टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग प्राथमिकताओं पर Indian Embassy में हुई अहम चर्चा

अमेरिका में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव: भारतीय दूतावास में टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग प्राथमिकताओं पर अहम चर्चा

वॉशिंगटन डीसी।भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत केंद्रीय रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास (Embassy of India) का दौरा किया। इस अवसर पर दूतावास की टीम ने मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और भारत की टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी प्राथमिकताओं, अवसरों और भविष्य की दिशा पर विस्तृत चर्चा हुई।

भारतीय दूतावास, अमेरिका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दूतावास की टीम को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के विचारों और दृष्टिकोण को सुनने का अवसर मिला। बातचीत का मुख्य फोकस भारत की तेजी से बढ़ती तकनीकी क्षमताओं, मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को लेकर रहा।

टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारत की प्राथमिकताएं

बैठक के दौरान मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत में टेक्नोलॉजी सेक्टर के तेजी से हो रहे विस्तार और सरकार की दीर्घकालिक योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत आज न केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार है, बल्कि डिजिटल इनोवेशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

मंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं ने भारत में स्टार्टअप्स, रिसर्च और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की युवा जनसंख्या और कुशल मानव संसाधन टेक्नोलॉजी सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत है।

मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में भारत

चर्चा के दौरान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत सरकार का लक्ष्य देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI), इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और नीतिगत सुधारों पर लगातार काम किया जा रहा है।

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उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे, टेलीकॉम और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भारत बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित कर रहा है। अमेरिका की कंपनियों के लिए भारत एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार बनकर उभर रहा है, जहां लागत प्रभावी उत्पादन के साथ-साथ स्थिर नीतिगत ढांचा उपलब्ध है।

भारत-अमेरिका साझेदारी को नई गति

बैठक में भारत और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट वेंचर और इनोवेशन के अवसरों पर भी चर्चा हुई। दूतावास के अधिकारियों ने मंत्री को अमेरिका में मौजूद भारतीय समुदाय, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के साथ समन्वय की संभावनाओं से अवगत कराया।

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह साझेदारी वैश्विक सप्लाई चेन, साइबर सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर फोकस

मुलाकात के दौरान भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बन चुका है और सरकार नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतिगत समर्थन दे रही है। उन्होंने अमेरिकी निवेशकों और टेक्नोलॉजी कंपनियों को भारत में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

भारतीय दूतावास की भूमिका

भारतीय दूतावास, वॉशिंगटन डीसी ने इस अवसर पर भारत की नीतियों, निवेश संभावनाओं और रणनीतिक प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में अपनी भूमिका को रेखांकित किया। दूतावास ने कहा कि इस तरह की उच्चस्तरीय बातचीत भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करती है और दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देती है।

भविष्य की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की यह यात्रा और दूतावास में हुई चर्चा भारत-अमेरिका टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सहयोग को और गहराई देने में सहायक साबित होगी। आने वाले समय में इससे निवेश, रोजगार सृजन और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, यह मुलाकात भारत की उस रणनीति को दर्शाती है, जिसके तहत देश को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाने का लक्ष्य रखा गया है, और अमेरिका इस यात्रा में एक अहम साझेदार के रूप में उभर रहा है।

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