
ED की बड़ी कार्रवाई: पियूष ग्रुप पर छापेमारी, ₹5 करोड़ से अधिक की नकदी और जेवर जब्त
प्रवर्तन निदेशालय ने पियूष ग्रुप ऑफ कंपनियों के खिलाफ PMLA के तहत छापेमारी कर ₹5 करोड़ से अधिक की नकदी, आभूषण और बैंक बैलेंस जब्त किए। मामला होमबायर्स से धोखाधड़ी से जुड़ा है।
ईडी की बड़ी कार्रवाई: पियूष ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी, ₹5 करोड़ से अधिक की नकदी, जेवर और बैंक बैलेंस जब्त
गुरुग्राम | 18 जनवरी 2026 |प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत पियूष ग्रुप ऑफ कंपनियों और उनके पूर्व प्रमोटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फरीदाबाद, पलवल और भिवाड़ी सहित कई ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया है। यह कार्रवाई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में होमबायर्स से धोखाधड़ी के मामले में की गई।
ईडी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, छापेमारी के दौरान पूर्व प्रमोटरों, वर्तमान रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स, कंपनी निदेशकों तथा हरियाणा के पूर्व विधायक महेंद्र प्रताप सिंह (जो एक कमर्शियल प्रोजेक्ट में पार्टनर बताए गए हैं) के परिसरों की तलाशी ली गई।
होमबायर्स के पैसे से दूसरे प्रोजेक्ट बनाने का आरोप
ईडी की जांच कई एफआईआर के आधार पर की जा रही है, जो आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) सहित विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज की गई थीं। एफआईआर में आरोप है कि प्रमोटरों ने निवेशकों और होमबायर्स को सुनिश्चित रिटर्न और समय पर कब्जा देने का लालच देकर भारी रकम वसूल की, लेकिन प्रोजेक्ट्स लंबे समय तक अधूरे रहे, न तो कब्जा दिया गया और न ही रिफंड किया गया।
जांच में यह भी आरोप सामने आए हैं कि दस्तावेजों की जालसाजी की गई, एक ही यूनिट को कई खरीदारों को अलॉट किया गया तथा बैंकों की अनुमति के बिना गिरवी रखी गई संपत्तियों को धोखाधड़ी से बेचा गया।
₹600 करोड़ से अधिक की वसूली, 2000 से ज्यादा पीड़ित
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि पियूष ग्रुप ने वर्ष 2010 से 2018 के बीच ₹600 करोड़ से अधिक की राशि होमबायर्स से एकत्र की। इस मामले में 2000 से अधिक होमबायर्स/पीड़ितों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। भौतिक निरीक्षण में कई प्रोजेक्ट्स या तो पूरी तरह बंद मिले या 50 प्रतिशत से भी कम निर्माण कार्य हुआ पाया गया।
कंपनियां CIRP में, फॉरेंसिक ऑडिट में भारी गड़बड़ी
पियूष ग्रुप की प्रमुख कंपनियां—पियूष कॉलोनाइजर्स लिमिटेड और पियूष शेल्टर्स इंडिया प्रा. लि.—फिलहाल कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत हैं। CIRP के दौरान किए गए फॉरेंसिक ऑडिट में फंड डायवर्जन और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
छापेमारी में क्या-क्या जब्त हुआ
ईडी की सर्च कार्रवाई के दौरान
- महत्वपूर्ण दस्तावेज
- खातों की किताबें
- डिजिटल डिवाइसेस
- नकदी, आभूषण और बैंक बैलेंस
कुल मिलाकर ₹5 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की गई है।
ईडी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य आरोपियों व संपत्तियों को लेकर भी कार्रवाई की जा सकती है।









