Advertisement

नवा रायपुर: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने किया डिजिटल जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन, बताया अद्वितीय

नवा रायपुर: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय का किया अवलोकन, बताया अद्वितीय

रायपुर, 23 फरवरी 2026/ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आज राजधानी नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में निर्मित देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने संग्रहालय को छत्तीसगढ़ की अनूठी पहचान बताते हुए कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को जनजातीय इतिहास, संस्कृति और संघर्षों से अवगत होना चाहिए।

जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम की गैलरियों का अवलोकन

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने संग्रहालय की विभिन्न गैलरियों में प्रदर्शित छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आंदोलनों एवं शौर्य गाथाओं को नजदीक से देखा। उन्होंने कहा कि ये गैलरियां लोगों को शोषण और अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की प्रेरणा देती हैं।

आत्मीय स्वागत

आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस प्रशांत कुमार, हाईकोर्ट बिलासपुर के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा तथा राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कल्पथी राजेंद्रन श्रीराम सहित अन्य न्यायाधीशों का बीरनमाला पहनाकर स्वागत किया एवं स्मृति स्वरूप जनजातीय जीवन पर आधारित भित्ती चित्र भेंट किया।

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

जनजातीय विद्रोहों की ऐतिहासिक प्रस्तुति

प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा ने संग्रहालय की विभिन्न गैलरियों में प्रदर्शित जनजातीय विद्रोहों की पृष्ठभूमि एवं नायकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साल, साजा और महुआ जैसे प्रतीकात्मक वृक्षों के माध्यम से जनजातीय आंदोलनों को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है, जिससे इतिहास जीवंत हो उठता है।

भूमकाल विद्रोह से हुए प्रभावित

चीफ जस्टिस सूर्यकांत भूमकाल विद्रोह की जानकारी से अत्यंत प्रभावित हुए। यह विद्रोह वर्ष 1910 में बस्तर क्षेत्र में 20 वर्षीय जननायक गुंडाधुर के नेतृत्व में औपनिवेशिक वन नीतियों, जमींदारों के शोषण एवं बाहरी हस्तक्षेप के विरुद्ध हुआ था। उन्होंने संग्रहालय में प्रदर्शित शहीद वीर नारायण सिंह की तलवार एवं अन्य जनजातीय अस्त्र-शस्त्रों का भी अवलोकन किया।

डिजिटल मंदिर में किए दर्शन

चीफ जस्टिस ने गैलरी में स्थापित मां दंतेश्वरी के प्रतीकात्मक डिजिटल मंदिर में दो बार घंटी बजाकर दर्शन किए तथा भविष्य में बस्तर जाकर प्रत्यक्ष दर्शन की इच्छा व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने किया था लोकार्पण

1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भव्य डिजिटल जनजातीय संग्रहालय का लोकार्पण किया था। तब से यह संग्रहालय जनसामान्य के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसके द्वितीय चरण के विस्तार की योजना भी तैयार की जा रही है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन एवं प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा के नेतृत्व में इस संग्रहालय का निर्माण अत्यंत बारीकी से किया गया है। यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को अपने पुरखों की वीरता, संघर्ष और साहस की प्रेरणा देता रहेगा।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47