सरगुजा ब्रेकिंग: अब अम्बिकापुर-सीतापुर में जमीन रजिस्ट्री के नियम बदले, दलालों के प्रवेश पर बैन

अम्बिकापुर 15 जुलाई 2026/ कलेक्टर श्री अजीत वसंत द्वारा भूमि के पंजीयन (रजिस्ट्री) प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने एवं जनदर्शन कार्यक्रम में प्राप्त हो रही शिकायतों के निराकरण के उद्देश्य से महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है।

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जारी आदेश के अनुसार जिला स्तरीय जनदर्शन कार्यक्रम में कई बार भूमि के पंजीयन (रजिस्ट्री) के संबंध में विक्रेता अथवा क्रेता पक्ष से अनियमितता की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इसे दृष्टिगत रखते हुए उप पंजीयक अम्बिकापुर एवं सीतापुर को आदेशित किया गया है कि किसी भी भूमि स्वामी का विक्रय पंजीयन (रजिस्ट्री) के समय क्रेता, विक्रेता, गवाह, दस्तावेज लेखक तथा क्रेता विक्रेता के वृद्ध होने पर उनके रिश्तेदार अथवा उनके अधिवक्ता की उपस्थिति में ही विक्रय पत्र का पंजीयन किया जाए।

आदेश में यह भी निर्देशित किया गया है कि पंजीयन से पूर्व उप पंजीयक क्रेता, विक्रेता एवं उपस्थित गवाहों से विक्रय पत्र निष्पादन के संबंध में उनके समक्ष विक्रय की जा रही भूमि का खसरा, रकबा तथा भूमि का विक्रय मूल्य प्राप्त हुआ है अथवा नहीं, इसकी पूरी तरह तस्दीक करने के उपरांत ही विक्रय पत्र का पंजीयन करेंगे।

आदेशानुसार यदि भूमि के पंजीयन के दौरान उपरोक्त व्यक्तियों के अतिरिक्त कोई भी अन्य अनाधिकृत व्यक्ति पंजीयन कार्यालय अम्बिकापुर अथवा सीतापुर में उपस्थित पाया जाता है तो उसके विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी। ko lekar 3000 words main news update kare

सरगुजा ब्रेकिंग: भू-माफियाओं और दलालों पर कलेक्टर अजीत वसंत का बड़ा प्रहार, रजिस्ट्री प्रक्रिया को लेकर जारी किया ऐतिहासिक कड़ा आदेश
अम्बिकापुर, 15 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ के सरगुजा (अम्बिकापुर) जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। सरगुजा जिला कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने जिले में जमीनों के फर्जीवाड़े, अवैध खरीद-बिक्री और भू-माफियाओं के चंगुल में फंसने वाले सीधे-साधे ग्रामीणों व नागरिकों को बचाने के लिए एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। जिला स्तरीय जनदर्शन कार्यक्रम में लगातार मिल रही गंभीर शिकायतों का स्वतः संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने भूमि पंजीयन (रजिस्ट्री) प्रक्रिया की पूरी कार्यप्रणाली को बदलने और उसमें अभूतपूर्व पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से एक कड़ा आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।

इस नए आदेश के लागू होने के बाद अब अम्बिकापुर और सीतापुर उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालयों में रजिस्ट्री के नाम पर होने वाले खेल और दलालों के अनधिकृत प्रवेश पर पूरी तरह से पूर्णविराम लग जाएगा। प्रशासन का यह स्पष्ट संदेश है कि जमीन रजिस्ट्री में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्यों पड़ी इस कड़े आदेश की जरूरत? जनदर्शन में खुली थी पोल
सरगुजा कलेक्ट्रेट में आयोजित होने वाले साप्ताहिक ‘जनदर्शन’ कार्यक्रम में पिछले काफी समय से जमीन संबंधी धोखाधड़ी, जबरन रजिस्ट्री कराने, और बुजुर्ग व निरक्षर भू-स्वामियों को बहला-फुसलाकर उनकी बेशकीमती जमीनें औने-पौने दामों में हड़पने की कई शिकायतें प्राप्त हो रही थीं।

अक्सर ऐसे मामले सामने आते थे जिनमें:

असली भू-स्वामी को पता ही नहीं होता था कि उसकी जमीन बिक चुकी है और उसकी जगह किसी हमशक्ल या फर्जी व्यक्ति को खड़ा कर रजिस्ट्री करा ली गई।

बुजुर्ग और लाचार ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर दलालों के जरिए उप-पंजीयक कार्यालय लाया जाता था और बिना उनकी सहमति या उन्हें बिना पूरी रकम दिए अंगूठे के निशान ले लिए जाते थे।

रजिस्ट्री दफ्तरों में अनधिकृत लोगों और बिचौलियों का जमावड़ा रहता था, जो रजिस्ट्री अधिकारियों पर दबाव बनाकर या साठगांठ कर अनुचित तरीके से जमीनों का नामांतरण व रजिस्ट्री करवा लेते थे।

इन सभी अनियमितताओं को बेहद गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने सीधे रजिस्ट्री की जड़ यानी पंजीयन प्रक्रिया पर ही कड़ा प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने का फैसला किया।

कलेक्टर के नए आदेश के मुख्य बिंदु: अब ऐसे होगी रजिस्ट्री
कलेक्टर द्वारा उप-पंजीयक अम्बिकापुर और उप-पंजीयक सीतापुर को लिखित निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश के अनुसार, अब किसी भी भूमि स्वामी के विक्रय पंजीयन (रजिस्ट्री) के समय केवल चुनिंदा अधिकृत व्यक्तियों की उपस्थिति ही अनिवार्य और मान्य होगी।

1. केवल अधिकृत व्यक्तियों की उपस्थिति होगी मान्य
जमीन की रजिस्ट्री के दौरान उप-पंजीयक कक्ष या रजिस्ट्री टेबल के आसपास केवल निम्नलिखित लोगों की मौजूदगी को ही अनुमति दी जाएगी:

क्रेता (खरीदार): जो व्यक्ति जमीन खरीद रहा है, उसकी भौतिक उपस्थिति अनिवार्य है।

विक्रेता (बेचने वाला): मूल भूमि स्वामी, जिसके नाम पर वर्तमान में जमीन का खसरा दर्ज है।

अधिकृत गवाह (साक्षी): दोनों पक्षों की पहचान की पुष्टि करने वाले गवाह।

दस्तावेज लेखक (डीड राइटर): जिन्होंने रजिस्ट्री का दस्तावेज नियमानुसार तैयार किया है।

विशेष परिस्थिति (बुजुर्ग/बीमार होने पर रिश्तेदार या अधिवक्ता): यदि क्रेता या विक्रेता बहुत वृद्ध, चलने-फिरने में असमर्थ या शारीरिक रूप से लाचार हैं, तो केवल ऐसी स्थिति में उनके किसी सगे रिश्तेदार या उनके द्वारा नियुक्त कानूनी अधिवक्ता (वकील) को ही साथ रहने की अनुमति दी जाएगी।

पंजीयन से पूर्व ‘क्रॉस-वेरिफिकेशन’ और ‘भौतिक तस्दीक’ अनिवार्य
कलेक्टर के आदेश में उप-पंजीयकों को केवल कागजी कार्रवाई पूरी करने के बजाय एक ‘जांच अधिकारी’ की तरह काम करने के निर्देश दिए गए हैं। अब किसी भी विक्रय पत्र (सेल डीड) पर हस्ताक्षर करने या उसे अंतिम रूप से पंजीकृत करने से पहले उप-पंजीयक को खुद निम्नलिखित बातों का आमने-सामने सत्यापन (तस्दीक) करना होगा:

खसरा और रकबा का सत्यापन: उप-पंजीयक खुद विक्रेता और क्रेता को बोलकर बताएंगे कि किस खसरा नंबर की और कितनी जमीन (रकबा) बेची जा रही है, ताकि किसी गलत भूमि की रजिस्ट्री न हो सके।

विक्रय मूल्य (पैसों के लेन-देन) की पुष्टि: रजिस्ट्री अधिकारी को विक्रेता से सीधे पूछना होगा कि क्या उसे भूमि के एवज में तय की गई पूरी विक्रय राशि (पैसा) प्राप्त हो चुकी है या नहीं। जब तक विक्रेता राशि मिलने की पुष्टि नहीं करता, तब तक रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

सहमति की तस्दीक: उप-पंजीयक उपस्थित गवाहों के सामने यह सुनिश्चित करेंगे कि विक्रेता बिना किसी मानसिक या शारीरिक दबाव के, अपनी स्वेच्छा से जमीन बेच रहा है।

रजिस्ट्री दफ्तरों में बाहरी तत्वों का प्रवेश प्रतिबंधित, होगी जेल और दंडात्मक कार्रवाई
कलेक्टर श्री अजीत वसंत का सबसे बड़ा और कड़ा प्रहार उप-पंजीयक कार्यालयों में सक्रिय रहने वाले बिचौलियों, दलालों और तथाकथित ‘जमीन दलालों’ पर है। आदेश में साफ और कड़े शब्दों में चेतावनी दी गई है:

“यदि भूमि के पंजीयन के दौरान क्रेता, विक्रेता, गवाह, दस्तावेज लेखक या अधिकृत रिश्तेदार/अधिवक्ता के अतिरिक्त कोई भी अन्य अनधिकृत व्यक्ति अम्बिकापुर अथवा सीतापुर के पंजीयन कार्यालय परिसर या उप-पंजीयक कक्ष में पाया जाता है, तो उसे सीधे तौर पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और धोखाधड़ी की साजिश रचने का दोषी माना जाएगा। ऐसे तत्वों के विरुद्ध पुलिस के माध्यम से तत्काल कठोर दंडात्मक व वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

इस निर्देश के बाद अब पंजीयन कार्यालयों के बाहर और भीतर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को कड़ा किया जा रहा है, जिससे आम जनता को किसी भी प्रकार के शोषण से बचाया जा सके।

अम्बिकापुर और सीतापुर उप-पंजीयक कार्यालयों में हलचल तेज
इस आदेश के जारी होते ही पूरे सरगुजा जिले के जमीन कारोबारियों, दलालों और भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है। अम्बिकापुर और सीतापुर के रजिस्ट्रार कार्यालयों में आज से ही सघन निगरानी शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से न केवल रजिस्ट्री से जुड़े विवादों और अदालती मामलों में कमी आएगी, बल्कि जनदर्शन में आने वाली शिकायतों का भी जड़ से खात्मा हो सकेगा।

कलेक्टर अजीत वसंत के इस ऐतिहासिक जनहितैषी निर्णय की सरगुजा संभाग के बुद्धिजीवियों, किसानों और आम नागरिकों द्वारा व्यापक सराहना की जा रही है। लोगों का मानना है कि इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और सीधे-साधे किसानों की जमीनों को धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।

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प्रशासनिक सुधार एवं जनहितकारी पहल

भू-माफियाओं और दलालों पर कलेक्टर अजीत वसंत का बड़ा प्रहार

स्थान: अम्बिकापुर (सरगुजा), छत्तीसगढ़ | दिनांक: 15 जुलाई 2026
आधिकारिक आदेश बुलेटिन

कलेक्टर श्री अजीत वसंत द्वारा भूमि के पंजीयन (रजिस्ट्री) प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने एवं जनदर्शन कार्यक्रम में प्राप्त हो रही शिकायतों के त्वरित व स्थाई निराकरण के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा शासकीय आदेश जारी किया गया है।

अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। जिला स्तर पर आयोजित होने वाले कलेक्टर जनदर्शन कार्यक्रमों में जमीन धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और निरक्षर या बुजुर्ग ग्रामीणों के साथ रजिस्ट्री के दौरान होने वाली अनियमितताओं के मामलों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए, जिला कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

कलेक्टर द्वारा जारी इस नए और कड़े दिशा-निर्देश के तहत अब रजिस्ट्री कार्यालयों में बिचौलियों, दलालों और अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान केवल वही लोग उपस्थित रह सकेंगे जिनका सीधा संबंध उस सौदे से है। ऐसा न होने पर कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

1. ऐतिहासिक आदेश की पृष्ठभूमि: जनदर्शन की शिकायतें बनीं वजह

लगातार आयोजित होने वाले साप्ताहिक ‘जनदर्शन’ कार्यक्रमों में कलेक्टर के समक्ष भू-माफियाओं और जमीन दलालों के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें आ रही थीं। इनमें से अधिकांश शिकायतों में यह देखा गया कि भू-स्वामियों को अंधेरे में रखकर, या उन्हें उनकी भूमि की पूरी कीमत दिए बिना ही उनकी जमीनें गैर-कानूनी तरीके से अन्य व्यक्तियों के नाम पंजीकृत करा दी जाती थीं।

विशेष रूप से ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के सीधे-साधे और अनपढ़ किसानों, तथा चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्गों को झांसा देकर उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालयों में खड़ा कर दिया जाता था और शासकीय अधिकारियों के समक्ष वास्तविकता को छिपाकर अनुचित लाभ अर्जित किया जाता था। इन अनियमितताओं को जड़ से समाप्त करने और पूरी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए ही यह अभूतपूर्व आदेश जारी किया गया है।

2. उप-पंजीयक अम्बिकापुर एवं सीतापुर को सख्त निर्देश

जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने सीधे तौर पर उप-पंजीयक अम्बिकापुर एवं उप-पंजीयक सीतापुर को लिखित रूप से निर्देशित किया है कि वे पंजीयन के समय बेहद सतर्कता बरतें। अब किसी भी भूमि स्वामी का विक्रय पंजीयन (रजिस्ट्री) करते समय रजिस्ट्री कक्ष में केवल और केवल निम्नलिखित अधिकृत व्यक्तियों की भौतिक उपस्थिति ही स्वीकार्य होगी:

अधिकृत व्यक्ति
उपस्थिति की भूमिका और नियम

1. क्रेता (Buyer)
जमीन खरीदने वाला मूल व्यक्ति, जिसकी पहचान का सत्यापन अनिवार्य होगा।

2. विक्रेता (Seller)
भूमि का वास्तविक स्वामी जिसका नाम राजस्व दस्तावेजों (खसरा) में दर्ज है।

3. गवाह (Witnesses)
दोनों पक्षों के आधिकारिक साक्षी जो क्रेता-विक्रेता की पहचान और समझौते की पुष्टि करेंगे।

4. दस्तावेज लेखक
रजिस्ट्री का मसौदा (डीड) तैयार करने वाला अधिकृत लेखक या डीड राइटर।

5. रिश्तेदार / अधिवक्ता
विशेष परिस्थिति में: यदि क्रेता अथवा विक्रेता अत्यंत वृद्ध, अस्वस्थ या अक्षम हैं, तो केवल उनके सगे रिश्तेदार या उनके द्वारा अधिकृत वकील को ही प्रवेश मिलेगा।

3. ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ और ‘क्रॉस-चेकिंग’ अनिवार्य

अब रजिस्ट्री की प्रक्रिया केवल औपचारिक हस्ताक्षरों तक सीमित नहीं रहेगी। कलेक्टर के निर्देशानुसार, उप-पंजीयक को रजिस्ट्री का निष्पादन करने से ठीक पहले क्रेता, विक्रेता तथा उपस्थित गवाहों से सीधी पूछताछ (क्रॉस-वेरिफिकेशन) करनी होगी। उप-पंजीयक को यह सुनिश्चित करना होगा कि:

  • खसरा एवं रकबे की पुष्टि: क्या क्रेता और विक्रेता दोनों को इस बात की पूरी जानकारी है कि किस खसरा नंबर की कितनी भूमि का सौदा हो रहा है?
  • वास्तविक मूल्य की प्राप्ति: क्या विक्रेता को उसकी भूमि का तयशुदा पूरा विक्रय मूल्य (पैसा) प्राप्त हो चुका है?
  • स्वैच्छिक सहमति: क्या विक्रेता बिना किसी बाहरी दबाव, डराने-धमकाने या धोखे के अपनी मर्जी से यह जमीन बेच रहा है?

इन सभी तथ्यों की उप-पंजीयक द्वारा पूरी तरह से तस्दीक (सत्यापन) किए जाने के उपरांत ही विक्रय पत्र का पंजीयन (रजिस्ट्री) अंतिम रूप से किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर संदेह होता है, तो रजिस्ट्री को तुरंत रोका जा सकेगा।

4. दलालों और अनधिकृत तत्वों के प्रवेश पर दंडात्मक कार्रवाई

इस आदेश का सबसे कड़ा हिस्सा बिचौलियों और अनाधिकृत लोगों पर नकेल कसने से संबंधित है। अक्सर देखा जाता था कि रजिस्ट्री कार्यालयों में कई ऐसे लोग घूमते रहते थे जिनका किसी विशेष रजिस्ट्री से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता था, लेकिन वे दलाली के उद्देश्य से वहां सक्रिय रहते थे।

“यदि भूमि के पंजीयन के दौरान उपरोक्त अधिकृत व्यक्तियों के अतिरिक्त कोई भी अन्य अनाधिकृत व्यक्ति पंजीयन कार्यालय अम्बिकापुर अथवा सीतापुर के परिसर या उप-पंजीयक कक्ष में पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल शासकीय कार्य में व्यवधान डालने और जालसाजी की धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

— कलेक्टर अजीत वसंत द्वारा जारी शासकीय निर्देश से उद्धृत

5. इस ऐतिहासिक निर्णय का संभावित प्रभाव

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस कड़े आदेश के लागू होने से सरगुजा संभाग में जमीन विवादों से जुड़े दीवानी मामलों (Civil Suits) में भारी कमी आएगी। साथ ही, राजस्व न्यायालयों और थानों में आने वाली जमीन धोखाधड़ी की शिकायतों का स्तर भी काफी नीचे जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब, भोले-भाले आदिवासी और किसान भाई अब किसी भी तरह के छलावे का शिकार होने से बच सकेंगे। रजिस्ट्री की लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग और वास्तविक समय पर पूछताछ से पंजीयन विभाग की विश्वसनीयता में भी भारी वृद्धि होगी।

विशेष ध्यानाकर्षण (Important Notice):

समस्त नागरिकों से अपील की जाती है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान केवल अपने अधिकृत गवाहों और आवश्यक दस्तावेजों के साथ ही उप-पंजीयक कार्यालय में उपस्थित हों। किसी भी बिचौलिए या अनधिकृत व्यक्ति के माध्यम से लेनदेन या संपर्क न करें। गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे कलेक्ट्रेट या संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय को सूचित करें।



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