विशेष समाचार: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) खरीफ 2026
अम्बिकापुर/ छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के लिए इस समय की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी खबर कृषि विभाग से आ रही है। भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2026 के लिए फसलों का बीमा कराने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कृषि विभाग के उपसंचालक ने जिले के सभी अंचल के किसानों से पुरजोर अपील की है कि वे किसी भी अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा से अपनी फसलों को सुरक्षित करने के लिए आगामी 31 जुलाई 2026 की अंतिम तिथि से पहले अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा अनिवार्य रूप से करा लें।
यह योजना मुख्य रूप से देश और राज्य के अन्नदाताओं को खेती-किसानी में मौसम की अनिश्चितताओं से होने वाले भारी आर्थिक नुकसान से बचाने और उन्हें एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई है। इस विस्तृत समाचार रिपोर्ट में हम योजना के सभी प्रमुख बिंदुओं, प्रीमियम दरों, शामिल फसलों, जरूरी दस्तावेजों और आवेदन की संपूर्ण प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाल रहे हैं ताकि क्षेत्र का कोई भी किसान जानकारी के अभाव में इस बड़े लाभ से वंचित न रह जाए।
1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ( खरीफ 2026) का मूल उद्देश्य
भारतीय कृषि हमेशा से ही ‘मानसून का जुआ’ कहलाती आई है, जहाँ कभी अत्यधिक बारिश (बाढ़), कभी भीषण सूखा, तो कभी अचानक ओलावृष्टि और कीटों का भीषण हमला हरी-भरी फसलों को देखते ही देखते बर्बाद कर देता है। ऐसे कठिन समय में एक आम किसान पूरी तरह कर्ज के दलदल में धंस जाता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) इसी बड़ी समस्या का स्थायी और संस्थागत समाधान है।
इस योजना के क्रियान्वयन के पीछे सरकार के मुख्य लक्ष्य निम्नलिखित हैं:
- वित्तीय स्थिरता प्रदान करना: प्राकृतिक आपदाओं, प्रतिकूल मौसम दशाओं, स्थानीय जोखिमों और कीड़ों के कारण यदि अधिसूचित फसलों को कोई नुकसान पहुंचता है, तो पीड़ित किसानों को क्लेम (दावा) राशि प्रदान कर उनकी आर्थिक स्थिति को संभाला जाता है।
- कृषि कार्यों में निरंतरता: फसल खराब होने के बाद भी किसान को अगली सीजन (रबी या खरीफ) की खेती के लिए आवश्यक इनपुट (बीज, खाद, जुताई) का इंतजाम करने के लिए किसी साहूकार के आगे हाथ न फैलाना पड़े और वह दोबारा सम्मान के साथ खेती कर सके।
- आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा: जोखिम कम होने से किसान नई कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं, जिससे अंततः उनकी आय में वृद्धि होती है।
- कृषि ऋण का सुचारू प्रवाह: बीमा सुरक्षा होने से बैंकिंग संस्थान भी किसानों को कृषि ऋण (KCC) देने में संकोच नहीं करते, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है।
2. खरीफ वर्ष 2026 के लिए अधिसूचित फसलें
कृषि विभाग अम्बिकापुर (सरगुजा जिला) द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, खरीफ 2026 के मौसम के लिए जिले के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण फसलों को बीमा के दायरे में शामिल यानी अधिसूचित (Notify) किया गया है। क्षेत्र के किसान निम्नलिखित फसलों के लिए सरकारी नियमों के तहत सब्सिडी वाले प्रीमियम पर बीमा सुरक्षा का लाभ उठा सकते हैं:
- धान (सिंचित): सिंचित क्षेत्रों में उगाई जाने वाली धान की उन्नत किस्में।
- धान (असिंचित): पूरी तरह वर्षा जल पर निर्भर रहने वाली पारंपरिक धान की खेती।
- मक्का: खाद्यान्न और चारे दोनों के लिए उगाई जाने वाली प्रमुख खरीफ फसल।
- अरहर (तुअर): दलहन की मुख्य और लंबी अवधि की फसल।
- उड़द: कम दिनों में पककर तैयार होने वाली महत्वपूर्ण दलहन फसल।
- मूंग: खरीफ सीजन की एक और आवश्यक लघु अवधि की दलहन।
- मूंगफली: तेलहन फसलों के अंतर्गत आने वाली प्रमुख नगदी फसल।
- सोयाबीन: व्यावसायिक रूप से देश और राज्य की सबसे बड़ी तेलहन फसल।
- कोदो, कुटकी एवं रागी (मिलेट्स): छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विशेष रूप से प्रमोट किए जा रहे पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज (मिलेट्स) को भी इस योजना में प्रमुखता दी गई है।
3. प्रीमियम का गणित: किसानों पर सिर्फ 2% का मामूली भार
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सबसे कल्याणकारी विशेषता यह है कि इसमें किसानों को व्यावसायिक बीमा पॉलिसियों की तरह भारी-भरकम प्रीमियम नहीं देना होता। खरीफ की सभी अधिसूचित फसलों के लिए किसानों को कुल निर्धारित बीमित राशि (Sum Insured) का **मात्र 2 प्रतिशत (2%) प्रीमियम** ही अपनी जेब से देना होता है।
किसानों के हिस्से के इस 2% प्रीमियम के बाद बची हुई जितनी भी बड़ी प्रीमियम राशि (जिसे एक्चुरियल प्रीमियम कहा जाता है) होती है, उसका पूरा वित्तीय बोझ **भारत सरकार (केंद्र शासन) और छत्तीसगढ़ सरकार (राज्य शासन)** द्वारा आधा-आधा (50:50 के अनुपात में) वहन किया जाता है। इसे सरकारी प्रीमियम सब्सिडी कहा जाता है।
प्रति हेक्टेयर निर्धारित कृषक प्रीमियम राशि की सूची
कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए अम्बिकापुर जिले के लिए प्रति हेक्टेयर के आधार पर तय की गई कृषक प्रीमियम राशि का विवरण नीचे दी गई सारणी में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है:
| क्र. सं. | अधिसूचित खरीफ फसल का नाम | कृषक द्वारा देय प्रीमियम राशि (प्रति हेक्टेयर ₹ में) |
|---|---|---|
| 1 | धान (असिंचित) | ₹ 880 |
| 2 | मक्का | ₹ 814 |
| 3 | धान (सिंचित) | ₹ 110 |
| 4 | अरहर (तुअर) | ₹ 660 |
| 5 | सोयाबीन | ₹ 660 |
| 6 | मूंगफली | ₹ 924 |
| 7 | उड़द | ₹ 484 |
| 8 | मूंग | ₹ 484 |
| 9 | कुटकी | ₹ 374 |
| 10 | कोदो | ₹ 352 |
| 11 | रागी | ₹ 330 |
उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार ने आम गरीब और सीमांत किसानों की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए दरें बेहद किफायती रखी हैं। उदाहरण के लिए, धान (सिंचित) जैसी मुख्य फसल के लिए एक किसान मात्र 110 रुपये प्रति हेक्टेयर का भुगतान करके अपनी पूरी फसल की सुरक्षा की गारंटी प्राप्त कर सकता है।
4. जोखिम के प्रकार: किन-किन परिस्थितियों में मिलता है क्लेम?
यह योजना केवल एक या दो प्रकार के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बुवाई के पूर्व के चरण से लेकर फसल कटने के बाद घर आने तक के पूरे लाइफ साइकिल (जीवन चक्र) को कवर करती है। मुख्य रूप से निम्नलिखित चार चरणों में बीमा सुरक्षा लागू होती है:
अ. बुवाई/रोपाई न हो पाना (Prevented Sowing/Planting Risk)
यदि सीजन की शुरुआत में ही मौसम की प्रतिकूलताओं (जैसे लंबे समय तक सूखा पड़ना, बारिश न होना या अचानक आई बाढ़ के कारण खेत का पूरी तरह जलमग्न हो जाना) के चलते किसान अपने अधिसूचित क्षेत्र में फसल की बुवाई या धान की रोपाई करने में पूरी तरह असमर्थ रहता है, तो ऐसी स्थिति में बीमित किसानों को राहत राशि प्रदान की जाती है।
ब. खड़ी फसल को नुकसान (Standing Crop Loss)
बुवाई संपन्न होने से लेकर फसल की कटाई के ठीक पहले तक की लंबी अवधि के दौरान यदि सूखा, बाढ़, अचानक जलभराव, लंबे समय तक धूप न निकलना, कीटों का बड़े पैमाने पर हमला, फसलों में लगने वाली जानलेवा बीमारियां, भूस्खलन, आकाशीय बिजली गिरना या प्राकृतिक रूप से लगने वाली आग के कारण खड़ी फसल को व्यापक क्षति पहुँचती है, तो पूरी जांच के बाद क्लेम राशि दी जाती है।
स. स्थानीय आपदाएं (Localized Calamities)
कई बार पूरी तहसील या ब्लॉक में नुकसान नहीं होता, बल्कि कुछ चुनिंदा गांवों या व्यक्तिगत खेतों में ही प्राकृतिक कहर टूट पड़ता है। इस योजना के अंतर्गत ओलावृष्टि (Hailstorm), जमीन धंसने (Landslide), बादल फटने या बेमौसम भारी बारिश के कारण व्यक्तिगत खेत के स्तर पर हुए नुकसान का सर्वे कराकर सीधे प्रभावित किसान को मुआवजा देने का विशेष प्रावधान है।
द. फसल कटाई के उपरांत नुकसान (Post-Harvest Losses)
यह इस योजना का सबसे मजबूत पहलू है। यदि किसान ने फसल काट ली है और उसे खेत में सूखने के लिए छोटे-छोटे बंडलों में (Spread condition) रखा हुआ है, और उस दौरान (कटाई के अधिकतम 14 दिनों के भीतर) यदि अचानक कोई चक्रवात (Cyclone), ओलावृष्टि या बेमौसम मूसलाधार बारिश हो जाती है और फसल नष्ट हो जाती है, तो भी किसान को हुए नुकसान का पूरा क्लेम मिलता है।
स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं (जैसे ओलावृष्टि, जलभराव) या फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान की स्थिति में प्रभावित किसान को नुकसान होने के ठीक 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना प्राधिकृत अधिकारियों या संस्थाओं को देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। देर से दी गई सूचनाओं पर क्लेम मिलना बेहद मुश्किल होता है।
नुकसान की सूचना कहाँ और कैसे दर्ज कराएं?
किसान भाई निम्नलिखित में से किसी भी एक आसान माध्यम से 72 घंटे के भीतर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
- टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: भारत सरकार द्वारा जारी किए गए राष्ट्रीय शिकायत निवारण टोल-फ्री नंबर 14447 पर सीधे कॉल करके अपनी समस्या दर्ज कराएं।
- संबंधित बैंक शाखा: जिस बैंक या सहकारी समिति से आपके प्रीमियम की कटौती हुई है, वहां जाकर लिखित आवेदन दें।
- लोक सेवा केंद्र (CSC): अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर के संचालक के माध्यम से पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
- विभाग के अधिकारी: अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO), पटवारी या जिला कृषि कार्यालय में सीधे संपर्क कर लिखित सूचना दें।
5. पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट
कृषि विभाग के उपसंचालक ने स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ लेने के लिए क्षेत्र के सभी श्रेणी के किसान पूरी तरह स्वतंत्र और पात्र हैं। इन्हें दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- ऋणी किसान (Loanee Farmers): ऐसे किसान जिन्होंने किसी भी मान्यता प्राप्त वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक या प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (सोसायटी) से केसीसी (KCC) या अल्पकालिक कृषि ऋण लिया हुआ है।
- अऋणी किसान (Non-Loanee Farmers): ऐसे किसान जिन्होंने बैंक से कोई लोन नहीं लिया है, लेकिन वे स्वेच्छा से अपनी गाढ़ी कमाई की फसल को सुरक्षित रखने के लिए इस योजना से जुड़ना चाहते हैं। बटाईदार या किराये पर खेती करने वाले किसान भी आवश्यक अनुबंध के साथ इसका लाभ ले सकते हैं।
आवेदन के समय प्रस्तुत किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेज:
अऋणी किसानों को या स्वयं ऑनलाइन आवेदन करने वाले किसानों को निम्नलिखित वैध दस्तावेजों की प्रतियों को आवेदन फॉर्म के साथ संलग्न करना होगा:
- आधार कार्ड: किसान का मुख्य पहचान और राष्ट्रीय प्रमाणीकरण दस्तावेज।
- भूमि संबंधी दस्तावेज: जमीन के मालिकाना हक को दर्शाने वाली नवीनतम बी-1 (B-1) कॉपी, खसरा पांचशाला या बैंक द्वारा जारी ऋण पुस्तिका।
- बैंक पासबुक: राष्ट्रीयकृत या सहकारी बैंक के एक्टिव खाते की पासबुक के प्रथम पृष्ठ की स्पष्ट फोटोकॉपी, जिसमें खाताधारक का नाम, खाता संख्या और बैंक का आईएफएससी (IFSC) कोड साफ-साफ पढ़ा जा सके।
- बोनी प्रमाण पत्र / स्वघोषणा पत्र: संबंधित पटवारी या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा सत्यापित बोनी प्रमाण पत्र या किसान द्वारा स्वयं प्रमाणित किया गया स्वघोषणा पत्र कि उसने उक्त भूमि पर कौन सी फसल बोई है।
- सक्रिय मोबाइल नंबर: सूचनाओं और ओटीपी (OTP) के आदान-प्रदान के लिए एक चालू मोबाइल नंबर।
6. सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी निर्देश: आधार और बैंक खाता लिंकिंग अनिवार्य
इस वर्ष की अधिसूचना में कृषि विभाग ने किसानों को एक बेहद जरूरी तकनीकी चेतावनी जारी की है। फसल बीमा का सुचारू और बिना किसी रुकावट के लाभ प्राप्त करने के लिए प्रत्येक किसान को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका आधार लिंक्ड मोबाइल नंबर उसके संबंधित बैंक खाते से अनिवार्य रूप से जुड़ा (सीडेड) हो।
यह क्यों अनिवार्य है?
भारत सरकार के डिजिटल इंडिया और डीबीटी (Direct Benefit Transfer) नियमों के अनुसार, अब किसी भी प्रकार की क्लेम राशि या सरकारी सब्सिडी का भुगतान सीधे आधार आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) के माध्यम से किसान के खाते में ट्रांसफर किया जाता है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के राष्ट्रीय पोर्टल पर आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication) की प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है। बिना आधार वेरिफिकेशन के कोई भी बीमा प्रस्ताव (Proposal Form) सिस्टम द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
7. आवेदन कहाँ करें? (बीमा कराने के अधिकृत केंद्र)
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई ऑफलाइन और ऑनलाइन विकल्प खुले रखे हैं। किसान अपनी सुविधानुसार 31 जुलाई 2026 तक नीचे दिए गए किसी भी माध्यम से अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं:
- राष्ट्रीयकृत बैंक: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया आदि की स्थानीय शाखाएं।
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक (CRGB) की निकटतम शाखा।
- सहकारी बैंक एवं सोसायटियाँ: जिला सहकारी केंद्रीय बैंक या ग्राम स्तर पर संचालित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (लैम्प्स/सोसायटी)।
- लोक सेवा केंद्र (CSC): चॉइस सेंटर या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर मामूली शुल्क देकर ऑनलाइन एंट्री कराई जा सकती है।
- ऑनलाइन सेल्फ रजिस्ट्रेशन: यदि किसान तकनीकी रूप से सक्षम है, तो वह सीधे योजना के आधिकारिक वेब पोर्टल pmfby.gov.in या ‘Crop Insurance’ मोबाइल ऐप के माध्यम से खुद भी घर बैठे आवेदन जमा कर सकता है।
8. कृषि विभाग की अंतिम अपील: समय रहते लें निर्णय
समाचार के अंत में, अम्बिकापुर के उपसंचालक (कृषि) ने सरगुजा संभाग और जिले के सभी किसान भाइयों, किसान संगठनों और ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि अक्सर यह देखा गया है कि किसान अंतिम तारीख यानी 31 जुलाई का इंतजार करते हैं। अंतिम 2-3 दिनों में देश भर से लाखों किसान एक साथ पोर्टल पर लॉग इन करते हैं, जिससे सर्वर पर भारी दबाव पड़ता है और तकनीकी गड़बड़ियां या पोर्टल का स्लो होना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसके कारण कई प्रगतिशील किसान भी अनजाने में बीमा कराने से वंचित रह जाते हैं।
प्रकृति का मिजाज कब बदल जाए, इसका कोई पूर्वानुमान शत-प्रतिशत सटीक नहीं होता। इसलिए, एक समझदार किसान की तरह अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना, आज ही अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों को एकत्रित करें, अपने बैंक खाते की जांच करें और समय पर अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा कराकर निश्चिंत हो जाएं। यह योजना प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले वित्तीय आघात से आपकी और आपके परिवार की रक्षा करने वाली शासन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और किसान हितैषी योजना है, इसका अधिकतम लाभ उठाएं।















