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अम्बिकापुर: सरकारी कोटवारी भूमि की अवैध बिक्री पर सख्त कार्रवाई, तहसीलदार न्यायालय ने जारी किया अंतिम नोटिस






अम्बिकापुर: सरकारी कोटवारी भूमि की अवैध बिक्री पर प्रशासन सख्त, न्यायालय ने वर्तमान भू-स्वामियों को जारी किया अंतिम नोटिस


विशेष राजस्व कार्रवाई

अम्बिकापुर: सरकारी कोटवारी भूमि की अवैध बिक्री पर प्रशासन सख्त, तहसीलदार न्यायालय ने वर्तमान भू-स्वामियों को जारी किया अंतिम नोटिस; 17 जुलाई को पेशी

रिपोर्टर: ब्यूरो चीफ़, सरगुजा
दिनांक: 14 जुलाई, 2026
विभाग: राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़

अम्बिकापुर, 14 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग मंत्रालय (महानदी भवन, नवा रायपुर) और कार्यालय कलेक्टर (भू-अभिलेख शाखा) अम्बिकापुर के कड़े निर्देशों के बाद सरगुजा जिले में सरकारी सेवाभूमि और कोटवारी मद की जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। शासकीय भूमि को निजी संपत्ति बनाकर बेचने वाले और उसे खरीदने वाले वर्तमान खातेदारों के खिलाफ तहसीलदार न्यायालय अम्बिकापुर में मामले दर्ज कर सुनवाई तेज कर दी गई है।

शासन के निर्देश पर भू-अभिलेख शाखा की बड़ी कार्रवाई

प्राप्त जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि कोटवारों को सेवा काल के दौरान जीविकोपार्जन के लिए आवंटित की गई ‘कोटवारी/सेवाभूमि’ शासकीय संपत्ति होती है। इस भूमि को न तो बेचा जा सकता है और न ही किसी अन्य के नाम पर हस्तांतरित किया जा सकता है। इसके बावजूद सरगुजा जिले के कई क्षेत्रों में भू-माफियाओं और स्थानीय साठगांठ से इन जमीनों की धड़ल्ले से रजिस्ट्री कराकर इन्हें निजी कृषि या आवासीय भूमि के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया गया। कलेक्टर अम्बिकापुर द्वारा इस मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए सभी तहसीलदारों को त्वरित जांच और समुचित दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

ग्राम मनीपुर में खुला अवैध भूमि हस्तांतरण का बड़ा खेल

तहसीलदार अम्बिकापुर से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हल्का पटवारी के माध्यम से ग्राम मनीपुर के राजस्व रिकॉर्ड्स और पुराने सेटलमेंट की विस्तृत जांच कराई गई। पटवारी द्वारा सौंपे गए प्रतिवेदन (जांच रिपोर्ट) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्राम मनीपुर के मूल सरगुजा सेटलमेंट के अनुसार, खसरा नंबर 378 (कुल रकबा 0.064 एकड़) भूमि मूल रूप से ‘कोटवारी मद’ में दर्ज है। इस सेवाभूमि के मूल आधिपत्यधारी के रूप में सोमा मुन्डा वल्द तेलंगा मुन्डा (कौम मुन्डा, निवासी: अपुर टोला, मनीपुर) का नाम दर्ज है।

जांच में यह बात सामने आई है कि इस मूल शासकीय कोटवारी खसरे को कई टुकड़ों (बटांकन) में बांटकर अलग-अलग निजी व्यक्तियों के नाम पर ‘कृषि भूमि’ के रूप में दर्ज कर दिया गया है। प्रशासन ने ऐसे चार प्रमुख मामलों की पहचान की है, जहां वर्तमान में निजी लोगों का नाम राजस्व रिकॉर्ड में चढ़ा हुआ है।

जांच में चिन्हित किए गए चार प्रमुख संदिग्ध मामले

पटवारी प्रतिवेदन और वर्तमान राजस्व अभिलेखों (बी-1/खसरा खतौनी) के मिलान के बाद जिन चार वर्तमान भू-स्वामियों/खातेदारों के नाम सामने आए हैं, उनका विवरण इस प्रकार है:

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क्र. मूल सेटलमेंट रिकॉर्ड (कोटवारी मद) वर्तमान खसरा नंबर व रकबा वर्तमान दर्ज खातेदार/भूमिस्वामी का नाम व पता वर्तमान भूमि का प्रकार
1 खसरा नंबर 378, रकबा 0.064 एकड़ (सोमा मुन्डा) 378/5
रकबा 0.024 हेक्टेयर
प्रमीला राजवाड़े पति नन्दकिशोर राजवाड़े
(जाति: रजवार)
कृषि भूमि
2 खसरा नंबर 378, रकबा 0.064 एकड़ (सोमा मुन्डा) 378/3
रकबा 0.061 हेक्टेयर
विमला त्रिपाठी पति संतोष कुमार त्रिपाठी
(वर्ग: सामान्य, पता: अपुर)
कृषि भूमि
3 खसरा नंबर 378, रकबा 0.064 एकड़ (सोमा मुन्डा) 378/1
रकबा 0.054 हेक्टेयर
आनन्द कुमार पिता मिश्रीलाल
(जाति: पनिका)
कृषि भूमि
4 खसरा नंबर 378, रकबा 0.064 एकड़ (सोमा मुन्डा) 378/8
रकबा 0.012 हेक्टेयर
शशिकला पति अनंत कुमार
(वर्ग: सामान्य, पता: राजनगर काॅलोनी, अनुपपुर, म.प्र.)
कृषि भूमि

मध्य प्रदेश के खरीदार भी जांच के दायरे में

राजस्व विभाग की इस जांच में एक खास बात यह भी सामने आई है कि ग्राम मनीपुर की इस विवादित कोटवारी भूमि का एक हिस्सा (खसरा नंबर 378/8) अंतरराज्यीय स्तर पर बेचा गया है। इसकी वर्तमान खरीदार और खातेदार शशिकला पति अनंत कुमार हैं, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले (राजनगर कॉलोनी, थाना व तहसील अनूपपुर) की निवासी हैं। प्रशासन इस बात की भी गहनता से जांच कर रहा है कि प्रतिबंधित श्रेणी की इस भूमि की रजिस्ट्री और नामांतरण की अनुमति किन परिस्थितियों में और किस स्तर के अधिकारियों द्वारा दी गई।

नोटिस तामिल न होने के कारण अदम तामिली में अटका था मामला

तहसीलदार न्यायालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में वर्तमान भूमिस्वामियों/खातेदारों को अपना पक्ष रखने और सुनवाई के लिए पूर्व में भी नोटिस जारी किए गए थे। न्यायालय का नियम है कि किसी भी एकपक्षीय कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को अपनी बेगुनाही या दस्तावेज पेश करने का पूरा मौका दिया जाए।

किंतु, संबंधित व्यक्तियों के पते स्पष्ट या सही न मिल पाने के कारण अथवा अन्य तकनीकी कारणों से मालजमादार (राजस्व नोटिस तामिल करने वाला कर्मचारी) द्वारा नोटिस को ‘अदम तामिली’ (बिना तामिल हुए) की स्थिति में न्यायालय को वापस लौटा दिया गया था। इस वजह से यह संवेदनशील प्रकरण काफी समय से तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन और लंबित पड़ा हुआ था।

17 जुलाई 2026 को न्यायालय में हाजिर होने का अंतिम अवसर

चूंकि वर्तमान खातेदारों को व्यक्तिगत रूप से सूचना पत्र (नोटिस) तामिल नहीं हो सका है, इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए तहसीलदार न्यायालय अम्बिकापुर द्वारा अब एक सार्वजनिक व अंतिम नोटिस (Public Notice) जारी किया गया है।

इस अधिसूचना के माध्यम से वर्तमान सभी खातेदारों—श्रीमती प्रमीला राजवाड़े, श्रीमती विमला त्रिपाठी, श्री आनन्द कुमार और श्रीमती शशिकला (अनूपपुर, म.प्र.) को सूचित किया गया है कि वे आगामी 17 जुलाई 2026 को नियत पेशी के दिन न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से स्वयं उपस्थित हों, अथवा अपने अधिकृत अभिभाषक (वकील) के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष समर्थन (जवाब और दस्तावेज) प्रस्तुत करें।

⚠️ अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना एवं समय-सीमा

न्यायालय द्वारा स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि संबंधित भू-स्वामी या उनके प्रतिनिधि 17 जुलाई 2026 को न्यायालय में उपस्थित नहीं होते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है। इसके पश्चात न्यायालय रिकॉर्ड के आधार पर एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए भूमि को पुनः शासकीय मद (कोटवारी) में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। निर्धारित समय-सीमा के बाद प्राप्त किसी भी दावा-आपत्ति पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।

क्या होती है कोटवारी/सेवाभूमि और क्यों इस पर है प्रतिबंध?

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (Land Revenue Code) के तहत ग्राम कोटवारों को राजस्व प्रशासन और पुलिस की सहायता करने के बदले पारिश्रमिक स्वरूप ‘सेवा भूमि’ दी जाती है। यह भूमि पूरी तरह से राज्य शासन के स्वामित्व में होती है। कानूनन, कोटवार इस भूमि का उपयोग केवल खेती कर अपनी आजीविका चलाने के लिए कर सकता है। उसे इस भूमि को बेचने, बंधक रखने, लीज पर देने या किसी भी प्रकार से हस्तांतरित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है। यदि कोई कोटवार ऐसी भूमि बेचता है, या कोई आम नागरिक इसे खरीदता है, तो वह क्रय-विक्रय पूरी तरह से अवैध और शून्य (Void) माना जाता है, तथा शासन को इसे किसी भी समय वापस अधिग्रहित करने का अधिकार है।

अम्बिकापुर में शुरू हुई इस बड़ी कार्रवाई से उन सभी लोगों में हड़कंप मच गया है, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में कौड़ियों के भाव कोटवारों से जमीनें खरीदी थीं। जिला प्रशासन की इस सख्त रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में सरगुजा जिले के अन्य गांवों में भी ऐसी अवैध रूप से बेची गई सरकारी जमीनों पर गाज गिरनी तय है।


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