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राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव की 93वीं जयंती: टीएस सिंहदेव की उपस्थिति में राजीव भवन में दी गई श्रद्धांजलि






राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव की 93वीं जयंती: राजीव भवन में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव रहे उपस्थित


सरगुजा विशेष

राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव की 93वीं जयंती: राजीव भवन में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव रहे विशेष रूप से उपस्थित

स्थान: अंबिकापुर (सरगुजा)
दिनांक: 13 जुलाई 2026
स्रोत: प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क

समाचार के मुख्य अंश:

  • राजीव भवन में सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने राजमाता के योगदान को याद किया।
  • हिमाचल प्रदेश के जुब्बल राजपरिवार में जन्मीं राजमाता ने सरगुजा रियासत की बहू के रूप में आकर यहां के जनमानस के साथ गहरा आत्मीय नाता जोड़ा था।
  • अविभाजित मध्य प्रदेश के मंत्रिमंडलों में रहकर उन्होंने वित्त, आवास, पर्यावरण और मध्यम सिंचाई जैसे बेहद महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कुशल नेतृत्व किया।
  • कार्यक्रम के दौरान प्रतीक्षा बस स्टैंड चौक पर स्थापित युगल प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और मां महामाया मंदिर में पूजा के बाद भंडारे का आयोजन हुआ।

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के इतिहास में जनसेवा और सादगी की प्रतिमूर्ति मानी जाने वाली राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव की 93वीं जयंती के अवसर पर आज जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय, राजीव भवन में एक गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उनके ज्येष्ठ पुत्र, पूर्व उपमुख्यमंत्री और सरगुजा रियासत के महाराज टीएस सिंहदेव विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वर्गीय राजमाता के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके बताए जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

इस पावन स्मृति दिवस पर राजीव भवन में आयोजित मुख्य कार्यक्रम से पूर्व, सुबह शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड चौक पर एक विशेष आयोजन हुआ। यहां पूर्व महाराज एमएस सिंहदेव और राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव की युगल प्रतिमा पर गरिमामय माल्यार्पण किया गया। इस दौरान उपस्थित जनसमुदाय और नेताओं ने दोनों विभूतियों के सरगुजा के प्रति किए गए ऐतिहासिक योगदान का स्मरण किया। इसके बाद सरगुजा की अधिष्ठात्री देवी मां महामाया के मंदिर में विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की गई, जहां सरगुजा और प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि की कामना की गई। पूजा के उपरांत मंदिर परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

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हिमाचल के जुब्बल राजपरिवार से सरगुजा रियासत तक का सफर

राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव का जन्म 13 जुलाई 1933 को हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित जुब्बल राजपरिवार में हुआ था। पहाड़ों की हसीन वादियों और समृद्ध संस्कारों के बीच पली-बढ़ीं देवेंद्र कुमारी सिंहदेव का विवाह अविभाजित मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और सरगुजा के महाराज एमएस सिंहदेव के साथ हुआ था। विवाह के बाद जब वे सरगुजा आईं, तो उन्होंने यहाँ की माटी, संस्कृति और यहाँ के लोगों के सुख-दुख को अपना बना लिया।

शासकीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में होने के कारण महाराज एमएस सिंहदेव पर राज्य की बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियां थीं। ऐसी स्थिति में सरगुजा की तमाम सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों को राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव ने स्वयं संभाला। उन्होंने न केवल राजपरिवार की गरिमा को बनाए रखा, बल्कि आम जनता के बीच जाकर एक ममतामयी मां के रूप में अपनी पहचान स्थापित की। वे सरगुजा के कोने-कोने में ‘राजमाता’ के रूप में पूजी जाने लगीं।

सत्तर और अस्सी के दशक में रखी कांग्रेस संगठन की मजबूत नींव

राजनीति के क्षेत्र में राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव का योगदान अद्वितीय और ऐतिहासिक माना जाता है। वे राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की एक मुखर और कद्दावर महिला नेत्री के रूप में उभरीं। उन्होंने सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद का दायित्व संभाला और उस दौर में संगठन का नेतृत्व किया जब परिवहन और संचार की सुविधाएं नाममात्र की थीं। सत्तर और अस्सी के दशक में, एक महिला होने के बावजूद उन्होंने तत्कालीन वृहद सरगुजा जिले के सुदूर और दुर्गम आदिवासी अंचलों का लगातार दौरा किया।

“राजमाता ने केवल महलों में बैठकर राजनीति नहीं की, बल्कि उन्होंने बैलगाड़ी, जीप और जहां रास्ते नहीं थे वहां पैदल चलकर सुदूर गांवों के आदिवासियों से सीधा संवाद किया। आज सरगुजा संभाग में कांग्रेस संगठन की जो मजबूत आधारशिला दिखती है, उसकी असली वास्तुकार राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव ही थीं।”

विधायी राजनीति में सक्रिय रहते हुए वे अंबिकापुर और बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्रों से विधायक चुनी गईं। उनकी प्रशासनिक कार्यकुशलता और सांगठनिक पकड़ को देखते हुए उन्हें अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों प्रकाशचंद्र सेठी और अर्जुन सिंह के मंत्रिमंडलों में कैबिनेट मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। उन्हें आवास, पर्यावरण, मध्यम सिंचाई और वित्त विभाग की जवाबदारी सौंपी गई थी, जिसका उन्होंने ऐतिहासिक रूप से सफल क्रियान्वयन किया। सिंचाई और बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में उनके द्वारा लिए गए निर्णय आज भी समूचे छत्तीसगढ़ के विकास का आधार बने हुए हैं।

टीएस सिंहदेव ने साझा किए संस्मरण

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव अपनी माता के संस्मरणों को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि राजमाता के विचार और उनकी कार्यशैली हमेशा आम लोगों की भलाई पर केंद्रित रहती थी। उन्होंने कभी भी पद या प्रभाव को जनसेवा के आड़े नहीं आने दिया। वे हर वर्ग के लोगों की बातें बेहद आत्मीयता से सुनती थीं और उनके निराकरण का प्रयास करती थीं। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी उनके साथ बिताए गए समय और उनके राजनीतिक मार्गदर्शन को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित प्रमुख गरिमामय जन

राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव की स्मृति में आयोजित इस गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम में क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे:

डॉ. प्रेमसाय सिंह
जेपी श्रीवास्तव
शफ़ी अहमद
राकेश गुप्ता
हेमंत सिन्हा
संजय विश्वकर्मा
मो. इस्लाम
विनय शर्मा
इंद्रजीत सिंह धंजल
जगन्नाथ कुशवाहा
दुर्गेश गुप्ता
मदन जायसवाल
शैलेंद्र प्रताप सिंह
फूलसाय लकड़ा
संजय सिंह
अनूप मेहता
लोकेश कुमार
आलोक सिंह
मेराज रंगरेज
जीवन यादव
विनोद एक्का
चंद्रप्रकाश सिंह
सोहन जायसवाल
सतीश बारी
बालकेश्वर तिर्की
कलीम अंसारी
आशीष जायसवाल
सरीता महंत
अविनाश कुमार
काजू खान
निखिल विश्वकर्मा
आलोक गुप्ता
रोशन कन्नौजिया
अंकित जायसवाल
वसीम अंसारी

कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि सरगुजा के विकास, सामाजिक समरसता और निर्धनों की सेवा की जो विरासत राजमाता ने छोड़ी है, उसे वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाएंगे।


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