‘गरीबों को मिटाने वाली कांग्रेस अब बहा रही घड़ियाली आंसू’— नकटी विवाद पर बरसी भाजपा






नकटी अतिक्रमण मामला: भाजपा का कांग्रेस पर तीखा हमला, डॉ. नवीन मार्कण्डेय ने खोला 2020 की ‘स्क्रिप्ट’ का राज, लगाया गुमराह करने का आरोप

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नकटी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई पर सियासी घमासान: भाजपा का आरोप— भूपेश सरकार के कार्यकाल में लिखी गई थी स्क्रिप्ट, अब ‘घड़ियाली आंसू’ बहा रही कांग्रेस

विशेष रिपोर्ट: प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क
स्थान: रायपुर (छत्तीसगढ़)
अपडेटेड: 2026

रायपुर। राजधानी रायपुर से सटे नकटी ग्राम में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने की प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित एक महत्वपूर्ण संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय ने दोटूक शब्दों में कहा कि नकटी ग्राम की घटना को लेकर कांग्रेस अब अत्यंत निम्न स्तरीय राजनीति पर उतर आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वहां के सीधे-साधे और भोले-भाले ग्रामीणों को गुमराह करके, बरगला कर गलत दिशा में ले जा रही है और राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए आंदोलन का सहारा ले रही है।

डॉ. मार्कण्डेय ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि यह सारा विवाद और कृत्य पूरी तरह से कांग्रेस का ही किया-धरा है, लेकिन अपनी पुरानी करतूतों को छिपाने के लिए कांग्रेसी नेता अब नया पाखंड रचने और जनता के सामने घड़ियाली आंसू बहाने में जुटे हुए हैं।

सन् 2020 की भूपेश सरकार में लिखी गई थी ‘स्क्रिप्ट’

संवाददाता सम्मेलन के दौरान ऐतिहासिक घटनाक्रमों का ब्योरा देते हुए भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आज नकटी में जो बेदखली और विस्थापन का प्रकरण चल रहा है, उसकी पटकथा (स्क्रिप्ट) बहुत पहले सन् 2020 में तत्कालीन पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के शासनकाल में ही लिखी जा चुकी थी। डॉ. मार्कण्डेय के अनुसार, उस समय छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से नकटी ग्राम की शासकीय भूमि पर एक बड़ी आवासीय कॉलोनी तैयार करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू की गई थी।

जब हाउसिंग बोर्ड द्वारा कॉलोनी निर्माण के लिए भूमि की मांग की गई, तब राजस्व विभाग के अमले—जिसमें स्थानीय पटवारी, आरआई (राजस्व निरीक्षक) और तहसीलदार शामिल थे—ने शासकीय भूमि को चिह्नांकित किया। इसके बाद तमाम विधिसम्मत और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए रिपोर्ट तत्कालीन शासन को सौंप दी गई थी।

“नियम के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में आवासहीन गरीबों को सिर छिपाने के लिए अधिकतम ढाई डिस्मिल जमीन आवंटित की जाती है। लेकिन नकटी में कई रसूखदारों और कब्जाधारियों ने 10, 15 से लेकर 20-20 हजार वर्गफीट की बेशकीमती सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमा लिया था। वहां 50 लाख रुपए से अधिक की लागत वाले आलीशान मकान और बाड़ियां खड़ी कर ली गई थीं।”
– डॉ. नवीन मार्कण्डेय, प्रदेश महामंत्री (भाजपा)

2022-23 में आई कब्जाधारियों की ‘बाढ़’ और फैला अतिक्रमण

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि जैसे ही साल 2022 में स्थानीय लोगों और भू-माफियाओं को यह भनक लगी कि इस स्थान पर हाउसिंग बोर्ड की एक भव्य आवासीय कॉलोनी बनने वाली है, वैसे ही वर्ष 2022-23 के दौरान वहां अचानक अवैध कब्जाधारियों की एक तरह से ‘बाढ़’ आ गई। शुरुआती दौर में वहां केवल लगभग 3 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर ही कब्जा था, जिस पर कुछ कच्चे मकान और झोपड़ियां चिन्हांकित की गई थीं। परंतु राजनीतिक संरक्षण के चलते धीरे-धीरे इस जमीन पर पक्के निर्माण शुरू हो गए।

उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि नया राजधानी क्षेत्र (नवा रायपुर) के विकास मास्टर प्लान के तहत नकटी ग्राम तीसरे लेयर (थर्ड लेयर) का गांव है। इस लिहाज से इस क्षेत्र का चरणबद्ध और सुव्यवस्थित विकास होना पहले से ही तय है। चूंकि पूर्ववर्ती भूपेश सरकार ने ही यहां आवासीय विकास के लिए जगह को चिह्नित कर फाइलें आगे बढ़ाई थीं, उसी ढील के चलते वहां तेजी से अतिक्रमण बढ़ता चला गया और लोगों ने अपनी जरूरत से कई गुना अधिक सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे कर लिए।

कांग्रेस से सीधे सवाल: क्या पूरे प्रदेश में अवैध कब्जों को प्रश्रय देना चाहते हैं?

डॉ. मार्कण्डेय ने तीखे तेवर अपनाते हुए कांग्रेसी नेताओं को कटघरे में खड़ा किया और सीधे सवाल दागे। उन्होंने पूछा, “क्या कांग्रेस के नेता प्रदेश में अवैध कब्जों को खुला संरक्षण देते हैं या देना चाहते हैं? क्या कांग्रेसी नेता अब पूरे छत्तीसगढ़ में इसी तरह सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कराने की मुहिम चलाना चाहते हैं?”

पूर्ववर्ती सरकार के एक पुराने फैसले की याद दिलाते हुए भाजपा महामंत्री ने कहा कि जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार सत्ता में थी, तब उन्होंने राज्य की सभी महत्वपूर्ण शासकीय भूमियों को निजी हाथों में बेचने के लिए बकायदा एक सरकारी नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी कर दिया था। उस दौर में कांग्रेस के कई बड़े-बड़े कद्दावर नेताओं ने खुद एकड़ों के हिसाब से सरकारी जमीनें बेहद रियायती और कौड़ियों के दाम पर खरीदी थीं। गरीबों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सर्वसुविधायुक्त आवास और अन्य जनहितकारी सामाजिक प्रयोजनों के लिए जो सरकारी जमीनें आरक्षित होनी चाहिए थीं, उन्हें कब्जा करके कांग्रेस शासनकाल के दौरान धड़ल्ले से बेचा गया। हालांकि, बाद में माननीय हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने कांग्रेस सरकार के उस जनविरोधी आदेश को पूरी तरह से निरस्त कर दिया था।

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सेरीखेड़ी का जिक्र कर घेरा: “तब 122 गरीब परिवारों को बिना छत के बेघर किया था”

कांग्रेस के वर्तमान विरोध प्रदर्शनों को राजनीतिक पाखंड करार देते हुए डॉ. मार्कण्डेय ने सेरीखेड़ी की घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र हमेशा से दोहरा और पतित रहा है। अपने पिछले शासनकाल के दौरान कांग्रेस ने ही रायपुर के पास सेरीखेड़ी में बिना किसी पूर्व व्यवस्था के 122 गरीब परिवारों को बेरहमी से बेघर कर दिया था। उस समय उन लाचार गरीबों को न तो सिर छिपाने के लिए एक इंच जगह दी गई और न ही उन्हें कोई वैकल्पिक मकान या मुआवजा आवंटित किया गया।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी दशकों से ‘गरीबी हटाओ’ का खोखला नारा देती आ रही है, लेकिन हकीकत में कांग्रेसियों ने कभी गरीबी नहीं हटाई, बल्कि हमेशा गरीबों को ही मिटाने और प्रताड़ित करने का काम किया है। इसके विपरीत, वर्तमान भाजपा सरकार ने पूरी संवेदनशीलता के साथ काम किया है।

विस्थापन की व्यवस्थित प्रक्रिया: सेक्टर-30 में सौंपे गए पक्के आवास

संवाददाता सम्मेलन में प्रशासनिक कार्रवाई के मानवीय और व्यवस्थित पहलू को उजागर करते हुए भाजपा प्रदेश महामंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पूरी तरह से संवेदनशील है। सरकार ने पिछले एक साल के दौरान नकटी ग्राम के बाहर शासकीय भूमि पर काबिज अवैध कब्जाधारियों को नियमानुसार लगातार वैधानिक नोटिस जारी किए। इसके साथ ही, प्रशासन ने केवल बेदखली नहीं की, बल्कि प्रभावितों के व्यवस्थित पुनर्वास (व्यवस्थापन) की प्रक्रिया को भी समानांतर रूप से चलाया।

पुनर्वास के आंकड़ों को साझा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया:

  • 29 जून की कार्रवाई: प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाते हुए 61 पात्र परिवारों को सर्वसुविधायुक्त पक्के आवास आवंटित किए गए।
  • चाबियों का वितरण: सभी प्रभावित परिवारों ने शासकीय पंजी पर बाकायदा अपने हस्ताक्षर किए और सम्मानपूर्वक नए आवासों की चाबियां प्राप्त कीं।
  • नवा रायपुर में शिफ्टिंग: ये सभी परिवार पूरी तरह से रजामंदी के साथ नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित नवनिर्मित आवासों में सुरक्षित शिफ्ट हो चुके हैं।
  • सामानों की सुरक्षा: चूंकि यह पूरी प्रक्रिया अत्यधिक सुव्यवस्थित और आपसी समन्वय से की गई थी, इसलिए शासन-प्रशासन द्वारा कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान किसी भी परिवार की जरूरत की सामग्रियों या व्यक्तिगत चीजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया गया।

डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि प्रशासन की इतनी पारदर्शी, मानवीय और व्यवस्थित पुनर्वास प्रक्रिया कांग्रेस के नेताओं को रास नहीं आ रही है। चूंकि कांग्रेस राज्य में पिछले ढाई साल से लगातार राजनीतिक रूप से बैकफुट पर चल रही है, उनके पास जनता के बीच जाने के लिए न तो कोई ठोस मुद्दा बचा है और न ही वे जनहित की कोई बात कर पा रहे हैं। यही वजह है कि हताशा में कांग्रेस अब झूठे नैरेटिव (भ्रामक विमर्श) सेट करके समाज में अशांति फैलाने और लोगों को उकसाकर जबरन आंदोलन खड़ा करने की नाकाम कोशिश कर रही है। उन्होंने दोहराया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार जन-जन के हित के लिए पूरी तरह समर्पित होकर काम कर रही है।

“नकटी गांव को नहीं तोड़ा गया, केवल एक वार्ड का हुआ विस्थापन” – गौरीशंकर श्रीवास

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया और बयानों के माध्यम से फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार का कड़ा खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस द्वारा यह सरासर झूठा नैरेटिव सेट किया जा रहा है कि पूरे नकटी गांव को उजाड़ दिया गया है या तोड़ दिया गया है।

सच्चाई को सामने रखते हुए गौरीशंकर श्रीवास ने बताया कि मूल नकटी गांव में कुल 17 वार्ड मौजूद हैं। सरकार या प्रशासन ने पूरे नकटी गांव को छूआ तक नहीं है। गांव के कुल 17 वार्डों में से केवल वह एक विशिष्ट वार्ड—जहां सरकारी जमीनों पर बेतहाशा अवैध कब्जा किया गया था—सिर्फ उसी हिस्से से अतिक्रमण हटाकर पात्र लोगों को सम्मानजनक ढंग से विस्थापित किया गया है।

इसके साथ ही, उन्होंने विपक्ष के उस दावे को भी पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि यह जमीन विधायकों के लिए आलीशान बंगले (विधायक कॉलोनी) बनाने के लिए खाली कराई जा रही है। श्री श्रीवास ने वास्तविक योजना की जानकारी देते हुए कहा कि यह बात पूरी तरह से असत्य और बेबुनियाद है। इस चिन्हित भूमि पर बनने वाले सामूहिक आवासों में केवल जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी और शासकीय कर्मचारी भी निवास करेंगे। यह सरकार की एक सुव्यवस्थित और वृहद ‘सामूहिक आवास योजना’ (Group Housing Scheme) की तय प्रकिया का हिस्सा है, जिसे शहर के सुनियोजित विकास के लिए क्रियान्वित किया जा रहा है।

वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति

राजधानी रायपुर में आयोजित इस अत्यंत महत्वपूर्ण और आक्रामक पत्रकार वार्ता के दौरान मंच पर भाजपा के कई वरिष्ठ जिला पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने नकटी मामले में सरकार के स्टैंड और प्रशासनिक कार्रवाई का पुरजोर समर्थन किया। इस दौरान मुख्य रूप से उपस्थित रहने वाले पदाधिकारियों में शामिल थे:

क्र. पदाधिकारी का नाम संगठन में दायित्व / पद
1 रमेश सिंह ठाकुर अध्यक्ष, रायपुर शहर जिला भाजपा
2 श्याम नारंग अध्यक्ष, रायपुर ग्रामीण जिला भाजपा
3 संदीप यदु उपाध्यक्ष, जिला पंचायत

पत्रकार वार्ता के अंत में भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि विष्णुदेव साय सरकार किसी भी गरीब के साथ अन्याय नहीं होने देगी, लेकिन जनहित और विकास कार्यों के लिए आरक्षित सरकारी जमीनों पर भू-माफियाओं या राजनीतिक रसूखदारों के अवैध कब्जों को भी कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन आगे भी पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कानून सम्मत ढंग से अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।