कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी का बड़ा एक्शन: रामानुजगंज अस्पताल का औचक निरीक्षण






कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी का सिविल अस्पताल रामानुजगंज में औचक निरीक्षण: विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट

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प्रशासनिक कड़ाई एवं स्वास्थ्य सुधार

रामानुजगंज सिविल अस्पताल में कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी का औचक निरीक्षण: व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के कड़े निर्देश, लापरवाही पर दी सख्त चेतावनी

स्थान: रामानुजगंज (बलरामपुर-रामानुजगंज)
फोकस: स्वास्थ्य सेवाएं, मातृ-शिशु कल्याण, स्वच्छता प्रबंधन

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की नवपदस्थ कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल रामानुजगंज का औचक निरीक्षण किया। इस आकस्मिक दौरे से अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर ने ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर, प्रसव कक्ष और पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) का बारीकी से जायजा लिया और अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

1. उपस्थिति पंजी का मिलान और ड्यूटी के प्रति सख्त निर्देश

अस्पताल पहुंचते ही कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने सबसे पहले चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति पंजी (Attendance Register) का अवलोकन किया। उन्होंने ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों की वास्तविक उपस्थिति का मिलान किया। कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया कि आपातकालीन (Emergency) सेवाओं में 24 घंटे डॉक्टरों की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को समय पर उपचार मिलना उनका अधिकार है। यदि कोई भी चिकित्सक या कर्मचारी बिना पूर्व सूचना के गायब पाया जाता है, या ड्यूटी के दौरान अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरतता है, तो उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

2. स्वच्छता और बायो-मेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक निष्पादन

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अस्पताल परिसर, वार्डों और शौचालयों की स्वच्छता व्यवस्था को देखा। उन्होंने गंदगी पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए सफाई ठेकेदार और संबंधित नोडल अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।

संक्रमण नियंत्रण के लिए जारी कड़े दिशा-निर्देश:

  • वैज्ञानिक निष्पादन: अस्पताल से निकलने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट (Medical Waste) का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीकों से डिस्पोजल किया जाए।
  • मानकों का पालन: संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) के सभी राष्ट्रीय मानकों का कड़ाई से पालन हो, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को कोई अन्य संक्रमण न फैले।
  • नियमित सैनिटाइजेशन: ऑपरेशन थियेटर और प्रसव कक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित रूप से फ्यूमिगेशन और सैनिटाइजेशन सुनिश्चित किया जाए।

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3. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा: स्त्री रोग विशेषज्ञ की होगी पदस्थापना

प्रसव कक्ष (Labor Room) का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने वहां तैनात स्टाफ से हर महीने होने वाले प्रसवों (Deliveries) के आंकड़ों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए प्रसव कक्ष को हमेशा उच्च स्तरीय स्वच्छता और आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों से सुसज्जित रखा जाए।

क्षेत्र की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, कलेक्टर ने अस्पताल में **स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist)** की तत्काल पदस्थापना हेतु उच्च स्तर पर आवश्यक पत्राचार और कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि जटिल प्रसव के मामलों में गर्भवती महिलाओं को रेफर करने की नौबत कम से कम आनी चाहिए।

4. पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में बच्चों की सेहत का लिया हाल

कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी इसके बाद पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) पहुंचीं। वहां उन्होंने भर्ती कुपोषित बच्चों की माताओं से सीधे संवाद किया। उन्होंने माताओं से पूछा कि बच्चों को समय पर दूध, दलिया और भोजन मिल रहा है या नहीं, और अस्पताल में भर्ती होने के बाद से बच्चों के वजन और स्वास्थ्य में कितना सुधार हुआ है।

उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और डाइटिशियन को निर्देशित किया कि वे माताओं को केवल अस्पताल के भीतर ही नहीं, बल्कि डिस्चार्ज होने के बाद भी बच्चों की देखभाल कैसे करनी है, इसका व्यावहारिक प्रशिक्षण दें।

माताओं को दिया जाएगा नियमित परामर्श (Counseling):

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि एनआरसी में आने वाली महिलाओं को नियमित रूप से निम्नलिखित विषयों पर जागरूक और परामर्श दिया जाए:

  • पौष्टिक आहार: स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कम लागत वाले पोषक तत्वों की जानकारी।
  • स्वच्छ पेयजल: पानी को उबालकर पीने और स्वच्छता बनाए रखने के लाभ।
  • परिवार नियोजन: छोटे परिवार के महत्व और स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभाव।
  • शिशु देखभाल: स्तनपान के सही तरीके और समय पर टीकाकरण की अनिवार्यता।

5. निर्धारित मीनू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण भोजन की अनिवार्यता

अस्पताल के मरीजों और एनआरसी के बच्चों के लिए तैयार होने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच करते हुए कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा कि शासन द्वारा निर्धारित मीनू (Menu) का शत-प्रतिशत पालन होना चाहिए। भोजन में प्रोटीन, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में शामिल होने चाहिए। भोजन पकाने वाले स्थान पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए और इसकी समय-समय पर आकस्मिक जांच भी की जाए।

निरीक्षण के दौरान उपस्थित प्रमुख अधिकारी

इस औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के साथ प्रशासनिक अमला मुख्य रूप से मौजूद रहा, जिसमें शामिल थे:

  • श्री अभिषेक गुप्ता – अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), रामानुजगंज
  • श्री मनोज पैकरा – तहसीलदार, रामानुजगंज
  • खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ), सिविल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक, मेट्रन तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ कर्मचारी।

कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी का यह औचक निरीक्षण इस बात का साफ संकेत है कि जिला प्रशासन सुदूर अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अत्यंत गंभीर है। इस दौरे से न केवल अस्पताल प्रबंधन की कमियां सामने आईं, बल्कि उन्हें सुधारने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा भी तय की गई है। आने वाले दिनों में स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति और बायो-मेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक निष्पादन से सिविल अस्पताल रामानुजगंज की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।