
चीन नीति पर मोदी सरकार से कांग्रेस के तीखे सवाल, एफडीआई नियमों में ढील को लेकर घेरा
कांग्रेस ने चीन को लेकर मोदी सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने एफडीआई नियमों में ढील, चीनी कंपनियों की भागीदारी और सीमा की स्थिति को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
चीन को लेकर मोदी सरकार पर कांग्रेस का हमला, एफडीआई नियमों में ढील पर उठाए कई सवाल
Indian National Congress ने चीन को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए नरेंद्र मोदी सरकार पर नरमी बरतने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने भारत की सीमा से लगे देशों के लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नियमों में ढील दी है, जिससे सबसे अधिक फायदा चीन को मिल सकता है।
कांग्रेस ने याद दिलाया कि ये प्रतिबंध वर्ष 2020 में गलवान घाटी संघर्ष 2020 के बाद लगाए गए थे, जब लद्दाख क्षेत्र में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी और भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे।
सरकार से कांग्रेस के प्रमुख सवाल
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से कई अहम सवाल पूछे हैं—
- चीन के लिए एफडीआई नियमों में ढील क्यों दी जा रही है?
- चीनी कंपनियों को भारतीय सरकारी ठेकों में फिर से भाग लेने की अनुमति क्यों दी गई?
- चीनी नागरिकों को वीज़ा देने की प्रक्रिया आसान क्यों की जा रही है?
- भारत और चीन के बीच पांच साल बाद सीधी यात्री उड़ानें फिर से क्यों शुरू की जा रही हैं?
सीमा पर स्थिति को लेकर भी चिंता
कांग्रेस का कहना है कि लद्दाख में स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। पार्टी के अनुसार कई क्षेत्रों में बफर जोन बनाए गए हैं, जहां पहले भारतीय सैनिक गश्त करते थे।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि चीन अब भी भारतीय क्षेत्र पर दावा कर रहा है, नक्शों में बदलाव कर रहा है और अरुणाचल प्रदेश के गांवों के नाम बदलने जैसी गतिविधियां कर रहा है। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर के कुछ इलाकों में बुनियादी ढांचा विकसित करने की भी बात कही गई है।
रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश को लेकर चेतावनी
कांग्रेस ने कहा कि पावर ग्रिड और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी निवेश की अनुमति देना भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
पार्टी का कहना है कि भारत-चीन व्यापार पहले से अधिक बढ़ गया है और यह भारत के पूरे रक्षा बजट से भी अधिक बताया जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या सरकार की नई नीति में भारत के रणनीतिक हितों और शहीद सैनिकों के बलिदान को नजरअंदाज किया जा रहा है।











