
महासमुंद जिले में 17 मार्च से 21 अप्रैल तक चलेगा शिशु संरक्षण माह अभियान, बच्चों को दी जाएगी विटामिन-ए और आयरन की खुराक
महासमुंद जिले में 17 मार्च से 21 अप्रैल 2026 तक शिशु संरक्षण माह अभियान चलेगा। इस दौरान बच्चों को विटामिन-ए, आयरन-फोलिक एसिड सिरप, स्वास्थ्य जांच और पोषण परामर्श दिया जाएगा।
महासमुंद, 13 मार्च 2026।राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में 17 मार्च 2026 से 21 अप्रैल 2026 तक शिशु संरक्षण माह अभियान का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत जिले के सभी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को विशेष स्वास्थ्य सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ-साथ पोषण संबंधी सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव ने बताया कि अभियान के दौरान 9 माह से 59 माह तक के बच्चों को विटामिन-ए सिरप पिलाया जाएगा, जबकि 6 माह से 59 माह तक के बच्चों को आयरन एवं फोलिक एसिड सिरप वितरित किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम करना है, ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सके।
उन्होंने बताया कि अभियान के प्रभावी संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से विस्तृत माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से गांव-गांव में जागरूकता गतिविधियां भी चलाई जाएंगी, जिससे अधिक से अधिक बच्चों तक इस अभियान का लाभ पहुंचाया जा सके।
डॉ. राव ने जिले के सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथियों पर अपने बच्चों को नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र या स्वास्थ्य केंद्र में अवश्य लेकर आएं, ताकि उन्हें विटामिन-ए और आयरन की खुराक दी जा सके। उन्होंने बताया कि विटामिन-ए बच्चों की आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने और रतौंधी से बचाव में सहायक होता है। साथ ही यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जिससे वे संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ पाते हैं और उनका समग्र विकास भी बेहतर होता है।
अभियान के दौरान बच्चों का वजन और स्वास्थ्य परीक्षण, एनीमिया की जांच तथा अभिभावकों को पोषण और स्तनपान संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा। इसके अलावा गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें उपचार के लिए आवश्यकतानुसार रेफर किया जाएगा, ताकि समय पर उनका उचित इलाज सुनिश्चित किया जा सके।












