
रायपुर स्मृति पुस्तकालय: अभिषेक चौबे ने दान की इंजीनियरिंग की पुस्तकें, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने किया सम्मानित | प्रदेश खबर
रायपुर में 'स्मृति पुस्तकालय योजना' के तहत अब तक 10,600 से अधिक पुस्तकें और गैजेट्स दान किए जा चुके हैं। अभिषेक चौबे के योगदान की कलेक्टर ने सराहना की। जानें कैसे करें पुस्तकों का दान।
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जनभागीदारी की मिसाल | रायपुर अपडेट
ज्ञान के दान से युवाओं के सपनों को मिल रही उड़ान: रायपुर ‘स्मृति पुस्तकालय’ में 10 हजार से अधिक पुस्तकें जमा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में रायपुर जिला प्रशासन द्वारा संचालित **’स्मृति पुस्तकालय योजना’** युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है। इस पुनीत पहल से जुड़कर नागरिक स्वेच्छा से पुस्तकें और गैजेट्स दान कर रहे हैं।
रायपुर: जिले में शिक्षा और प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की मदद के लिए ‘स्मृति पुस्तकालय योजना’ एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। इसी कड़ी में आज अभिषेक चौबे ने इंजीनियरिंग और अन्य महत्वपूर्ण विषयों की 20 पुस्तकें जिला प्रशासन को सौंपी। उनकी इस उदारता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने प्रशंसा की।
कलेक्टर ने किया सम्मानित, दानदाताओं में भारी उत्साह
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने अभिषेक चौबे को उनके सराहनीय योगदान के लिए प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कलेक्टर ने कहा कि ऐसे निस्वार्थ प्रयास से उन प्रतिभावान अभ्यर्थियों को संबल मिलेगा जो आर्थिक तंगी के कारण महंगी पुस्तकें नहीं खरीद पाते। अभिषेक चौबे ने बताया कि समाचार पत्रों के माध्यम से उन्हें इस योजना की जानकारी मिली और उन्होंने तुरंत समाज हित में योगदान देने का फैसला लिया।
आप भी बन सकते हैं इस पहल का हिस्सा:
यदि आप भी पुरानी या नई पुस्तकें और इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट दान करना चाहते हैं, तो प्रशासन के इन नोडल अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं:
- प्रभात सक्सेना: 94060 49000
- केदार पटेल: 94255 02970
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संजीवनी
उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत न केवल हस्तलिखित नोट्स और पुस्तकें, बल्कि डिजिटल पढ़ाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी दान किए जा रहे हैं। इन संसाधनों का लाभ लेकर रायपुर के अनेक विद्यार्थी अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को नई दिशा दे रहे हैं। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस ‘ज्ञान के महादान’ में भागीदार बनें।











