Vedanta Power Plant Accident: “लापरवाही का जिम्मेदार कौन?” भूपेश बघेल ने सरकार की अधिसूचना पर उठाए गंभीर सवाल






वेदांता हादसा: भूपेश बघेल का बड़ा हमला; अनिल अग्रवाल पर FIR | प्रदेश खबर विशेष

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रिपोर्टर: प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क
दिनांक: 18 अप्रैल, 2026

वेदांता पावर प्लांट हादसा: “जवाब तो आपकी अधिसूचना में ही हैं मुख्यमंत्री जी!” – भूपेश बघेल का तीखा वार; अनिल अग्रवाल समेत 10 पर FIR दर्ज

बड़ी खबर: सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट हादसे में अब तक 21 श्रमिकों की मौत की पुष्टि। पुलिस ने चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया।

भूपेश बघेल ने सरकार की जांच को बताया ‘लीपापोती’

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस त्रासदी को लेकर विष्णु देव साय सरकार की नियत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सरकार द्वारा जारी जांच आदेश की प्रति को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि जिस घटना की जांच की जा रही है, उसके बुनियादी जवाब तो सरकार ने अपनी चिट्ठी में खुद ही दे दिए हैं।

बघेल ने तीखा हमला करते हुए सरकार से पूछा:

  • अधिसूचना में ही जवाब: जब सरकार ने मान लिया है कि हादसा 14 अप्रैल को तकनीकी खराबी से हुआ, तो फिर जांच के नाम पर 30 दिन का समय क्यों दिया जा रहा है?
  • दोषियों के नाम पर चुप्पी: बघेल ने पूछा कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार प्रबंधन के बड़े अधिकारियों के नाम FIR में प्रमुखता से क्यों नहीं हैं? क्या सरकार औद्योगिक घरानों को संरक्षण दे रही है?
  • धाराओं का खेल: पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि इसे केवल ‘हादसा’ न माना जाए, बल्कि सुरक्षा मानकों की बलि चढ़ाने वाले अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

बघेल का यह बयान ऐसे समय आया है जब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहे हैं और पूरे प्रदेश में औद्योगिक सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है।

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हादसे की भयावहता: 21 मौतें और दर्जनों घायल

सक्ती जिले के डभरा तहसील स्थित ग्राम सिंघीतराई में वेदांता पावर लिमिटेड (पूर्व नाम एथेना पावर) की यूनिट-1 में 14 अप्रैल को दोपहर करीब 2:30 बजे भीषण धमाका हुआ। चश्मदीदों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि प्लांट की दीवारें हिल गईं और आसमान में काला धुआं छा गया। प्रारंभिक तौर पर 9 मौतों की खबर आई थी, लेकिन गंभीर रूप से झुलसे श्रमिकों के दम तोड़ने के बाद यह आंकड़ा अब 21 तक पहुंच गया है।

तकनीकी विफलता: क्यों फटा बॉयलर?

इंडस्ट्रियल सेफ्टी विभाग और फोरेंसिक विशेषज्ञों की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, हादसे की मुख्य वजह **बॉयलर फर्नेस के भीतर ईंधन का अत्यधिक जमा होना (Excess Fuel Accumulation)** बताया जा रहा है।

  • दबाव का खेल: सूत्रों के मुताबिक, उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बॉयलर पर अचानक लोड बढ़ाया गया, जिससे सिस्टम का संतुलन बिगड़ गया।
  • पाइप फटना: स्टीम पाइप और वाटर सप्लाई पाइप के जॉइंट में दरार आने से हाई-प्रेशर भाप बाहर निकली, जिसने पास खड़े मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।
  • सुरक्षा चूक: अलार्म सिस्टम और ऑटोमैटिक शट-डाउन वॉल्व ने समय पर काम नहीं किया, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई।

कानूनी कार्रवाई: अनिल अग्रवाल और प्रबंधन पर शिकंजा

जनता के भारी आक्रोश और विपक्ष के दबाव के बाद, सक्ती पुलिस ने डभरा थाने में एक व्यापक FIR दर्ज की है। इस FIR में वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 8 से 10 वरिष्ठ अधिकारियों को नामजद किया गया है।

दर्ज धाराएं (BNS):

  • धारा 106: लापरवाही से मृत्यु कारित करना।
  • धारा 289: मशीनों के रखरखाव में लापरवाही।
  • धारा 3(5): साझा इरादा (Common Intention)।

सक्ती पुलिस अधीक्षक (SP) प्रफुल्ल ठाकुर ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसकी कमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल को सौंपी गई है।

राजनीतिक पारा गरम: बघेल बनाम साय सरकार

भूपेश बघेल ने कोरबा के पुराने चिमनी हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मृतकों के परिजनों को कम से कम 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आश्वासन दिया है कि बिलासपुर कमिश्नर की जांच निष्पक्ष होगी और रिपोर्ट के आधार पर बड़े से बड़े अधिकारी पर गाज गिरेगी। हालांकि, बघेल ने इसे “रिपोर्ट दबाने की रणनीति” करार दिया है।

वेदांता पावर प्लांट का यह हादसा छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। जहां सरकार जांच का हवाला दे रही है, वहीं विपक्ष और आम जनता सीधे जवाबदेही की मांग कर रही है। क्या 30 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट में उन सवालों के जवाब होंगे जो भूपेश बघेल ने आज उठाए हैं? या फिर यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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इस समाचार की सामग्री आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों और प्रत्यक्षदर्शी बयानों पर आधारित है।