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CBSE Re-Evaluation Portal News: सीबीएसई पोर्टल पर ‘Failed’ का एरर, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) और टेंडर प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल





CBSE री-इवैल्यूएशन पोर्टल और OSM विवाद – विस्तृत रिपोर्ट

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026: री-इवैल्यूएशन पोर्टल में तकनीकी खामियां और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पर उठे गंभीर सवाल

दिनांक: 2 जून, 2026


1. री-इवैल्यूएशन पोर्टल का ‘फेल’ शो होना: छात्रों की भारी परेशानी

सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों के बाद री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया आज सुबह से शुरू होनी थी, लेकिन यह प्रक्रिया शुरुआत से ही तकनीकी समस्याओं में फंस गई है।

  • तकनीकी समस्या: पोर्टल को आधिकारिक तौर पर सुबह 4:42 बजे खोला गया, लेकिन इसके तुरंत बाद से ही छात्र लॉग-इन करने में असमर्थ रहे। पोर्टल लगातार ‘Failed’ का एरर मैसेज दिखा रहा है।
  • छात्रों का आक्रोश: छात्र और अभिभावक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार शिकायत कर रहे हैं कि लॉग-इन, वेरिफिकेशन और आवेदन सबमिट करने की प्रक्रिया पूरी तरह बाधित है।
  • सीबीएसई का रुख: बोर्ड ने समस्याओं को स्वीकार करते हुए छात्रों को सुझाव दिया है कि जिन उम्मीदवारों को तकनीकी परेशानी आ रही है, वे बोर्ड को सीधे डायरेक्ट मैसेज (DM) कर सकते हैं।

2. नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली विवादों के घेरे में

इस वर्ष सीबीएसई द्वारा लागू की गई डिजिटल चेकिंग प्रणाली यानी ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) देश भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रणाली को लेकर दो मुख्य आरोप सामने आए हैं:

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  • मूल्यांकन में चूक: कई छात्रों का आरोप है कि जल्दबाजी में कॉपियों के मुख्य पृष्ठ (Title Page) पर तो अंक दर्ज कर दिए गए, लेकिन अंदर के पन्नों पर दिए गए उत्तरों को नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे उनके कुल प्राप्तांकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
  • शिक्षकों की स्वीकारोक्ति: कई वरिष्ठ शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने माना है कि डिजिटल स्क्रीन पर कॉपियां जांचते समय परीक्षकों से तकनीकी त्रुटियां होने की संभावना बनी रहती है, जिससे मूल्यांकन की सटीकता प्रभावित हो सकती है।

3. सार्थक सिद्धांत का बड़ा दावा: टेंडर प्रक्रिया में विसंगतियां

ओएसएम प्रणाली से जुड़ा एक नया विवाद झारखंड के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत द्वारा उठाया गया है, जिसने सीबीएसई की टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं:

  • टेंडर में बदलाव: सिद्धांत ने अपने शोध और ब्लॉग के माध्यम से दावा किया है कि ओएसएम सिस्टम के टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे एक विशिष्ट कंपनी, ‘COEMPT’, को अनुचित लाभ मिला।
  • कंपनी का इतिहास: छात्र का आरोप है कि COEMPT, जो पहले ‘Globarena’ के नाम से काम करती थी, का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड भी विवादित रहा है।
  • साक्ष्य: सार्थक ने पुराने और नए टेंडर दस्तावेजों की तुलना करते हुए 15 प्रमुख बिंदुओं पर विसंगतियों को उजागर किया है, जो मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाती हैं।

सीबीएसई के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ छात्र री-इवैल्यूएशन पोर्टल की तकनीकी खराबियों से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ ओएसएम प्रणाली की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों ने बोर्ड की विश्वसनीयता पर दबाव बढ़ा दिया है। छात्र समुदाय अब बोर्ड से तत्काल समाधान और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहा है।


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