PM मोदी पर ‘अशोभनीय’ टिप्पणी से भड़के सीएम योगी, बोले- “कांग्रेस ने अपनी मृत साख को रसातल में पहुँचाया”
नई दिल्ली/लखनऊ: भारतीय राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। सीएम योगी ने इसे न केवल प्रधानमंत्री का अपमान बताया, बल्कि इसे 145 करोड़ भारतीयों और भारतीय लोकतंत्र की मर्यादाओं पर हमला करार दिया है।
“अक्षम्य और मानसिक दिवालियापन का परिचायक”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देश के लोकप्रिय और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री के प्रति ऐसी असंसदीय भाषा का प्रयोग “अक्षम्य” है। योगी ने तंज कसते हुए कहा कि यह बयान कांग्रेस की हताशा, निराशा और गिरती हुई राजनीतिक संस्कृति को दर्शाता है।
वैश्विक मंच पर भारत का अपमान
सीएम योगी ने अपने वक्तव्य में इस बात पर जोर दिया कि आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक पटल पर एक सशक्त और निर्णायक भूमिका निभा रहा है। ऐसे में देश के शीर्ष नेतृत्व के लिए “आतंकवादी” (संदर्भ: खड़गे का हालिया बयान) जैसे शब्दों का प्रयोग करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को धूमिल करने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि भारत की गरिमा पर चोट है।
क्या है पूरा विवाद?
गौरतलब है कि तमिलनाडु में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना ‘आतंकवादी’ से कर दी थी। हालांकि, विवाद बढ़ने पर उन्होंने स्पष्टीकरण दिया कि उनके कहने का तात्पर्य यह था कि प्रधानमंत्री अपने विरोधियों को ‘डराते’ (Terrorize) हैं, लेकिन तब तक भाजपा ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना लिया था। भाजपा ने इसे चुनाव आयोग तक ले जाने और सार्वजनिक माफी की मांग तेज कर दी है।
कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा कि इस “अशोभनीय कृत्य” के लिए उन्हें प्रधानमंत्री और पूरे देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता 2026 के चुनावी माहौल में कांग्रेस के इस व्यवहार का करारा जवाब देगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद ने आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों में भाजपा को एक नया धारदार मुद्दा दे दिया है। जहां कांग्रेस इसे “शब्दों का हेरफेर” बता रही है, वहीं भाजपा इसे “संस्कारहीन राजनीति” का नाम देकर जनता के बीच ले जा रही है।











