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कृषि सिर्फ उत्पादन नहीं, संस्कृति और वैश्विक खाद्य सुरक्षा का आधार: पीएम मोदी






कृषि सिर्फ उत्पादन नहीं, संस्कृति और वैश्विक खाद्य सुरक्षा का आधार: पीएम नरेंद्र मोदी


राष्ट्रीय | कृषि एवं पर्यावरण

भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो रहा भारत का फार्मिंग इकोसिस्टम, मिलेट्स से किसान कर रहे पर्यावरण की बड़ी सेवा: पीएम मोदी

नई दिल्ली ब्यूरो | अपडेटेड: मई 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय कृषि को देश की संस्कृति का अभिन्न अंग बताते हुए कहा है कि भारत सरकार सिर्फ उत्पादन बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐसा सस्टेनेबल और फ्यूचर-रेडी फार्मिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए काम कर रही है जो जलवायु परिवर्तन का सामना कर सके।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से देश और दुनिया के सामने भारतीय कृषि की ताकत और भावी दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आज एक Food-Surplus Nation (अधिशेष खाद्य देश) होने के साथ-साथ वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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“भारत में कृषि जीवन की मूल धारा और हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। हम सिर्फ प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐसा फार्मिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं, जो सस्टेनेबल भी हो, क्लाइमेट-रेसिलिएंट भी हो और फ्यूचर-रेडी भी हो।”
— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

वैश्विक मंच पर भारत की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे लिए फूड सिक्योरिटी (खाद्य सुरक्षा) केवल एक नीतिगत मामला नहीं है, बल्कि यह मानवता के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है। भारत वैश्विक स्तर पर संकट के समय खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हमेशा तत्पर रहता है।

प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के सहयोग का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया ने मोटे अनाज यानी मिलेट्स (Millets) की शक्ति को नए रूप में पहचाना है। भारत इस मुहिम का नेतृत्व कर रहा है।

“FAO के सहयोग से दुनिया ने मिलेट्स की शक्ति को नए रूप में पहचाना है। भारत में किसान इसकी खेती के माध्यम से न्यूट्रिशन की चिंता करने के साथ ही एनवायरनमेंट की सबसे बड़ी सेवा कर रहे हैं।”
— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री के संबोधन के तीन सबसे प्रमुख स्तंभ इस प्रकार हैं:

  • क्लाइमेट-रेसिलिएंट एग्रीकल्चर: बदलते मौसम और जलवायु चुनौतियों के बीच टिकी रहने वाली आधुनिक खेती पर जोर।
  • वैश्विक खाद्य सुरक्षा: दुनिया के जरूरतमंद देशों की फूड सिक्योरिटी सुनिश्चित करने में भारत की बढ़ती भूमिका।
  • मिलेट्स और पर्यावरण: मोटे अनाज की खेती से पोषण स्तर में सुधार के साथ-साथ पानी की बचत और भूमि संरक्षण के जरिए पर्यावरण की रक्षा।

प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण से साफ है कि भारत आगामी वर्षों में टिकाऊ खेती और पारंपरिक अनाजों के पुनरुद्धार के जरिए वैश्विक कृषि व्यवस्था का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


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