Aaj Ka Panchang: आज पुष्य नक्षत्र और गुरुवार का महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

सनातन वैदिक दैनिक पंचांग

तिथि, वार, नक्षत्र, योग, और करण का संपूर्ण विवरण | आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त और चौघड़िया

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पंचांग का महत्व और आज की गणना

भारतीय वैदिक ज्योतिष और सनातन परंपरा में ‘पंचांग’ का स्थान सर्वोपरि है। पंचांग शब्द पांच प्रमुख अंगों से मिलकर बना है—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन पांच अंगों की सहायता से ही हम काल (समय) की सूक्ष्म से सूक्ष्म स्थिति का सटीक आकलन करते हैं। किसी भी शुभ कार्य को प्रारंभ करने से पहले देवताओं और आकाशीय पिंडों की अनुकूलता देखना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि सही समय पर किया गया कार्य जीवन में समृद्धि, सुख और सफलता लेकर आता है।

आज की आकाशीय गणनाओं के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा की विशेष दूरियां पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों के मानस और भाग्य को प्रभावित कर रही हैं। आज के पंचांग के माध्यम से हम न केवल दिन के मुख्य अंगों को जानेंगे, बल्कि राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त, दिशाशूल और आज के दिन को कल्याणकारी बनाने वाले विशेष उपायों पर भी सविस्तार चर्चा करेंगे। इस पंचांग को पूरी तरह से वैज्ञानिक और वैदिक शुद्धता के साथ संकलित किया गया है ताकि आपके दैनिक निर्णय सटीक और मंगलकारी सिद्ध हो सकें।

आज के मुख्य पंचांग अंग (Five Elements of Time)

पंचांग के पांच अंगों की गणना आज सूर्योदय के समय के आधार पर की गई है। कृपया ध्यान दें कि विभिन्न शहरों में अक्षांश और देशांतर के अंतर के कारण सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में कुछ मिनटों का मामूली अंतर आ सकता है।

वैदिक काल गणना विवरण
संवत्सर (Samvatsar) पिंगल (विक्रम संवत 2083) / शालिवाहन शक संवत 1948
अयन (Ayan) उत्तरायण (सूर्य देव पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध की ओर गतिशील हैं)
ऋतु (Season) ग्रीष्म ऋतु (Summer Season)
मास (Month) ज्येष्ठ मास (पूर्णिमान्त) / वैशाख मास (अमान्त)
पक्ष (Fortnight) शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha – चंद्रमा की कलाएं बढ़ रही हैं)
दैनिक तिथि (Tithi) षष्ठी तिथि – आज रात्रि तक व्याप्त रहेगी, इसके उपरांत सप्तमी तिथि का प्रारंभ होगा।
आज का वार (Day) गुरुवार (Thursday) – यह दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है।
नक्षत्र (Nakshatra) पुष्य नक्षत्र – यह नक्षत्रों का राजा माना जाता है। इसके स्वामी शनि देव हैं और इसके देवता देवगुरु बृहस्पति हैं।
आज का योग (Yoga) व्याघात योग – इसके उपरांत हर्षण योग का प्रारंभ होगा।
आज का करण (Karana) कौलव करण – इसके पश्चात तैतिल करण का आगमन होगा।
सूर्य राशि (Sun Sign) वृषभ राशि (Taurus) में सूर्य देव विराजमान हैं।
चंद्र राशि (Moon Sign) कर्क राशि (Cancer) – चंद्रमा आज अपनी स्वराशि में गोचर कर रहे हैं।

सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त गणना

काल चक्र की गति को समझने के लिए सूर्य और चंद्रमा के उदय व अस्त होने के समय का अत्यंत महत्व है। विशेषकर तांत्रिक क्रियाओं, संध्यावंदन और उपवास के पारण के लिए यह समय अत्यंत प्रामाणिक माना जाता है।

सूर्योदय (Sunrise) प्रातः 05:28 AM
सूर्यास्त (Sunset) सायं 07:08 PM
चंद्रोदय (Moonrise) प्रातः 10:14 AM
चंद्रास्त (Moonset) रात्रि 11:55 PM
दिनमान (Day Duration) 13 घंटे 40 मिनट 12 सेकंड
रात्रिमान (Night Duration) 10 घंटे 19 मिनट 48 सेकंड
सूर्य नक्षत्र (Sun Nakshatra) रोहिणी नक्षत्र (Rohini)

आज के शुभ और अशुभ समय (Muhurtas)

सनातन परंपरा में समय को दो भागों में बांटा गया है—शुभ और अशुभ। यदि आप कोई नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, गृह प्रवेश करना चाहते हैं, या किसी महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, तो शुभ मुहूर्त का चयन करें और अशुभ समय (विशेषकर राहुकाल) में ऐसे कार्यों से बचें।

✓ अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurta)

समय: दोपहर 11:51 AM से 12:46 PM तक

यह दिन का सबसे शक्तिशाली और शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस अवधि में किए गए कार्यों में विघ्न आने की संभावना न्यूनतम होती है। भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा इस समय स्वतः बरसती है।

✓ अमृत काल (Amrit Kaal)

समय: सायं 04:12 PM से 05:58 PM तक

अमृत काल साधना, मंत्र दीक्षा, आध्यात्मिक प्रगति और किसी विशेष औषधि के निर्माण या सेवन के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

✓ विजय मुहूर्त (Vijaya Muhurta)

समय: दोपहर 02:35 PM से 03:30 PM तक

वाद-विवाद, न्यायालय से जुड़े मामलों, और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरू किए जाने वाले कार्यों के लिए यह समय सर्वोत्तम माना जाता है।

✓ गोधूलि मुहूर्त (Godhuli Muhurta)

समय: सायं 06:55 PM से 07:19 PM तक

यह समय विवाह वार्ताओं, भक्ति संगीत और घर में दीप प्रज्वलित करने के लिए अत्यंत पावन और स्वतः सिद्ध माना जाता है।

✗ राहुकाल (Rahu Kaal)

समय: दोपहर 01:53 PM से 03:38 PM तक

राहुकाल को अत्यंत अशुभ माना जाता है। इस समय अवधि में किसी भी नए कार्य की शुरुआत, धन का लेन-देन, या यात्रा का प्रारंभ नहीं करना चाहिए। इस समय किए गए कार्यों में भटकाव आता है।

✗ यमगण्ड मुहूर्त (Yamaganda)

समय: प्रातः 05:28 AM से 07:13 AM तक

यमगण्ड काल में शुरू किए गए कार्य मृत्यु तुल्य कष्ट या भारी वित्तीय हानि दे सकते हैं। यह समय केवल पितृ कर्म या शांति पूजा के लिए ही विचारणीय है।

✗ गुलिक काल (Gulika Kaal)

समय: प्रातः 08:58 AM से 10:43 AM तक

गुलिक काल में सामान्यतः शुभ कार्यों को टालना चाहिए। मान्यता है कि इस समय किए गए कार्यों की पुनरावृत्ति बार-बार होती है, इसलिए ऋण लेना या अंतिम संस्कार जैसे कार्य इसमें वर्जित हैं।

✗ वर्ज्यम मुहूर्त (Varjyam)

समय: रात्रि 09:10 PM से 10:42 PM तक

इस अशुभ समय में किसी भी प्रकार का मांगलिक या शुभ कृत्य वर्जित माना गया है, क्योंकि इस समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव वातावरण में बढ़ जाता है।

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पंचांग के पांच अंगों का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण

1. तिथि (Tithi) का रहस्य

सूर्य और चंद्रमा के बीच की कोणीय दूरी जब 12 डिग्री बढ़ जाती है, तो एक तिथि का निर्माण होता है। आज शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। ज्योतिष शास्त्र में षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय (शिव जी के ज्येष्ठ पुत्र) माने गए हैं। यह तिथि ‘यशा’ संज्ञक तिथियों में आती है, अर्थात इस तिथि में किए गए सही कार्यों से समाज में कीर्ति और यश की प्राप्ति होती है। आज के दिन कार्तिकेय जी की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता प्राप्त होती है।

2. वार (Vara) का प्रभाव

आज गुरुवार है। इस वार के अधिपति देवगुरु बृहस्पति हैं, जो ज्ञान, संतान, धन, और अध्यात्म के कारक ग्रह हैं। गुरुवार का दिन किसी भी प्रकार की उच्च शिक्षा की शुरुआत, धार्मिक यात्रा की योजना, बैंक में नया खाता खुलवाने, या सोने के आभूषण खरीदने के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। आज के दिन सात्विक आचरण बनाए रखना और बड़ों का सम्मान करना बृहस्पति के शुभ प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है।

3. नक्षत्र (Nakshatra) की महिमा

नक्षत्रों के चक्र में आज पुष्य नक्षत्र की उपस्थिति है। पुष्य नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों में सबसे कल्याणकारी और ‘नक्षत्र सम्राट’ कहा जाता है। यद्यपि विवाह को छोड़कर अन्य सभी कार्यों के लिए इसे अत्यंत शुभ माना गया है। पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है। आज के दिन किया गया व्यापारिक निवेश, भूमि-भवन का क्रय, या कोई नया ज्ञान प्राप्त करना दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है। इसके स्वामी शनि होने के कारण कार्य में स्थायित्व मिलता है, जबकि इसके देवता गुरु होने से कार्य में दैवीय आशीर्वाद बना रहता है।

4. योग (Yoga) की स्थिति

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर के योग से बनने वाले 27 योगों में आज व्याघात योग सक्रिय है। व्याघात का शाब्दिक अर्थ होता है ‘आघात या बाधा’। इस योग को सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता। इसमें किए गए कार्यों में अचानक कोई रुकावट आ सकती है। हालांकि, दोपहर के बाद जब यह योग समाप्त होकर हर्षण योग में परिवर्तित होगा, तब समय अत्यंत आनंददायक हो जाएगा। हर्षण का अर्थ ही प्रसन्नता है, इसलिए महत्वपूर्ण कार्यों को दोपहर के बाद करना अधिक फलदायी रहेगा।

5. करण (Karana) का महत्व

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। कुल 11 करणों में से आज कौलव करण का प्रभाव है, जो एक चर करण है। कौलव करण के स्वामी मित्र देव (सूर्य के एक रूप) हैं। यह करण मैत्री संबंधों को प्रगाढ़ करने, समाज में नए संबंध स्थापित करने, और किसी भी प्रकार के समझौते या संधि के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है।

आज का दिन का चौघड़िया (Day Choghadiya)

चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग यात्रा और त्वरित रूप से किए जाने वाले दैनिक कार्यों के लिए किया जाता है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग डेढ़ घंटे का होता है।

समय अवधि चौघड़िया का प्रकार प्रभाव व उपयुक्तता
05:28 AM से 07:13 AM शुभ (Shubh) अत्यंत फलदायी, कोई भी नया कार्य या यात्रा शुरू करने के लिए उत्तम।
07:13 AM से 08:58 AM रोग (Rog) अशुभ, इस समय बीमारी या विवाद होने की आशंका रहती है। टालें।
08:58 AM से 10:43 AM उद्वेग (Udveg) अशुभ, मानसिक चिंता और कार्यों में देरी लाता है।
10:43 AM से 12:28 PM चर (Char) शुभ, गतिशीलता वाले कार्य, जैसे वाहन खरीदना या यात्रा के लिए श्रेष्ठ।
12:28 PM से 02:13 PM लाभ (Labh) अत्यंत शुभ, व्यापारिक सौदे और आर्थिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ।
02:13 PM से 03:58 PM अमृत (Amrit) सर्वोत्तम, इस समय किए गए कार्य चिरस्थायी सुख प्रदान करते हैं।
03:58 PM से 05:43 PM काल (Kaal) अशुभ, संकट और हानि की संभावना। इस समय जोखिम न लें।
05:43 PM से 07:08 PM शुभ (Shubh) शुभ, दिन का समापन सकारात्मक कार्यों और प्रार्थना के साथ करें।

दिशाशूल, ताराबल और चंद्रबल विचार

आज का दिशाशूल (Disha Shool): आज गुरुवार होने के कारण दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। इसका अर्थ है कि आज के दिन दक्षिण दिशा की ओर लंबी व्यावसायिक या व्यक्तिगत यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अत्यंत अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पहले थोड़ा सा जीरा या दही खाकर, और भगवान श्रीहरि का स्मरण कर प्रस्थान करें, इससे दिशाशूल का दोष काफी हद तक कम हो जाता है।

चंद्रबल (Moon Strength): आज चंद्रमा कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि के जातकों को आज मानसिक दृढ़ता और भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा। इन राशि के लोगों के लिए आज का दिन बड़े निर्णय लेने के लिए सर्वथा उपयुक्त है।

आज के दिन को भाग्यशाली बनाने के अचूक उपाय

गुरुवार और पुष्य नक्षत्र का यह सुंदर संयोग विरला ही होता है। आज के दिन को अपने और अपने परिवार के लिए समृद्धि दायक बनाने के लिए निम्नलिखित सरल वैदिक उपायों को अवश्य अपनाएं:

  • देवगुरु बृहस्पति की पूजा: आज सुबह स्नान के पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाएं। स्नान के पश्चात पीले रंग के वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • पुष्य नक्षत्र का लाभ: आज के दिन केले के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और चने की दाल व गुड़ का भोग लगाएं। इससे कुंडली में कमजोर गुरु भी बलवान होकर शुभ फल देने लगता है।
  • दान का महत्व: आज किसी ब्राह्मण, वृद्ध व्यक्ति या जरूरतमंद को पीले अन्न (जैसे चने की दाल या बेसन के लड्डू), पीले वस्त्र या धार्मिक पुस्तकों का दान करें।
  • मंत्र जप: आज के दिन ॐ बृं बृहस्पतये नमः अथवा ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का कम से कम 108 बार तुलसी की माला से जप करें। यह आपके विवेक और निर्णय लेने की क्षमता को अद्भुत रूप से बढ़ाएगा।

© 2026 सनातन वैदिक पंचांग संस्थान। सभी अधिकार सुरक्षित हैं।

यह पंचांग शुद्ध दृक-सिद्धांत और आकाशीय पिंडों की सटीक स्थिति पर आधारित है। स्थान भेद के कारण स्थानीय समय में आंशिक परिवर्तन संभव है।

“शुभम भवतु — आपका दिन मंगलमय और कल्याणकारी हो।”

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