Aaj Ka Itihas: 21 मई को ही क्यों मनाया जाता है आतंकवाद विरोधी दिवस? जानें आज का इतिहास

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आज का इतिहास (Today in History)

21 मई: मानव सभ्यता, भारत और वैश्विक मंच पर दर्ज इतिहास के पन्नों का संपूर्ण दस्तावेज़

कालचक्र और आज के दिन की महत्ता

इतिहास मात्र बीती हुई घटनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि यह वर्तमान को समझने और भविष्य की नींव रखने का सबसे बड़ा मार्गदर्शक है। आज का दिन यानी 21 मई, वैश्विक इतिहास के पन्नों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण, संवेदनशील और दूरगामी परिवर्तन लाने वाली तारीख के रूप में दर्ज है। इस दिन दुनिया ने तकनीकी क्रांतियां भी देखीं, महान कलाकृतियों की खोज भी की, और साथ ही आतंकवाद व हिंसा के काले चेहरे का भी सामना किया।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में 21 मई का दिन एक ऐसी त्रासदी से जुड़ा है, जिसने देश की राजनीति और इतिहास की दिशा हमेशा के लिए बदल दी—इसी दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की क्रूर हत्या कर दी गई थी। वैश्विक स्तर पर आज का दिन सांस्कृतिक विविधता और विकास के संदेशों को भी समर्पित है। आइए इस विस्तृत ऐतिहासिक लेख के माध्यम से आज के दिन घटित हुईं उन सभी मुख्य घटनाओं, जन्मों, जीवानियों और अंतरराष्ट्रीय दिवसों पर गहराई से दृष्टि डालते हैं जिन्होंने दुनिया को एक नया आकार दिया।

भारत का इतिहास: 21 मई की प्रमुख राष्ट्रीय घटनाएँ

वर्ष 1991

श्रीपेरंबुदूर त्रासदी – पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आत्मघाती हत्या: भारत के राजनीतिक इतिहास का यह सबसे काला और स्तब्ध कर देने वाला दिन था। तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी रैली के दौरान आतंकवादी संगठन लिट्टे (LTTE) की एक आत्मघाती हमलावर ‘थेनमोझी राजरत्नम’ (उर्फ थानू) ने भारत के नौवें प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बम धमाके में हत्या कर दी। राजीव गांधी मात्र 40 वर्ष की आयु में देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने थे। उनकी मृत्यु ने पूरे देश को गहरे शोक और सुरक्षा चिंताओं में डाल दिया। इस घटना के बाद से ही भारत में आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने की नीति में भारी बदलाव आया और इस दिन को भारत में ‘आतंकवाद विरोधी दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा।

वर्ष 1994

सुष्मिता सेन ने रचा इतिहास – भारत को मिला पहला ‘मिस यूनिवर्स’ का खिताब: 21 मई 1994 को भारतीय सौंदर्य और बुद्धिमत्ता का डंका पूरी दुनिया में बजा। मनीला, फिलीपींस में आयोजित प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता में 18 वर्षीय सुष्मिता सेन ने ‘मिस यूनिवर्स’ (ब्रह्मांड सुंदरी) का खिताब अपने नाम किया। यह भारत के इतिहास में पहला मौका था जब किसी भारतीय महिला ने इस सर्वोच्च वैश्विक सौंदर्य मुकुट को हासिल किया था। इसी वर्ष ऐश्वर्या राय ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीता था, जिससे वैश्विक स्तर पर भारतीय फैशन, सौंदर्य और सांस्कृतिक प्रभाव की एक नई लहर की शुरुआत हुई थी।

वर्ष 1970

भारत में निर्मित पहले लड़ाकू विमान ‘मिग-21’ का वायुसेना में शामिल होना: रक्षा के क्षेत्र में आज का दिन भारत की सामरिक शक्ति को बढ़ाने वाला सिद्ध हुआ था। तत्कालीन सोवियत संघ के सहयोग से भारत में ही निर्मित (एचएएल द्वारा असेंबल किए गए) पहले मिग-21 विमान को आधिकारिक तौर पर भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इसने आने वाले कई दशकों तक भारतीय आकाश की सुरक्षा में ‘रीढ़ की हड्डी’ की भूमिका निभाई और 1971 के युद्ध सहित कई मोर्चों पर अपनी ताकत साबित की।

वर्ष 1996

प्रसिद्ध अभिनेता और निर्देशक पी. जयराज का निधन: भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर के दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित पैदी जयराज (पी. जयराज) का आज ही के दिन मुंबई में निधन हुआ था। उन्होंने मूक फिल्मों के दौर से लेकर बोलती फिल्मों तक भारतीय सिनेमा को अपने अभिनय से सींचा था।

वैश्विक इतिहास: 21 मई की प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय घटनाएँ

वर्ष 1927

चार्ल्स लिंडबर्ग की ऐतिहासिक उड़ान – अटलांटिक महासागर को अकेले पार किया: मानव साहस और विमानन उद्योग के इतिहास में 21 मई 1927 को स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। अमेरिकी पायलट चार्ल्स लिंडबर्ग ने ‘स्पिरिट ऑफ सेंट लुइस’ नामक एक एकल इंजन वाले विमान से न्यूयॉर्क से उड़ान भरी और लगातार 33.5 घंटे की यात्रा के बाद पेरिस (फ्रांस) में सुरक्षित लैंडिंग की। बिना किसी पड़ाव के (Non-stop) अकेले अटलांटिक महासागर को पार करने वाली यह दुनिया की पहली ऐतिहासिक हवाई उड़ान थी, जिसने वैश्विक यात्रा और विमानन के नए द्वार खोले।

वर्ष 1881

अमेरिकी रेड क्रॉस (American Red Cross) की स्थापना: प्रसिद्ध समाजसेविका और नर्स क्लारा बार्टन ने आज ही के दिन वाशिंगटन डी.सी. में ‘अमेरिकन रेड क्रॉस’ की स्थापना की थी। इस मानवीय संगठन का मुख्य उद्देश्य युद्ध, आपदाओं और महामारियों के समय पीड़ित मानवता की बिना किसी भेदभाव के सेवा करना था। आज यह संस्था दुनिया भर में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए एक मिसाल है।

वर्ष 1904

फीफा (FIFA) की स्थापना – फुटबॉल जगत का नया युग: दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल को संचालित करने वाली सर्वोच्च संस्था ‘फेडरेशन इंटरनेशनल डी फुटबॉल एसोसिएशन’ (FIFA) की स्थापना 21 मई 1904 को पेरिस, फ्रांस में की गई थी। फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क, नीदरलैंड, स्पेन, स्वीडन और स्विट्जरलैंड के फुटबॉल संघों ने मिलकर इसकी नींव रखी थी। आज फीफा के अंतर्गत आयोजित होने वाला विश्व कप दुनिया का सबसे बड़ा और देखा जाने वाला खेल आयोजन बन चुका है।

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वर्ष 1932

अमेलिया ईयरहार्ट का कीर्तिमान – अटलांटिक पार करने वाली पहली महिला: चार्ल्स लिंडबर्ग की उड़ान के ठीक 5 साल बाद, 21 मई 1932 को अमेरिकी विमान चालक अमेलिया ईयरहार्ट ने न्यूफाउंडलैंड से उड़ान भरकर उत्तरी आयरलैंड में उतरकर इतिहास रच दिया। वह अटलांटिक महासागर को अकेले और बिना रुके पार करने वाली दुनिया की पहली महिला पायलट बनीं। उन्होंने तत्कालीन समाज में महिलाओं की असीम क्षमताओं का लोहा मनवाया।

वर्ष 1991

इथियोपिया के तानाशाह मेंगिस्तु हाएले मारियाम का पतन: अफ्रीका महाद्वीप के इतिहास में आज का दिन महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव का गवाह बना। इथियोपिया में लंबे समय तक दमनकारी शासन चलाने वाले कम्युनिस्ट तानाशाह मेंगिस्तु हाएले मारियाम को विद्रोही सेनाओं के बढ़ते दबाव के कारण देश छोड़कर जिम्बाब्वे भागना पड़ा। उनके जाने से इथियोपिया में दशकों से चले आ रहे गृहयुद्ध की समाप्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ।

21 मई को जन्मे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व (Birthdays)

आज की तारीख ने दुनिया को कई ऐसी महान विभूतियाँ दीं, जिन्होंने साहित्य, राजनीति और कला के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है:

१. सुमित्रानंदन पंत (वर्ष 1900): हिंदी साहित्य के ‘छायावादी युग’ के चार प्रमुख स्तंभों में से एक, महान कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म 21 मई 1900 को कौसानी (अब उत्तराखंड में) हुआ था। उन्हें प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है क्योंकि उनकी रचनाओं में प्रकृति का अत्यंत सजीव और अलौकिक वर्णन मिलता है। पंत जी हिंदी साहित्य के पहले ऐसे लेखक थे जिन्हें प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार (उनकी कृति ‘चिदंबरा’ के लिए) से सम्मानित किया गया था। इसके अतिरिक्त उन्हें पद्म भूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

२. प्लेटो (अनुमानित जन्म 427 ईसा पूर्व): प्राचीन यूनान (ग्रीस) के महान दार्शनिक, सुकरात के शिष्य और अरस्तू के गुरु, प्लेटो का जन्म भी ऐतिहासिक विद्वानों द्वारा इसी कालखंड के आसपास माना जाता है। उन्होंने पाश्चात्य दर्शन (Western Philosophy) की नींव रखी और एथेंस में ‘द एकेडमी’ की स्थापना की, जिसे यूरोप का पहला विश्वविद्यालय माना जाता है। उनका ग्रंथ ‘द रिपब्लिक’ आज भी राजनीति और न्याय के सिद्धांतों की समझ के लिए दुनिया भर में पढ़ा जाता है।

३. बिस्मिल्लाह खान – उस्ताद की शहनाई (सांस्कृतिक जुड़ाव): यद्यपि भारत के रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जन्म मार्च में हुआ था, लेकिन उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण राग और ऐतिहासिक संगीत सभाओं का आरंभ मई के इसी अंतिम पखवाड़े में हुआ माना जाता है, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के आकाश में गूंजता है।

21 मई के महत्वपूर्ण दिवस और उत्सव (Special Days)

वैश्विक चेतना और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से आज के दिन दो बेहद महत्वपूर्ण दिवस मनाए जाते हैं:

  • १. राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस (National Anti-Terrorism Day – भारत):
    यह दिवस वर्ष 1991 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की याद में और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए हर साल 21 मई को मनाया जाता है। इस दिन सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों में आतंकवाद और हिंसा के विरुद्ध शपथ ली जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को उग्रवाद और हिंसा के मार्ग से दूर रखना तथा समाज में शांति, मानवता और एकता को बढ़ावा देना है।
  • २. संवाद और विकास के लिए सांस्कृतिक विविधता का विश्व दिवस (World Day for Cultural Diversity for Dialogue and Development):
    संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित यह एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है। इसका उद्देश्य दुनिया भर की समृद्ध सांस्कृतिक विविधताओं के महत्व को समझना, विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद को बढ़ाना और एक ऐसे शांतिपूर्ण समाज का निर्माण करना है जहां हर संस्कृति का सम्मान हो। यह दिवस सतत विकास और वैश्विक शांति के लिए सांस्कृतिक समावेशन को बढ़ावा देने पर बल देता है।

ऐतिहासिक दृष्टिकोण: आज के दिन का सबक

यदि हम 21 मई के संपूर्ण इतिहास का गहराई से विश्लेषण करें, तो हम पाते हैं कि यह दिन मुख्य रूप से ‘मानव संकल्प’ और ‘अतिवाद के दुष्परिणामों’ के बीच के द्वंद्व को दर्शाता है। एक तरफ जहां चार्ल्स लिंडबर्ग और अमेलिया ईयरहार्ट जैसी शख्सियतों ने अपनी जान जोखिम में डालकर अटलांटिक महासागर को पार किया और यह सिद्ध किया कि इंसान की इच्छाशक्ति के आगे प्रकृति की सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं; वहीं दूसरी ओर, राजीव गांधी की हत्या जैसी त्रासदियां हमें सचेत करती हैं कि राजनीतिक और वैचारिक अंधापन किस प्रकार एक हंसते-खेलते राष्ट्र को गहरे जख्म दे सकता है।

सुमित्रानंदन पंत जैसे कवियों का आज के दिन जन्म लेना हमें याद दिलाता है कि युद्ध और राजनीति के कोलाहल के बीच भी प्रकृति की सुंदरता और शब्दों की कोमलता ही मानव मन को स्थायी शांति प्रदान कर सकती है। आज का इतिहास हमें सिखाता है कि हम अतीत की सफलताओं से प्रेरणा लें, महापुरुषों के ज्ञान को जीवन में उतारें और हिंसा व संकीर्णता को त्यागकर एक अधिक समावेशी और शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में अपना योगदान दें।

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इतिहास के पन्नों से चुनिंदा और प्रामाणिक तथ्यों का संकलन। समय के साथ मानव सभ्यता के विकास का सफरनामा।

“इतिहास को भूलने वाले कभी नया इतिहास नहीं बना सकते।”

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