भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती: वैश्विक उथल-पुथल के बीच निर्यात में निरंतर वृद्धि
नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और निर्यात प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की बुनियाद बेहद मजबूत है और निर्यात के मोर्चे पर देश लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच लचीली अर्थव्यवस्था
मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि वैश्विक प्रतिकूलताओं (जैसे पश्चिम एशिया संकट और अन्य आपूर्ति श्रृंखला संबंधी बाधाओं) के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। अप्रैल के बाद मई 2026 में भी निर्यात वृद्धि का यह सिलसिला जारी रहा है। यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय उत्पाद और सेवाएं वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने में सक्षम हैं।
निर्यात का लक्ष्य और ‘आत्मनिर्भर भारत’
पीयूष गोयल ने सरकार की भविष्य की योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत ने इस वर्ष के लिए निर्यात का लक्ष्य 1 ट्रिलियन डॉलर रखा है। इसके साथ ही, अगले पांच वर्षों में इसे दोगुना कर 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि एक ‘राष्ट्रीय मिशन’ है।
- निर्यात का वर्तमान स्तर: हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत का निर्यात 863 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया है।
- मुक्त व्यापार समझौते (FTA): पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने लगभग 38 विकसित देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जिससे भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में आसान पहुंच मिल रही है।
- रणनीति: सरकार निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘निर्यात संवर्धन मिशन’ (Export Promotion Mission) के तहत वित्तीय सहायता और बाजार पहुंच जैसी सुविधाएं प्रदान कर रही है।
किसानों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
कृषि क्षेत्र और उर्वरकों की कीमतों पर बात करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं डाला गया है।
“सरकार ने किसानों को बढ़ती लागत से बचाने के लिए उर्वरकों की बढ़ी कीमतों का पूरा वित्तीय बोझ स्वयं वहन किया है। हमारा प्रयास है कि हमारे अन्नदाता को कृषि लागत के कारण कोई आर्थिक परेशानी न उठानी पड़े।” – पीयूष गोयल
भविष्य की राह: ‘विकसित भारत 2047’
मंत्री ने उद्योग जगत का आह्वान करते हुए कहा कि हमें वैश्विक संकटों को अवसरों में बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने निम्नलिखित क्षेत्रों पर जोर दिया:
- आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution): घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उन क्षेत्रों की पहचान करना जहां हम आयात पर निर्भर हैं।
- नवाचार और प्रौद्योगिकी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और डेटा केंद्रों जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देना।
- गुणवत्ता और उत्पादकता: ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना।
अंत में, पीयूष गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि उद्योग और सरकार के बीच बेहतर समन्वय से भारत न केवल वैश्विक चुनौतियों का सामना करेगा, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को भी सिद्ध करेगा।












