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बलरामपुर स्वास्थ्य विभाग में बड़ा घोटाला: बिना ड्यूटी किए वेतन उठा रही नर्स, जांच की मांग





विशेष जांच रिपोर्ट: स्वास्थ्य केंद्र में वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही

विशेष रिपोर्ट: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतपुर में भ्रष्टाचार का बोलबाला, बिना ड्यूटी दिए नर्स को मिल रहा वेतन

बलरामपुर, छत्तीसगढ़: राज्य के स्वास्थ्य महकमे में उस समय हड़कंप मच गया जब बलरामपुर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रेवतपुर से वित्तीय हेरफेर और गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया। उल्लेखित दस्तावेजों के आधार पर, यह आरोप लगाया गया है कि एक स्टॉफ नर्स, विमरानी भगत, पिछले कई महीनों से बिना कार्य किए सरकारी वेतन और अन्य वित्तीय लाभ उठा रही हैं।

मामले की पृष्ठभूमि: क्या है पूरा विवाद?

शिकायत के अनुसार, विमरानी भगत की नियुक्ति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतपुर में 01 जनवरी 2025 को की गई थी। जून 2025 से, कथित तौर पर वह बिलासपुर में रहकर एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाई कर रही हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि रेवतपुर और बिलासपुर के बीच की दूरी लगभग 300 किलोमीटर है, जिसके बावजूद उनकी उपस्थिति रजिस्टर में निरंतर दिखाई जा रही है।

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतपुर के प्रभारी, डॉ. रमेश जायसवाल की भूमिका संदेह के घेरे में है। उन पर आरोप है कि वे जानते हुए भी नर्स को कार्यस्थल पर अनुपस्थित रहने के बावजूद उनका वेतन जारी कर रहे हैं। शिकायत में इसे ‘तानाशाही’ और ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में रखा गया है, जहां सरकारी धन का दुरुपयोग निजी लाभ के लिए किया जा रहा है।

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प्रमुख बिंदु:

  • वित्तीय अनियमितता: बिना कार्य किए वेतन का भुगतान करना लोक धन की चोरी और भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला है।
  • दूरी की बाधा: 300 किलोमीटर दूर कोचिंग करने वाली नर्स का रेवतपुर स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी करना भौतिक रूप से असंभव है।
  • साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का डर: शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि संबंधित अधिकारी विभाग के रिकॉर्ड, जैसे कैश-बुक और हाजरी रजिस्टर, को नष्ट कर सकते हैं या उनमें फेरबदल कर सकते हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने जिला कलेक्टर से मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच की अपील की है। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • दस्तावेजों को जब्त करना: कैश-बुक, बैंक स्टेटमेंट, चेक बुक और हाजरी रजिस्टर को तत्काल प्रभाव से जब्त किया जाए ताकि साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके।
  • पद से मुक्त करना: निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए डॉ. रमेश जायसवाल को वर्तमान प्रशासनिक प्रभार से मुक्त किया जाए।
  • उच्च स्तरीय जांच: विभागीय अधिकारियों से जांच कराने के बजाय किसी स्वतंत्र एजेंसी या निष्पक्ष समिति से जांच कराई जाए, क्योंकि निचले स्तर पर मिलीभगत की प्रबल संभावना है।

यह मामला न केवल एक नर्स की अनुपस्थिति का है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में व्याप्त उस बड़ी समस्या को दर्शाता है जहां निगरानी के अभाव में सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है। कलेक्टर कार्यालय की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर पूरे जिले की नजरें टिकी हैं।


नोट: यह रिपोर्ट दी गई जानकारी पर आधारित है और जांच का विषय है।


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