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बाँकेबिहारी कॉरिडोर पर उठे पारदर्शिता के सवाल, विस्तृत आरटीआई दाखिल





बाँकेबिहारी कॉरिडोर: पारदर्शिता की मांग और विस्तृत आरटीआई का घटनाक्रम – संपूर्ण विश्लेषण

बाँकेबिहारी कॉरिडोर पर उठे पारदर्शिता के सवाल: आरटीआई के माध्यम से प्रशासन की जवाबदेही तय करने की कवायद

वृन्दावन। विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बाँकेबिहारी मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित ‘बाँकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर’ परियोजना वर्तमान में वृन्दावन के सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विमर्श का मुख्य केंद्र बनी हुई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय निवासियों, मंदिर के सेवायतों और तीर्थयात्रियों के बीच जहाँ एक ओर उत्साह है, वहीं दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण, विस्थापन की आशंका और प्राचीन धरोहरों के भविष्य को लेकर गहरे प्रश्न भी खड़े हो रहे हैं।

इन तमाम अनिश्चितताओं के बीच, वृन्दावन निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पाराशर ने पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) और जिलाधिकारी कार्यालय में एक विस्तृत सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन दायर किया है। यह कदम परियोजना से संबंधित उन सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो अब तक आम जनता के लिए स्पष्ट नहीं थे।

परियोजना का स्वरूप और विवाद का आधार

बाँकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर का मूल उद्देश्य संकीर्ण गलियों में भीड़ के दबाव को कम करना और श्रद्धालुओं को एक व्यवस्थित मार्ग प्रदान करना है। हालाँकि, वृन्दावन की सघन बसावट और यहाँ के प्राचीन मंदिरों की वास्तुकला को देखते हुए, किसी भी बड़े निर्माण कार्य के दूरगामी प्रभाव की आशंकाओं को दरकिनार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता यह है कि क्या यह परियोजना उनकी पुश्तैनी संपत्तियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को प्रभावित करेगी, और यदि हाँ, तो उनके पुनर्वास की योजना क्या है?

आरटीआई आवेदन: 18 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की मांग

दीपक पाराशर द्वारा दायर आरटीआई आवेदन में 18 महत्वपूर्ण बिंदुओं के माध्यम से परियोजना की संपूर्ण कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। आवेदन की प्रतियां नीचे दिए गए संदर्भों से देखी जा सकती हैं:

मांगी गई प्रमुख जानकारियां:

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  • नीतिगत निर्णय: परियोजना से संबंधित सभी शासनादेशों और स्वीकृत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) की प्रमाणित प्रतियां।
  • वित्तीय पारदर्शिता: परियोजना का कुल स्वीकृत बजट, अब तक हुआ व्यय और धनराशि के स्रोत।
  • भूमि अधिग्रहण: अधिगृहीत या क्रय की गई भूमि, भवनों और दुकानों का विस्तृत विवरण तथा तिथि-वार जानकारी।
  • मुआवजा और पुनर्वास: मुआवजा निर्धारण का आधार, मूल्यांकन रिपोर्ट और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की स्पष्ट नीति।
  • विशेषाधिकार का प्रश्न: क्या “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर किसी को विशेष पैकेज या लाभ दिया जा रहा है? साथ ही, मंदिर कोष से रजिस्ट्री संबंधी आदेशों का खुलासा।
  • सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: प्राचीन श्रीराधाबल्लभ और श्री मदनमोहन मंदिर के 100 मीटर के दायरे में आने वाली संपत्तियों का विवरण और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से ली गई अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) की स्थिति।

लोकतांत्रिक जवाबदेही और जनहित

आवेदक दीपक पाराशर ने जोर देकर कहा कि “करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इस स्थान से जुड़ी है। किसी भी ऐसे प्रकल्प का क्रियान्वयन पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए। स्थानीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।” उन्होंने प्रशासन से यह भी अनुरोध किया है कि यदि मांगी गई जानकारी संबंधित विभाग के पास न हो, तो सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत उसे संबंधित विभाग को स्थानांतरित किया जाए।

यह आरटीआई आवेदन महज एक कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिक समाज की उस जागरूकता का प्रतीक है जो शासन और प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने का कार्य करती है। वृन्दावन के नागरिक चाहते हैं कि कॉरिडोर बने, लेकिन वह विकास विनाश की नींव पर खड़ा न हो। अब गेंद जिला प्रशासन और एमवीडीए के पाले में है कि वे इन 18 बिंदुओं पर कितनी जल्दी और कितनी स्पष्टता के साथ जवाब देते हैं।

आगामी समय में इन सूचनाओं के सार्वजनिक होने से परियोजना की कार्यप्रणाली में स्पष्टता आएगी, जिससे न केवल स्थानीय निवासियों की शंकाएं दूर होंगी, बल्कि प्रशासन की मंशा पर भी जनता का विश्वास बढ़ेगा।


मीडिया संपर्क:
दीपक पाराशर
सामाजिक कार्यकर्ता एवं सोशल आउटरीच कांग्रेस जिलाध्यक्ष
मो.: 9927965122


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