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केंद्रीय जेल भोपाल: सुधार गृह नहीं, व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र बने – राज्य महिला आयोग





सुधार गृह बने पुनर्वास का केंद्र: महिला आयोग की पहल | केंद्रीय जेल भोपाल निरीक्षण



सुधार गृह केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए: रेखा यादव

भोपाल: मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष रेखा यादव ने केंद्रीय जेल भोपाल का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक ने भोपाल केंद्रीय जेल की व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने जेल में बंद महिला कैदियों से सीधे संवाद किया। रेखा यादव ने स्पष्ट किया कि सुधार गृहों का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास जगाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए तैयार करना होना चाहिए।

सुविधाओं और व्यवस्थाओं का जायजा

आयोग की टीम ने जेल प्रशासन द्वारा दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा की, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विभाग शामिल रहे:

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  • महिला वार्ड और चिकित्सालय: स्वास्थ्य सेवाओं और महिला कैदियों के उपचार की उपलब्धता की जांच की गई।
  • रसोई घर और पुस्तकालय: भोजन की गुणवत्ता और कैदियों के बौद्धिक विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का अवलोकन किया गया।
  • आर्ट एवं क्राफ्ट सेंटर व ब्यूटी पार्लर: महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित वोकेशनल कोर्सेज की समीक्षा की गई।

सकारात्मक पहल: ऑर्केस्ट्रा दल और कलात्मक कौशल

निरीक्षण के दौरान सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों द्वारा संचालित ‘ऑर्केस्ट्रा दल’ ने भजनों की प्रस्तुति दी। रेखा यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि संगीत और कला जैसी रचनात्मक गतिविधियां बंदियों के मानसिक विकास और सामाजिक पुनर्स्थापन में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।

आर्ट एवं क्राफ्ट सेंटर में तैयार किए गए उत्पादों को देखकर आयोग ने बंदियों के आत्मविश्वास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ये प्रयास महिलाओं को भविष्य में आत्मनिर्भर बनाने और समाज में सम्मानजनक पहचान दिलाने में मददगार हैं।

आयोग की प्रतिबद्धता

रेखा यादव ने जोर देकर कहा कि मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि हर महिला को उसके कानूनी अधिकारों, सम्मान और न्याय तक आसान पहुंच मिले। इस अवसर पर आयोग के सचिव सुरेश तोमर, केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक राकेश भांगरे सहित जेल प्रबंधन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह निरीक्षण इस बात को रेखांकित करता है कि आधुनिक जेल प्रणाली में सुधार का अर्थ केवल कारावास नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ सुधार की प्रक्रिया है। कौशल विकास और मनोवैज्ञानिक सहयोग के माध्यम से महिला बंदियों का सशक्तिकरण ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण करेगा।


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