मध्यप्रदेश का ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ बना वैश्विक प्रेरणा: अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ की धूम
भोपाल: जल संरक्षण के प्रति मध्यप्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नजीर बन गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ ने न केवल राज्य में जल आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी है, बल्कि इसे दुनिया के विभिन्न देशों ने भी अपने लिए एक अनुकरणीय मॉडल माना है।
सदानीरा समागम: संस्कृति और जल संरक्षण का अनूठा संगम
हाल ही में भोपाल के ऐतिहासिक भारत भवन में संपन्न हुआ ‘सदानीरा समागम’ जल संरक्षण के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। सात दिवसीय इस आयोजन में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर के राजनयिकों ने भाग लिया। इस समागम का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़कर इसे एक जन-आंदोलन का स्वरूप देना था।
वैश्विक नेताओं की राय: ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ का प्रभाव
- साइप्रस: उच्चायुक्त श्री इवागोरस वराईओनाइडेस ने जल संकट को एक गंभीर वैश्विक चुनौती बताया और जन-जागरूकता के माध्यम से समाधान ढूंढने के मध्यप्रदेश के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने घोषणा की कि साइप्रस का सांस्कृतिक दल 20-21 जून 2026 को भोपाल में अपनी प्रस्तुतियां देगा।
- फिजी: उच्चायुक्त श्री जगन्नाथ सामी ने जलवायु परिवर्तन के दौर में इस पहल को बेहद दूरदर्शी बताया और कहा कि पर्यावरण संरक्षण में भारत और फिजी के सरोकार एक समान हैं।
- मेक्सिको: सुश्री वनेसा एड्रियन ने नदियों को सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने के निर्णय को सराहा और कहा कि भारत और मेक्सिको जैसी प्राचीन सभ्यताओं को मिलकर जल प्रबंधन के नए समाधान विकसित करने चाहिए।
- नेपाल: प्रथम सचिव श्री दीपक पोरखिरे ने भारत की सामाजिक संवेदनाओं और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी के भाव को साझा करते हुए इसे अपना अनुभव बताया।
- त्रिनिदाद एवं टोबैगो व इक्वाडोर: इन देशों ने भी इस पहल की प्रशंसा की। विशेष रूप से, इक्वाडोर ने अपने देश में इसी तर्ज पर ‘सदानीरा संगम’ आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
जल आत्मनिर्भरता: आंकड़ों की जुबानी
मध्यप्रदेश की जल संरक्षण यात्रा केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर भी इसके ठोस परिणाम दिखाई दे रहे हैं:
| विवरण | स्थिति/लक्ष्य |
|---|---|
| पूर्ण हो चुकी जल संरचनाएँ | 2 लाख 12 हजार से अधिक |
| सरकार का आगामी लक्ष्य | 3 लाख 66 हजार |
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह अभियान अब सीमाओं के पार जा चुका है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ यह सिद्ध करता है कि यदि जनभागीदारी को सरकारी नीतियों से जोड़ दिया जाए, तो किसी भी बड़ी चुनौती का समाधान संभव है। मध्यप्रदेश आज न केवल भारत, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए जल संरक्षण का नया ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’ बनकर उभरा है।













