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हरियाली अमावस्या पर CM डॉ. मोहन यादव का संदेश: प्रकृति संरक्षण और पौधरोपण का महासंकल्प






हरियाली अमावस्या पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश: प्रकृति संरक्षण, पौधरोपण और हरित भविष्य का महासंकल्प



पर्यावरण एवं राज्य विकास

हरियाली अमावस्या पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रदेशवासियों को आह्वान: प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रचें हरित भविष्य का नया इतिहास

“संस्कृति, प्रकृति और संतति के सुरक्षा चक्र को मजबूत करने के लिए प्रत्येक नागरिक कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए” — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

विशेष संवाददाता |
भोपाल, मध्य प्रदेश

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी हैं। अपने विशेष शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हरियाली अमावस्या का यह पर्व केवल एक धार्मिक अथवा पारंपरिक तिथि नहीं है, बल्कि यह मानव समाज को अपनी जड़ों, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और पर्यावरण संरक्षण के बुनियादी कर्तव्यों का बोध कराने वाला पावन पर्व है। मुख्यमंत्री ने संपूर्ण मध्य प्रदेश के नागरिकों से अपील की है कि वे इस पवित्र अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाएं और प्रदेश को हरा-भरा, समृद्ध तथा पर्यावरणीय दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, संतुलित और जीवनदायी पर्यावरण सुनिश्चित करना हम सभी का परम दायित्व और सामूहिक संकल्प होना चाहिए।

“हरियाली अमावस्या प्रकृति के प्रति हमारी अटूट आस्था और कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। पेड़-पौधे केवल हमारी धरा का सौंदर्य ही नहीं बढ़ाते, बल्कि वे हमारी सांसों का आधार और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन की गारंटी हैं। आइए, इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर मध्यप्रदेश की धरा को हरितिमा से आच्छादित करने का अटूट संकल्प लें।”

— डॉ. Mohan Yadav, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

1. हरियाली अमावस्या की सांस्कृतिक परंपरा और पर्यावरणीय प्रासंगिकता

भारतीय सनातन संस्कृति में प्रकृति को केवल भौतिक संसाधन नहीं माना गया, बल्कि उसे ‘माता’ के रूप में पूजनीय स्थान दिया गया है। आषाढ़ और श्रावण मास के संधिकाल में आने वाली हरियाली अमावस्या कृषि, वर्षा, वनस्पति और जीवन के नवसृजन का प्रतीक है। पौराणिक काल से ही इस दिन वृक्षों की पूजा, पीपल, बरगद, नीम, शमी और तुलसी के पौधे लगाने तथा जल स्रोतों की सफाई की परंपरा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन मनीषियों ने वृक्षारोपण को महादान और पुण्य कार्य का दर्जा दिया था। आज जब पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियंत्रित तापमान वृद्धि और असमय प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है, तब हमारी पारंपरिक पर्यावरणीय चेतना की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, हरियाली अमावस्या जैसे सांस्कृतिक पर्वों को जन-आंदोलन का रूप देकर ही हम आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियों का ठोस मुकाबला कर सकते हैं।

2. ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ और हरियाली अमावस्या का अनूठा संगम

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी पर्यावरण अभियानों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के व्यापक सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस अभियान को और अधिक प्रभावशाली एवं पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ की शुरुआत की है।

हरियाली अमावस्या के अवसर पर इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी 55 जिलों में शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक विभागों के सहयोग से व्यापक पौधरोपण अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

अभियान की प्रमुख विशेषताएं:

  • मातृत्व सम्मान और प्रकृति संरक्षण: प्रत्येक नागरिक अपनी माता के सम्मान में एक पौधा रोपित करता है, जिससे पौधे के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और उसकी देखरेख की प्रतिबद्धता सुनिश्चित होती है।
  • जियो-टैगिंग एवं डिजिटल निगरानी: रोपे गए प्रत्येक पौधे की जियो-टैगिंग की जा रही है तथा ‘Meri LiFE’ पोर्टल और राज्यस्तरीय डैशबोर्ड के माध्यम से पौधों की उत्तरजीविता (Survival Rate) पर सीधी नजर रखी जा रही है।
  • स्थानीय एवं फलदार प्रजातियों की प्राथमिकता: पौधरोपण में बरगद, पीपल, नीम, आंवला, जामुन, बेलपत्र, शहतूत, महुआ और आम जैसे पारंपरिक एवं स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • जन-भागीदारी (Jan-Bhagidari): शासकीय विभागों के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं, एनसीसी, एनएसएस, जन-अभियान परिषद और महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की गई है।

3. हरित मध्य प्रदेश: विजन और रणनीतिक खाका

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के वन क्षेत्र (Forest Cover) को बढ़ाने और गैर-वन क्षेत्रों में हरित आवरण (Tree Cover Outside Forests) को सुदृढ़ करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार की है। मध्य प्रदेश वर्तमान में देश में सर्वाधिक वनाच्छादित राज्य है, लेकिन औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है।

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क्षेत्र / घटक लक्ष्य और रणनीति प्रत्याशित पर्यावरणीय लाभ
शहरी हरित क्षेत्र (Urban Forestry) नगर निगमों और नगर पालिकाओं में ‘नगर वन’ और ‘अमृत उपवन’ का निर्माण। शहरी हीट आइलैंड (Heat Island) प्रभाव में कमी, वायु गुणवत्ता (AQI) में सुधार।
ग्रामीण एवं नदी तट रोपण नर्मदा, चंबल, बेतवा, ताप्ती, शिप्रा और सोन नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में संघन पौधरोपण। मृदा क्षरण पर रोक, भू-जल स्तर में वृद्धि, नदियों का अविरल प्रवाह।
जनजातीय एवं कृषि वानिकी जनजातीय क्षेत्रों में फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण तथा किसानों की मेढ़ों पर वृक्षारोपण। आजीविका संवर्धन, अतिरिक्त आय सृजन, विविधता का संरक्षण।
संस्थानगत परिसर रोपण स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, पुलिस लाइन एवं प्रशासनिक परिसरों में हरियाली बेल्ट। पर्यावरणीय चेतना का प्रसार, विद्यार्थियों में प्रकृति प्रेम का बीजारोपण।

4. भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संतुलन: मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश

अपने संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अत्यंत गंभीर दृष्टिकोण व्यक्त करते हुए कहा कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए भौतिक संपत्ति, भवन और सुविधाएं तो छोड़ सकते हैं, लेकिन यदि उनके पास सांस लेने के लिए शुद्ध हवा, पीने के लिए स्वच्छ जल और रहने के लिए अनुकूल वातावरण नहीं होगा, तो सभी भौतिक विकास अर्थहीन साबित होंगे।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और कंक्रीट का अनियंत्रित जंगल मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसलिए समय की मांग है कि हम “उपभोग केंद्रित विकास” के बजाय “सतत एवं संतुलित विकास” (Sustainable Development) का मार्ग अपनाएं। हरियाली अमावस्या का यह संदेश हमें स्मरण कराता है कि जितने पेड़ हम अपनी आवश्यकताओं के लिए खोते हैं, उससे दुगुने पौधे लगाने और उन्हें वटवृक्ष बनाने का दायित्व भी हमारा ही है।

5. राज्य के विभिन्न अंचलों में पौधरोपण की अभूतपूर्व लहर

मुख्यमंत्री के आह्वान के पश्चात पूरे मध्य प्रदेश में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा और सरगुजा संभाग से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों तक में समाज के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।

राजधानी भोपाल और इंदौर में जन-अभियान

राजधानी भोपाल में जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा विभिन्न पार्कों, कलियासोत डैम कैचमेंट, समरधा जंगल रेंज और शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं इंदौर में जन-भागीदारी का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए लाखों पौधे रोपने का लक्ष्य तय किया गया है।

जनजातीय अंचल और आईटीआई संस्थानों में विशेष पहल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं विभिन्‍न जिलों के दौरे के दौरान पौधरोपण गतिविधियों में सीधे शामिल हो रहे हैं। हाल ही में छिंदवाड़ा स्थित शासकीय जनजातीय महिला आईटीआई परिसर में निरीक्षण के दौरान उन्होंने छात्राओं से संवाद किया और ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ के अंतर्गत शहतूत का पौधा लगाकर पर्यावरण व स्वरोजगार को जोड़ने का प्रेरक संदेश दिया।

6. पौधे लगाने से आगे: उत्तरजीविता और देखरेख की त्रि-स्तरीय योजना

प्रायः यह देखा जाता है कि वृक्षारोपण अभियानों के दौरान लाखों पौधे लगा तो दिए जाते हैं, परंतु समुचित रखरखाव के अभाव में उनमें से अनेक पौधे नष्ट हो जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस चुनौती को रेखांकित करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल पौधे लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें एक वृक्ष के रूप में विकसित करना सरकार और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है।

राज्य सरकार ने पौधों की देखभाल के लिए निम्नलिखित त्रि-स्तरीय तंत्र लागू किया है:

  1. संरक्षक की नियुक्ति (Tree Guardianship): प्रत्येक रोपे गए पौधे के लिए एक ‘वृक्ष मित्र’ या ‘संरक्षक’ नामित किया जा रहा है, जो अगले 3 वर्षों तक पौधे की सुरक्षा, सिंचाई और खाद-पानी का ध्यान रखेगा।
  2. ट्री-गार्ड और फेंसिंग सुरक्षा: मवेशियों और बाहरी खतरों से सुरक्षा हेतु बांस, लोहे एवं स्थानीय संसाधनों से ट्री-गार्ड लगाए जा रहे हैं।
  3. डिजिटल ऑडिटिंग: वन विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग प्रत्येक 6 महीने में रोपे गए पौधों की उत्तरजीविता का डिजिटल ऑडिट करेंगे और डेटा पोर्टल पर अपडेट करेंगे।

7. पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आर्थिक और सामाजिक पहलू

पर्यावरण संरक्षण केवल प्राकृतिक संतुलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव राज्य की अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादकता और जन-स्वास्थ्य पर पड़ता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि हरित आवरण में वृद्धि से मध्य प्रदेश को कार्बन क्रेडिट (Carbon Credits) के क्षेत्र में भी वैश्विक पहचान मिल सकती है।

व्यापक पौधरोपण के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ निम्नलिखित हैं:

  • भू-जल संवर्धन: सघन वृक्षारोपण से जल पुनर्भरण (Water Recharge) की दर बढ़ती है, जिससे कुओं, नलकूपों और तालाबों का जलस्तर ऊपर आता है।
  • कृषि के लिए वरदान: पेड़ भूमि की नमी को बनाए रखते हैं, जिससे मानसूनी उतार-चढ़ाव का असर फसलों पर कम पड़ता है और किसानों की पैदावार सुरक्षित रहती है।
  • स्वास्थ्य लागत में कमी: वायु प्रदूषण में कमी आने से श्वसन संबंधी बीमारियों में गिरावट आती है, जिससे नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर होता है और चिकित्सा खर्च कम होता है।
  • जैविक विविधता का संरक्षण: स्थानीय प्रजातियों के पौधे पक्षियों, कीटों और सूक्ष्मजीवों के लिए प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित रहता है।

8. युवाओं, विद्यार्थियों और स्वयंसेवी संस्थाओं का आह्वान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश के अंत में विशेष रूप से प्रदेश के युवाओं और छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही किसी भी बड़े सामाजिक परिवर्तन की संवाहक होती है। यदि हमारा युवा वर्ग पर्यावरण के प्रति सजग हो जाए, तो मध्य प्रदेश को देश का सबसे सुंदर और स्वच्छ राज्य बनने से कोई नहीं रोक सकता।

उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के जन्मदिवस, प्रवेश दिवस अथवा विशेष उपलब्धियों पर कम से कम एक पौधा लगाने की स्वस्थ परंपरा शुरू करें। साथ ही, एनजीओ, धार्मिक संगठनों, व्यापारिक मंडलों और मीडिया तंत्र से भी इस महाअभियान में अग्रणी भूमिका निभाने की अपील की गई।

हरियाली अमावस्या के इस पावन पर्व पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश केवल एक औपचारिक शुभकामना नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश को हरित, समृद्ध और पर्यावरण-अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में एक सशक्त रोडमैप है। प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, पौधरोपण का संकल्प और भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का यह त्रिवेणी संगम निश्चित रूप से प्रदेश के पर्यावरणीय परिदृश्य में एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत करेगा। आइए, हम सब मिलकर मुख्यमंत्री के इस आह्वान को स्वीकार करें और अपनी धरती माता को हरियाली की चादर से आच्छादित करने में अपना योगदान दें।


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