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भोजशाला की मूल वाग्देवी प्रतिमा की पुष्टि और भारत वापसी की कवायद, भोपाल ब्रिक्स सम्मेलन में उठा बड़ा मुद्दा

 

विशेष रिपोर्ट / सांस्कृतिक धरोहर

भोजशाला की मूल वाग्देवी प्रतिमा होने की पुष्टि: प्रतिमा भारत लाने की कवायद तेज, भोपाल में ब्रिक्स सम्मेलन से पहले केंद्र का बड़ा दावा

स्थान: भोपाल / धार | अपडेटेड: अगस्त 2026

धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी मां वाग्देवी (सरस्वती) की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाने की प्रक्रिया अब एक बेहद निर्णायक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। लंदन के विश्व प्रसिद्ध ब्रिटिश म्यूजियम में लंबे समय से संरक्षित इस पावन प्रतिमा का कानूनी और पुरातात्विक सत्यापन सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, केंद्र सरकार ने इसकी स्वदेश वापसी के कूटनीतिक एवं कानूनी प्रयासों को तीव्र कर दिया है। हाल ही में हुई आधिकारिक जाँच-पड़ताल में यह पूरी तरह प्रमाणित हो चुका है कि यह अलौकिक प्रतिमा अन्य कोई नहीं, बल्कि धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला की मूल वाग्देवी प्रतिमा ही है।

मुख्य बिंदु: केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने भोपाल में आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि भारत सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और ब्रिटिश म्यूजियम के मध्य इस अत्यंत संवेदनशील और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण विषय पर कानूनी प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। इस बीच, भोपाल में आयोजित हो रहे ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 (BRICS Cultural Summit 2026) के दौरान भी दुनिया भर की चोरी हुई और पराई भूमि पर पहुंच चुकी सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी तथा उनके संरक्षण का मुद्दा प्रमुख एजेंडे के रूप में छाया हुआ है।

मध्य प्रदेश प्रशासनिक समन्वय और केंद्र की बढ़ती सक्रियता

इस पूरी प्रक्रिया को गति देने में राज्य स्तर पर भी प्रशासनिक समन्वय बेहद मजबूत रहा है। मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला द्वारा इस विषय को निरंतर सर्वोच्च प्राथमिकता सूची में रखे जाने के परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार ने प्रतिमा की वापसी से जुड़ी कूटनीतिक और कानूनी औपचारिकताओं को अभूतपूर्व गति दी है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे ही विधिक और औपचारिकता से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी होंगी, वैसे ही मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा के भारत लौटने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो जाएगा। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम से देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों में भारी उत्साह का माहौल है।

5 अगस्त से भोपाल में BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 का भव्य आगाज

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा तथा वैश्विक सहभागिता के इस महत्वपूर्ण दौर के बीच, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित प्रतिष्ठित कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में 5 अगस्त से 8 अगस्त तक बहुप्रतीक्षित ‘ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन-2026’ का भव्य शुभारंभ हो रहा है। इस वैश्विक आयोजन में ब्रिक्स (BRICS) संगठन के सभी सदस्य देशों के साथ-साथ प्रमुख साझेदार देशों के सम्मानित संस्कृति मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं।

इस चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ के दौरान सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, विदेशी भूमि पर गई चोरी हुई धरोहरों की सकुशल वापसी, वैश्विक संग्रहालयों के बीच आपसी सहयोग, डिजिटल सांस्कृतिक नेटवर्क के विस्तार और रचनात्मक उद्योगों जैसे गंभीर एवं प्रासंगिक विषयों पर गहन मंथन किया जा रहा है। सम्मेलन के पहले दिन जहां विदेशी मेहमानों का पंजीकरण, द्विपक्षीय उच्चस्तरीय बैठकें और विशेष प्रदर्शनियों का अवलोकन कराया गया, वहीं शाम के वक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में पारंपरिक भारतीय शैली में उनका भव्य स्वागत हुआ। इस दौरान मृदा शिल्प प्रदर्शनी, भारत की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का अनूठा परिचय और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सबका मन मोह लिया।

मिंटो हॉल में सजी तीन विशेष और भव्य प्रदर्शनियां

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और विदेशी मेहमानों के लिए भोपाल के मिंटो हॉल परिसर में तीन अत्यंत खास और ऐतिहासिक प्रदर्शनियां लगाई गई हैं, जो भारत के प्राचीन वैभव को दर्शाती हैं:

  • ज्ञान भारतम: इसके माध्यम से भारत की प्राचीन, प्रचुर और अलौकिक पांडुलिपि परंपरा (Manuscript Tradition) को प्रदर्शित किया गया है।
  • प्रोजेक्ट मौसम: यह प्रदर्शनी हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के प्राचीन समुद्री सांस्कृतिक संबंधों और ऐतिहासिक व्यापारिक-सांस्कृतिक मार्गों को उजागर करती है।
  • प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत: इसके जरिए भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीन सभ्यतागत संपर्कों और वैश्विक सांस्कृतिक प्रभाव को बेहद खूबसूरती से रेखांकित किया गया है।

ब्रिक्स सम्मेलन की दिन-प्रतिदिन की रूपरेखा (5 अगस्त से 9 अगस्त तक)

6 अगस्त: सांस्कृतिक सहयोग और साझा भविष्य पर मंथन

सम्मेलन के दूसरे दिन ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों के घोषणा-पत्र के मसौदे पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संग्रहालयों के आपसी सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण (Capacity Building) और विभिन्न राष्ट्रों के नागरिकों के बीच आपसी सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने जैसे दूरगामी विषयों पर गहन चर्चा हुई। इसी दिन शाम को रवींद्र भवन में भव्य ‘ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव’ का आयोजन किया गया, जिसमें सभी सदस्य और साझेदार देशों के कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक कला और सांस्कृतिक परंपराओं की बेहतरीन प्रस्तुतियां दीं।

7 अगस्त: ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा

7 अगस्त को विदेशी संस्कृति मंत्रियों और प्रतिनिधियों के औपचारिक आगमन के बाद शाम को एक बार फिर सांस्कृतिक महोत्सव का रंगारंग आयोजन हुआ। इसकी शुरुआत भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के उद्घोष के साथ हुई। इसके पश्चात भारत तथा अन्य ब्रिक्स देशों के प्रसिद्ध कलाकारों ने मिलकर संयुक्त संगीतमय प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने वैश्विक बंधुत्व का संदेश दिया।

इसी विशेष सत्र के दौरान मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से प्रस्तुत ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश – एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य-नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से मध्य प्रदेश की विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहरों—भीमबेटका, सांची, खजुराहो, चित्रकूट, उज्जैन, महेश्वर, चंदेरी, ओंकारेश्वर और पवित्र नर्मदा मैया की सांस्कृतिक थाती को अत्यंत सजीव रूप में दर्शाया गया। इस कार्यक्रम के दौरान आगामी ‘सिंहस्थ कुंभ-2028’ का भव्य सांस्कृतिक आमंत्रण भी अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को दिया गया।

8 अगस्त: संस्कृति मंत्रियों की मुख्य बैठक और यूनेस्को विश्व धरोहर सांची का भ्रमण

सम्मेलन के तीसरे दिन भारत की कुशल अध्यक्षता में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की आधिकारिक और निर्णायक बैठक संपन्न हुई। इसमें भविष्य में आपसी सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक साझा घोषणा-पत्र जारी किया गया। इस बैठक के उपरांत, पूरा प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक ‘सांची स्तूप’ के भ्रमण के लिए रवाना हुआ। सांची में मेहमानों ने बौद्ध धर्म की प्राचीन विरासत का अवलोकन किया, विशेष योग-ध्यान सत्र में भाग लिया तथा अत्याधुनिक 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग एवं लाइट एंड साउंड शो का आनंद उठाया।

9 अगस्त: प्रागैतिहासिक भीमबेटका शैलाश्रयों का वैकल्पिक दौरा

सम्मेलन के अंतिम और समापन चरण में 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विश्व प्रसिद्ध यूनेस्को धरोहर ‘भीमबेटका शैलाश्रयों’ (Bhimbetka Rock Shelters) के भ्रमण की विशेष व्यवस्था की गई है। यहां पहुंचकर विदेशी मेहमान भारत की प्राचीन प्रागैतिहासिक शैल कला (Rock Art) और मानव सभ्यता के शुरुआती विकास की अनमोल सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो रहे हैं।

विदेशी मेहमानों के लिए विशेष आकर्षण और भोपाल दर्शन

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भाग लेने वाले विदेशी प्रतिनिधियों को केवल बैठकों तक सीमित न रखते हुए, उन्हें मध्य प्रदेश और विशेषकर भोपाल की समृद्ध सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक खूबसूरती से परिचित कराने के लिए कई विशेष गतिविधियों का आयोजन भी किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • हेरिटेज वॉक: भोपाल की ऐतिहासिक गलियों और इमारतों की सैर।
  • बर्ड वॉचिंग: प्राकृतिक वनों और झीलों के शहर में पक्षी अवलोकन।
  • बड़ी झील में शिकारा राइड: भोपाल की प्रसिद्ध बड़ी झील (अपर लेक) में कश्मीरी तर्ज पर शिकारा सैर का आनंद।
  • हस्तशिल्प शॉपिंग: मध्य प्रदेश के पारंपरिक और विश्वविख्यात हथकरघा व हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी।

इन सभी आयोजनों के माध्यम से वैश्विक मंच पर भोपाल और मध्य प्रदेश की एक सशक्त ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा पर्यटन आधारित नई पहचान स्थापित हो रही है, जो भविष्य में राज्य के पर्यटन उद्योग को भी एक नई दिशा प्रदान करेगी।