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RKVY योजना: छत्तीसगढ़ के छोटे किसानों के लिए सिंचाई का नया सहारा, जानें कैसे लें लाभ





राष्ट्रीय कृषि विकास योजना: किसानों के लिए सिंचाई का नया संबल


राष्ट्रीय कृषि विकास योजना: सिंचाई सुविधा और किसानों की बढ़ती समृद्धि

छत्तीसगढ़ में कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं। प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ (RKVY) एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है, जो विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा उपलब्ध कराने में मील का पत्थर सिद्ध हो रही है।

सिंचाई का सुदृढ़ीकरण: कृषि उन्नति का आधार

कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए जल की उपलब्धता सबसे बड़ी आवश्यकता है। शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को जल प्रबंधन और सिंचाई के आधुनिक साधनों से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ‘सेलो बोर’ निर्माण की पहल इसी उद्देश्य को पूरा करती है। यह योजना उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है जिनके खेतों के पास प्राकृतिक जल स्रोत जैसे नदी, नाला या नहर मौजूद हैं, लेकिन उचित सिंचाई के अभाव में वे अपनी पूरी क्षमता का लाभ नहीं उठा पा रहे थे।

योजना का स्वरूप और पात्रता

इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • अनुदान राशि: योजना के तहत प्रति किसान अधिकतम 20,000 रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाता है।
  • वितरण: इसमें सेलो बोर खनन के लिए 5,000 रुपये तथा पंप की स्थापना के लिए 15,000 रुपये की राशि सहायता के रूप में दी जाती है।
  • पात्रता मानदंड: इस सुविधा का लाभ प्राप्त करने के लिए किसान की भूमि नदी, नाला या नहर के किनारे स्थित होनी चाहिए। साथ ही, किसान के पास कम से कम आधा एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि का होना अनिवार्य है।

एक सफल उदाहरण: अम्बिकापुर का प्रगतिशील किसान
अम्बिकापुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सरईटिकरा के निवासी काशीराम इस योजना के सफल लाभार्थी हैं। काशीराम के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि कैसे सरकारी सहायता किसी किसान के पूरे जीवन और खेती के तरीके को बदल सकती है।

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काशीराम का अनुभव: अभाव से संपन्नता की ओर

काशीराम बताते हैं कि पहले उनके पास सिंचाई के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। मानसून पर निर्भरता के कारण खेती का दायरा बेहद सीमित था और वे केवल धान जैसी पारंपरिक फसलों तक ही सीमित थे। शासन की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्हें सेलो बोर की सुविधा मिली।

वे कहते हैं, “अब मेरी एक एकड़ भूमि में सिंचाई करना बहुत आसान हो गया है। बोरिंग सुविधा मिलने के बाद मुझे पानी के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।” यह आत्मनिर्भरता ही उनके लिए प्रगति का नया मार्ग प्रशस्त कर रही है।

फसलों में विविधता और आय का विस्तार

सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने के बाद काशीराम की कृषि कार्यशैली में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने न केवल फसलों में विविधता लाई है, बल्कि अपनी आमदनी को भी बहुगुना बढ़ाया है।

  • विविध खेती: अब वे केवल धान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मकई, भिंडी और अन्य मौसमी सब्जियों का भी उत्पादन कर रहे हैं।
  • आर्थिक सशक्तिकरण: सब्जियों की खेती ने उन्हें बाजार में नियमित आय का स्रोत प्रदान किया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
  • जोखिम में कमी: सिंचाई के साधन उपलब्ध होने से अब वे वर्षभर खेती करने की स्थिति में हैं, जिससे खेती का जोखिम कम और मुनाफा अधिक हो गया है।

किसानों का भरोसा और आभार

काशीराम जैसे हजारों किसान आज सरकारी योजनाओं के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं। उनका मानना है कि ये योजनाएं छोटे किसानों के लिए संबल का कार्य कर रही हैं। वे कहते हैं, “शासन की इन योजनाओं से हमें न केवल राहत मिली है, बल्कि हम अब प्रगति के पथ पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।” अपनी इस सफलता का श्रेय देते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने कृषि को लाभकारी बनाने के लिए धरातल पर इतनी प्रभावी योजनाओं का क्रियान्वयन किया है।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि किसानों के सशक्तिकरण का माध्यम है। अम्बिकापुर और पूरे प्रदेश में इस तरह के उदाहरण यह सिद्ध करते हैं कि यदि सही समय पर तकनीकी और आर्थिक मदद मिले, तो किसान किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं। शासन का यह संकल्प कि हर खेत को पानी और हर किसान को सम्मान मिले, आज धरातल पर फलीभूत हो रहा है। आने वाले समय में ऐसी योजनाएं कृषि क्षेत्र को और अधिक समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।


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