राष्ट्रपति मुर्मु ने बैतूल में किया ‘आध्यात्मिक जागृति’ महासम्मेलन का शुभारंभ, देखें मुख्य अंश





राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का मध्य प्रदेश दौरा – विशेष रिपोर्ट

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का मध्य प्रदेश दौरा: आध्यात्मिक जागृति और जनजातीय सशक्तिकरण पर विशेष बल

बैतूल/ओंकारेश्वर: भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की मध्य प्रदेश यात्रा ने राज्य में जनजातीय समाज के उत्थान, आध्यात्मिक चेतना और स्वास्थ्य जागरूकता के एक नए अध्याय की शुरुआत की है। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने बैतूल और ओंकारेश्वर में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेकर न केवल जनजातीय संस्कृति की सराहना की, बल्कि राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समुदाय की भूमिका को रेखांकित किया।

बैतूल में भव्य स्वागत और आध्यात्मिक महासम्मेलन

बैतूल आगमन पर राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का अत्यंत भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया। हेलीपैड पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उईके, राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, स्थानीय विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक सशक्तिकरण आत्म-विश्वास, आत्म-सम्मान, जागरूकता और दायित्व बोध से आता है।

राष्ट्रपति के संबोधन के मुख्य बिंदु:

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  • विकास और संस्कृति का संतुलन: उन्होंने कहा कि शाश्वत विकास वही है जो हमारी जड़ों को मजबूत रखते हुए भविष्य का मार्ग प्रशस्त करे।
  • 2047 का लक्ष्य: विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जुड़ना होगा।
  • प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता: जनजातीय समुदाय को प्रकृति का रक्षक बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी जीवनशैली पर्यावरण संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण है।

आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण की झलक

महासम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें बैतूल के स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत किए जा रहे कार्यों की सराहना की। रागी, कोदो-कुटकी जैसे श्री-अन्न से बने उत्पादों और भरेवा (डोकरा) शिल्प की उन्होंने विशेष प्रशंसा की और महिलाओं को आत्मनिर्भर भारत का स्तंभ बताया।

ओंकारेश्वर में दर्शन और सिकल सेल एनीमिया के विरुद्ध जंग

यात्रा के अगले चरण में राष्ट्रपति ने तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और भगवान शिव का अभिषेक कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर, राष्ट्रपति ने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1.32 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है और सिकल सेल कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति ने इस बीमारी के खात्मे के लिए जनजातीय क्षेत्रों में जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु की यह यात्रा आध्यात्मिक मूल्यों, सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक विकास का एक अनूठा संगम रही। उनके आगमन ने न केवल स्थानीय जनजातीय समुदायों में गर्व की भावना जगाई, बल्कि उन्हें विकसित भारत की यात्रा में पूर्ण भागीदारी के लिए प्रेरित भी किया।