पर्यावरण आर्थिक लेखांकन के लिए मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय अंतर्विभागीय समूह का गठन; प्राकृतिक संसाधनों और डेटा संकलन का बदलेगा ढांचा
भोपाल: प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में सतत विकास (Sustainable Development) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी नीतिगत निर्णय लिया है। राज्य शासन ने पर्यावरण सांख्यिकी की कार्य प्रणाली और अवधारणाओं के विकास तथा प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरण आर्थिक लेखों (Environmental Economic Accounting) के डेटा के सुगम आदान-प्रदान तथा संकलन कार्य में बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर्विभागीय समूह (Inter-Departmental Group) का गठन किया है।
इस नवनिर्मित अंतर्विभागीय समूह की कमान राज्य के मुख्य सचिव को सौंपी गई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार पर्यावरण और आर्थिक विकास के संतुलन को लेकर कितनी गंभीर है। यह समूह मध्य प्रदेश में प्राकृतिक संपदा के सही मूल्यांकन, डेटा अंतराल को पाटने और विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं के पारदर्शी आदान-प्रदान के लिए एक केंद्रीय तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
समिति का प्रशासनिक ढांचा: शीर्ष अधिकारियों और विशेषज्ञों का अनूठा समागम
पर्यावरण आर्थिक लेखांकन एक बेहद जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया है, जिसमें कृषि, जल, वन, खनिज और सांख्यिकी जैसे विविध क्षेत्रों के समन्वय की आवश्यकता होती है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन ने इस अंतर्विभागीय समूह में राज्य के लगभग सभी प्रमुख नीति-निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया है। समिति का स्वरूप इस प्रकार निर्धारित किया गया है:
समिति के प्रमुख सदस्य:
- अध्यक्ष: मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन
- कृषि उत्पादन आयुक्त
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव: किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव: वन विभाग
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव: जल संसाधन विभाग
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव: पर्यावरण विभाग
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव: खनिज साधन विभाग
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव: पशुपालन एवं डेयरी विभाग
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव: ऊर्जा विभाग
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव: उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग
- अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग
- प्रमुख सचिव / सचिव: मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग
- केंद्रीय प्रतिनिधित्व: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI), भारत सरकार के प्रतिनिधि
- विशेषज्ञ सदस्य: अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं सदस्य सचिव, मध्य प्रदेश जैव विविधता बोर्ड
- नियामक सदस्य: अध्यक्ष एवं सदस्य सचिव, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- सदस्य-सचिव: आयुक्त, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, मध्य प्रदेश
इस व्यापक प्रशासनिक ढांचे से स्पष्ट है कि यह समिति केवल एक सलाहकार निकाय नहीं होगी, बल्कि इसके पास राज्य की नीतियों में बदलाव करने और प्रशासनिक विभागों को सीधे निर्देशित करने की कार्यकारी शक्ति होगी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के प्रतिनिधि को शामिल करने से केंद्र और राज्य के बीच डेटा साझाकरण और राष्ट्रीय मानकों के पालन में गति आएगी।
अंतर्विभागीय समूह का मुख्य कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियां
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस समूह को व्यापक और स्पष्ट कार्यदेश (Terms of Reference) सौंपे गए हैं। समूह मुख्य रूप से निम्नलिखित पाँच स्तंभों पर केंद्रित होकर कार्य करेगा:
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विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना:
वर्तमान में पर्यावरण, वन, जल संसाधन और खनिज जैसे विभागों का डेटा अलग-अलग स्वरूपों में बिखरा हुआ है। यह समूह इन सभी विभागों के बीच एक सेतु का काम करेगा ताकि पर्यावरण से संबंधित सांख्यिकी कार्य को सुसंगत और एकीकृत बनाया जा सके। -
पर्यावरण सांख्यिकी लेखों का संकलन:
संयुक्त राष्ट्र के ‘सिस्टम ऑफ एनवायरमेंटल-इकोनॉमिक अकाउंटिंग’ (SEEA) के मानकों के अनुरूप मध्य प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों के भौतिक और मौद्रिक खाते तैयार किए जाएंगे। इसमें वनों का घनत्व, जल स्तर की स्थिति, वायु गुणवत्ता और खनिज संपदा का सटीक लेखा-जोखा रखा जाएगा। -
डेटा की उपलब्धता का आकलन और डेटा अंतराल (Data Gap) की पहचान:
यह समूह इस बात की गहन समीक्षा करेगा कि वर्तमान में पर्यावरण से संबंधित कौन सा डेटा उपलब्ध है और नीति निर्धारण के लिए किस प्रकार के डेटा की कमी है। इस डेटा अंतराल को चिह्नित कर उसे भरने के लिए व्यावहारिक उपायों और आधुनिक तकनीकों (जैसे सैटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग) की सिफारिश की जाएगी। -
संसाधन आवश्यकता और क्षमता विकास का आंकलन:
पर्यावरण लेखांकन के कार्यान्वयन के लिए राज्य के अधिकारियों और सांख्यिकीविदों को विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। समूह इसके लिए आवश्यक बजटीय संसाधनों, मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता विकास (Capacity Building) की आवश्यकताओं का खाका तैयार करेगा। -
क्षेत्रवार व्यवस्थित संधारण के लिए रोडमैप का सुझाव:
कृषि, ऊर्जा, खनन और वन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में हर विभाग अपनी वार्षिक योजनाओं में पर्यावरण सांख्यिकी लेखांकन को अनिवार्य रूप से शामिल करे।
अवधारणा को समझें: क्या है पर्यावरण आर्थिक लेखांकन (Environmental Economic Accounting)?
पारंपरिक रूप से किसी भी देश या राज्य की प्रगति का आकलन सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के आधार पर किया जाता है। लेकिन पारंपरिक जीडीपी में एक बड़ी विसंगति यह है कि यह आर्थिक गतिविधियों से होने वाले लाभ को तो जोड़ती है, लेकिन उस गतिविधि के कारण नष्ट हुए प्राकृतिक संसाधनों (जैसे जंगलों की कटाई, भूजल का दोहन, प्रदूषण) की लागत को शामिल नहीं करती।
पर्यावरण आर्थिक लेखांकन (EEA) इसी विसंगति को दूर करने का एक वैश्विक वैज्ञानिक ढांचा है। इसके तहत:
“प्राकृतिक संसाधनों को राज्य की ‘पूंजी’ (Natural Capital) माना जाता है। यदि कोई उद्योग करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा रहा है, लेकिन उससे निकलने वाला प्रदूषण नदियों को नष्ट कर रहा है, तो पर्यावरण आर्थिक लेखांकन के माध्यम से उस नुकसान का मौद्रिक और भौतिक मूल्यांकन किया जाता है। इसे ही ‘ग्रीन अकाउंटिंग’ या ‘हरित लेखांकन’ भी कहा जाता है।”
मध्य प्रदेश जैसे समृद्ध जैव विविधता और प्रचुर खनिज संसाधनों वाले राज्य के लिए यह व्यवस्था लागू करना बेहद क्रांतिकारी साबित होने वाला है। इससे राज्य की वास्तविक प्रगति की तस्वीर सामने आ सकेगी।
विभिन्न क्षेत्रों पर इस निर्णय का दूरगामी प्रभाव
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले इस समूह के निर्णयों से मध्य प्रदेश के कई प्रमुख आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा:
| विभाग/क्षेत्र | वर्तमान स्थिति/चुनौती | अंतर्विभागीय समूह के बाद संभावित सुधार |
|---|---|---|
| वन एवं जैव विविधता | वनों के रकबे की जानकारी तो है, लेकिन उनकी वास्तविक आर्थिक और पारिस्थितिक सेवा मूल्य का सटीक आकलन नहीं है। | मध्य प्रदेश जैव विविधता बोर्ड के समन्वय से वनों के कार्बन सिंक मूल्य और ऑक्सीजन उत्पादन का आर्थिक मूल्यांकन संभव होगा। |
| जल संसाधन | भूजल और सतही जल का अनियंत्रित दोहन, विभिन्न विभागों के पास अलग-अलग डेटा। | जल खातों (Water Accounts) का निर्माण होगा, जिससे यह पता चलेगा कि किस क्षेत्र में पानी का उपयोग टिकाऊ सीमा से अधिक हो रहा है। |
| खनिज साधन | खनन से राजस्व तो प्राप्त होता है, लेकिन जमीन के क्षरण और खनिजों के समाप्त होने की दर का आर्थिक संकलन कमजोर है। | गैर-नवीकरणीय संसाधनों के ह्रास (Depletion Accounts) का संधारण होगा, जिससे टिकाऊ खनन नीतियों को बल मिलेगा। |
| कृषि एवं पशुपालन | रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में आ रही गिरावट का सांख्यिकीय रिकॉर्ड सीमित है। | उद्यानिकी और कृषि विकास विभागों के समन्वय से सॉयल हेल्थ और एग्रो-इकोसिस्टम का लेखांकन किया जा सकेगा। |
डेटा संकलन की राह में चुनौतियाँ और समूह की कार्यनीति
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारना इतना आसान नहीं होगा। मुख्य सचिव के नेतृत्व वाले इस समूह के सामने पहली और सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न विभागों के पारंपरिक ढर्रे (Silos) को तोड़ना होगा। अमूमन देखा गया है कि एक विभाग अपना डेटा आसानी से दूसरे विभाग के साथ साझा नहीं करता। कमिश्नर, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय को सदस्य-सचिव मनोनीत करने का उद्देश्य यही है कि एक नोडल एजेंसी के माध्यम से डेटा के इस प्रवाह को सुगम बनाया जा सके।
दूसरी बड़ी चुनौती तकनीकी जनशक्ति की कमी है। पर्यावरण लेखांकन के लिए सांख्यिकीविदों के साथ-साथ पर्यावरणविदों, अर्थशास्त्रियों और रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञों के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। इसके लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मध्य प्रदेश जैव विविधता बोर्ड की तकनीकी क्षमताओं का पूरा उपयोग किया जाएगा। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किए जा रहे टूल्स और गाइडलाइंस को राज्य में लागू करने की जिम्मेदारी भी इस समूह की होगी।
मध्य प्रदेश की भावी हरित अर्थव्यवस्था की नींव
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतर्विभागीय समूह का गठन केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश को एक ‘हरित अर्थव्यवस्था’ (Green Economy) की ओर ले जाने का सुनियोजित रोडमैप है। आने वाले समय में जब इस समूह की सिफारिशों के आधार पर क्षेत्रवार पर्यावरण सांख्यिकी खाते व्यवस्थित रूप से संधारित होने लगेंगे, तब राज्य सरकार के पास बजट निर्माण और औद्योगिक निवेश को मंजूरी देने के लिए अधिक सटीक और वैज्ञानिक डेटा होगा।
यह पहल नीति-निर्माताओं को यह समझने में मदद करेगी कि आर्थिक विकास की वास्तविक कीमत क्या है और हम आने वाली पीढ़ियों के लिए किस प्रकार की प्राकृतिक विरासत छोड़ रहे हैं। मध्य प्रदेश शासन का यह निर्णय निश्चित रूप से देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बनेगा।















