मध्यप्रदेश वन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक: वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विस्तार पर जोर
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक को संबोधित किया। इस बैठक में प्रदेश की समृद्ध वन संपदा के संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी निर्णयों को मंजूरी दी गई।
प्राकृतिक धरोहर और भावी पीढ़ियों के प्रति संकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश की असली पहचान इसकी प्राकृतिक धरोहर, जैव विविधता और समृद्ध वन क्षेत्रों में निहित है। उन्होंने कहा कि जैविक एवं वानस्पतिक विविधताओं का संरक्षण केवल एक पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक दायित्व और संकल्प है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को वनों के विस्तार, सघन पौधरोपण और स्थानीय समुदायों की उनके रीति-रिवाजों के साथ भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
वन्य पर्यटन का होगा कायाकल्प
वन पर्यटन को आर्थिक और पर्यटन विकास का प्रमुख स्तंभ बताते हुए मुख्यमंत्री ने विभाग को इसके विस्तार हेतु सक्रिय कदम उठाने को कहा है।
- पर्यटक सुविधाएं: पर्यटकों के लिए सुविधाओं का दायरा बढ़ाया जाए।
- होम-स्टे: स्थानीय स्तर पर होम-स्टे जैसी व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि पर्यटक प्रकृति के और करीब आ सकें।
- सफारी विस्तार: पर्यटकों की संख्या को देखते हुए सफारी गाड़ियों के बेड़े में वृद्धि करने पर विचार किया जा रहा है।
वन्यजीव संरक्षण और अंतर-राज्यीय सहयोग
प्रदेश की जैव विविधता को और समृद्ध करने के लिए मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण आदान-प्रदान की प्रक्रिया को हरी झंडी दी है:
- आंध्रप्रदेश के साथ आदान-प्रदान: आंध्रप्रदेश सरकार के अनुरोध पर मध्यप्रदेश उन्हें बाघ और गौर (बाइसन) उपलब्ध कराएगा, जिसके बदले में राज्य सरकार वहां से वाइल्ड डॉग्स (ढोल) लाने के प्रयास करेगी।
- राजस्थान से सोन चिरैया: राजस्थान सरकार की सहमति के बाद प्रदेश में ‘सोन चिरैया’ लाई जाएगी, जिसे घाटीगांव और गांधीसागर के जंगलों में संरक्षित किया जाएगा।
- चीता प्रोजेक्ट: राज्य में चीतों के संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। जुलाई 2026 में गांधीसागर अभयारण्य में एक नर और एक मादा चीता छोड़े जाएंगे। सागर का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व प्रदेश में चीतों के लिए तीसरे घर के रूप में विकसित हो रहा है।
सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार
वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने कई कड़े कदम उठाने का अनुमोदन किया है:
- राज्य स्तरीय टास्क फोर्स: वन अपराधों को जड़ से खत्म करने के लिए ‘टाइगर स्ट्राइक फोर्स’ की तर्ज पर ‘राज्य स्तरीय टास्क फोर्स’ का गठन किया जाएगा।
- कमांड एंड कंट्रोल रूम: वन मुख्यालय स्तर पर अत्याधुनिक ‘कमांड एवं कंट्रोल रूम’ स्थापित किया जाएगा।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष: मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले संघर्ष को ‘राज्य आपदा’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन बल मिलकर प्रभावी कार्यवाही कर सकें।
जनजातीय समुदायों का विकास
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जंगल की सीमा में स्थित जनजातीय बंधुओं के देवस्थानों को उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप विकसित किया जाए। वर्तमान में 300 नए देवस्थानों को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पूर्व में 1421 देवस्थानों का कायाकल्प किया जा चुका है।
महत्वपूर्ण आंकड़े और भविष्य की योजनाएं
बैठक में विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:
- तेंदूपत्ता बोनस: वर्ष 2026 में 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ है, जिसके बदले संग्राहकों को 710.71 करोड़ रुपए की बोनस राशि वितरित की जाएगी।
- वन ग्राम: प्रदेश के 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया जारी है।
- साल बोरर आपदा: अनूपपुर और डिंडौरी के जंगलों में साल बोरर कीट के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बजट से प्रभावित वृक्षों के विदोहन का निर्णय लिया गया है।
- हाथी प्रबंधन: हाथियों के संरक्षण हेतु पश्चिम बंगाल से प्रशिक्षण के लिए टीम भेजी गई है और 6 हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति प्रदान की गई है।
बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव कौशलेंद्र विक्रम सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।














