
लोक सेवा में तैनात अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता: बर्नआउट रोकथाम के लिए विशेष ऑनलाइन सत्र का आयोजन
भोपाल: पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि जनसेवा में जुटे अधिकारियों का मानसिक स्वास्थ्य और उनकी भलाई सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सत्र ‘उच्च-तनाव वाली लोक सेवा भूमिकाओं में बर्नआउट की रोकथाम’ विषय पर केंद्रित था, जिसमें राज्य के 79 वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभागिता की।
अधिकारियों के कार्य-दबाव को समझना
प्रहलाद सिंह पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि विभागीय अधिकारी निरंतर भारी दबाव में काम करते हैं। लगातार बजते फोन, फाइलों का अंबार और दिनभर की भागदौड़ उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की कार्यक्षमता को सुदृढ़ करने के लिए कार्यस्थल पर तनाव से जुड़े फीडबैक तंत्र को लागू किया जाएगा, ताकि वे एक स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण में कार्य कर सकें।
बर्नआउट से बचने के वैज्ञानिक उपाय
सत्र का मुख्य संचालन आर्डेन विश्वविद्यालय, लंदन की व्याख्याता और स्वास्थ्य मनोविज्ञान विशेषज्ञ मुक्ति सिंह ठाकुर ने किया। उन्होंने एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि तनाव को केवल ‘हानिकारक’ मानना भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों में यह धारणा होती है कि तनाव उनकी सेहत बिगाड़ रहा है, उनमें मृत्यु का जोखिम 43 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इसके विपरीत, जो लोग तनाव को सकारात्मक या सामान्य रूप से स्वीकार करते हैं, उनमें ऐसा खतरा नहीं देखा गया।
30 सेकंड का ठहराव: एक प्रभावी तकनीक
मुक्ति सिंह ठाकुर ने तनाव प्रबंधन के लिए एक अत्यंत सरल और प्रभावी उपाय सुझाया। उन्होंने बताया कि किसी भी कठिन परिस्थिति में प्रतिक्रिया देने से पहले केवल 30 सेकंड का ठहराव लें। इस दौरान अपने आसपास की किसी साधारण वस्तु, जैसे छत का पंखा, खिड़की, या अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। यह संक्षिप्त अंतराल मस्तिष्क को सुरक्षित होने का संकेत देता है, जिससे ‘फाइट या फ्लाइट’ (झूठा अलार्म) बंद हो जाता है। लंबी सांस छोड़ने और धीमी गति से सांस लेने की यह प्राणायाम तकनीक रक्तचाप को तुरंत नियंत्रित करने में मदद करती है।
गंभीर स्वास्थ्य परिणामों के प्रति सचेत
विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि कार्यस्थल पर अनियंत्रित तनाव शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन हार्मोन का स्तर बढ़ा देता है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और टाइप-2 मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। आईसीएमआर-इण्डियाब अध्ययन (2023) का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या लगभग 10.1 करोड़ तक पहुँच चुकी है।
अत्यधिक तनाव न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि यह निर्णय लेने की क्षमता और याददाश्त को भी कमजोर करता है, जिससे अधिकारी गंभीर बर्नआउट की स्थिति में पहुँच जाते हैं। इस सत्र का उद्देश्य अधिकारियों को मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाना और उनके दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाना था, ताकि वे भविष्य में और अधिक ऊर्जा एवं स्पष्टता के साथ जनसेवा का कार्य कर सकें।















