समुद्र में गूंजेगा भारत का पराक्रम: नरेंद्र मोदी ने नौसेना को सौंपे तीन शक्तिशाली ‘मेड इन इंडिया’ युद्धपोत
कोलकाता: भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिहाज से आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर आयोजित एक गरिमामयी त्रि-कमीशनिंग (Tri-Commissioning) समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नौसेना के तीन अत्याधुनिक और स्वदेशी युद्धपोतों—आईएनएस दूनागिरी (INS Dunagiri), आईएनएस संशोधक (INS Sanshodhak) और आईएनएस अग्रेय (INS Agray) को देश की सेवा में समर्पित किया।
इस अभूतपूर्व अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित देश के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। भारतीय नौसेना के इतिहास में यह दूसरा ऐसा अवसर है जब तीन बड़े फ्रंटलाइन सैन्य प्लेटफॉर्म्स को एक साथ नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया है। इससे पहले जनवरी 2025 में मुंबई में ऐसा ही त्रि-कमीशनिंग समारोह आयोजित हुआ था।
— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
विकास, सुरक्षा और समृद्धि समुद्र से जुड़ी: नरेंद्र मोदी
समारोह को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और रक्षा विनिर्माण में ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि समुद्री क्षमताओं के बिना कोई भी राष्ट्र महाशक्ति नहीं बन सकता। भारत की आर्थिक प्रगति, सुरक्षा और वैश्विक समृद्धि सीधे तौर पर हिंद महासागर और व्यापक समुद्री रास्तों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
उन्होंने हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र में हुए नीतिगत सुधारों का जिक्र करते हुए बताया कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। आज देश में जहाज निर्माण, जहाजों की मरम्मत और एमआरओ (मैंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) को एक बड़े राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जा रहा है। बीते वर्षों में 40 से अधिक ‘मेड इन इंडिया’ युद्धपोत और पनडुब्बियां भारतीय नौसेना का हिस्सा बन चुकी हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक: MSMEs की बड़ी भूमिका
आज नौसेना में शामिल किए गए तीनों जहाजों को भारतीय नौसेना के ‘वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो’ और ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स’ (GRSE) द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है। इन जहाजों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग किया गया है।
इनके निर्माण में देश के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने सक्रिय भागीदारी निभाई है। इस प्रोजेक्ट ने न केवल देश की सामरिक शक्ति को बढ़ाया है, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का भी सृजन किया है। यह आत्मनिर्भर भारत की एक जीती-जागती तस्वीर है।
तीनों युद्धपोतों की ताकत और विशिष्टताएं
भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुए ये तीनों जहाज अलग-अलग भूमिकाओं में अचूक क्षमता रखते हैं। नौसेना नेतृत्व के अनुसार, यह बेड़ा समुद्री युद्ध, जल-सर्वेक्षण (Hydrographic Survey) और पनडुब्बी रोधी अभियानों में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रिम पंक्ति में खड़ा करेगा।
1. आईएनएस दूनागिरी (INS Dunagiri) – अचूक मारक क्षमता
आईएनएस दूनागिरी प्रोजेक्ट 17ए (Project 17A) के तहत निर्मित पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate) है। यह उन्नत हथियारों और सेंसर्स से लैस एक अत्याधुनिक युद्धपोत है।
- ब्रह्मोस मिसाइल: यह जहाज ब्रह्मोस सतह से सतह पर मार करने वाली खतरनाक मिसाइल प्रणाली से लैस है।
- हवाई सुरक्षा: इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) प्रणाली लगाई गई है, जो हवाई हमलों को नाकाम करने में सक्षम है।
- ब्लू-वाटर ऑपरेशंस: यह युद्धपोत गहरे समुद्र में लंबी दूरी के अभियानों को अंजाम देने और नौसेना की आक्रामक क्षमता को कई गुना बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।
2. आईएनएस संशोधक (INS Sanshodhak) – समुद्र का खोजी
आईएनएस संशोधक भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया गया चौथा बड़ा सर्वे वेसल (Survey Vessel Large) है। दिलचस्प बात यह है कि आज यानी 21 जून को ‘विश्व हाइड्रोग्राफी दिवस’ भी मनाया जा रहा है, और इसी विशेष दिन इस आधुनिक हाइड्रोग्राफिक जहाज को नौसेना में शामिल किया गया है।
- गहरे समुद्र का डेटा: यह तटीय और गहरे पानी में हाइड्रोोग्राफिक सर्वेक्षण करने के साथ-साथ सैन्य और नागरिक अनुप्रयोगों के लिए महासागरीय और भूभौतिकीय डेटा एकत्र करेगा।
- आधुनिक उपकरण: यह जहाज स्वायत्त अंडरवाटर वाहनों (Autonomous Underwater Vehicles) और रिमोटली ऑपरेटेड वाहनों (ROVs) जैसे अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है, जो समुद्र की गहराइयों में छिपे राज उजागर कर सकते हैं।
3. आईएनएस अग्रेय (INS Agray) – पनडुब्बियों का काल
आईएनएस अग्रेय अर्नाला क्लास का चौथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) है। इसे विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में दुश्मनों की चाल को नाकाम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
- पनडुब्बी रोधी क्षमता: यह तटीय और उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों और पानी के नीचे के खतरों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।
- स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर: यह हल्के वजन के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी के सोनार सिस्टम से पूरी तरह सुसज्जित है।
2026 में नौसेना का सबसे बड़ा विस्तार अभियान
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना ने वर्ष 2026 के भीतर कुल 19 युद्धपोतों को कमीशन करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह भारतीय नौसेना के इतिहास में किसी भी एक वर्ष में होने वाला सबसे बड़ा बेड़ा विस्तार (Force Accretion) है। पिछले 24 महीनों (जनवरी 2025 से दिसंबर 2026 तक) के दौरान कुल 33 जहाजों को बेड़े में शामिल किए जाने की योजना है। यह देश के घरेलू जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Shipbuilding Ecosystem) की अभूतपूर्व गति और आत्मनिर्भरता के संकल्प को दर्शाता है।
नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि भारत ने हमेशा से समुद्र को सहयोग और शांति का माध्यम माना है, लेकिन हम यह भी जानते हैं कि शांति की रक्षा के लिए शक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। समृद्धि की रक्षा के लिए सुरक्षा जरूरी है, और भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य शर्त है। आज का यह ऐतिहासिक समारोह इसी सोच का परिणाम है।









