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छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक उत्साह के साथ मनाया गया 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: अंबिकापुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हजारों नागरिकों के साथ किया योगाभ्यास






छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक उत्साह के साथ मनाया गया 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंबिकापुर में हजारों नागरिकों के साथ किया योगाभ्यास


योगमय जीवन, निरोगी तन: छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक उत्साह के साथ मनाया गया 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस; अंबिकापुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हजारों साधकों के साथ किया प्राणायाम और योगासन

प्रकाशित: 21 जून 2026
स्थान: अंबिकापुर (सरगुजा), छत्तीसगढ़
ब्यूरो: प्रदेश खबर नेटवर्क

अंबिकापुर/रायपुर: संपूर्ण विश्व के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ऐतिहासिक उत्साह, अभूतपूर्व जन-भागीदारी और भव्यता के साथ मनाया गया। इस वर्ष “स्वस्थ आयु के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing) के वैश्विक संदेश और थीम के तहत राज्य स्तरीय मुख्य और भव्य समारोह सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित किया गया। अंबिकापुर के विशाल कलाकेंद्र खेल मैदान में आयोजित इस वृहद और ऐतिहासिक योग शिविर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। सुबह की पहली किरण के साथ ही पूरा खेल मैदान योग साधकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और हजारों की संख्या में पहुंचे स्कूली बच्चों से पट गया था। मुख्यमंत्री ने जनसामान्य के साथ चटाई पर बैठकर पूरी तन्मयता से प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया और छत्तीसगढ़ को एक स्वस्थ, जागरूक और सशक्त राज्य बनाने का संकल्प दिलाया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश: ‘योग केवल व्यायाम नहीं, संतुलित जीवन जीने की भारतीय पद्धति’

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अलसुबह ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदेशवासियों और योग साधकों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मुख्यमंत्री ने योग को भारत की सनातन ऋषि परंपरा का एक अमूल्य उपहार बताते हुए इसके दर्शन को रेखांकित किया।

अपने एक अन्य विचारपूर्ण संदेश में मुख्यमंत्री ने योग की महत्ता को विस्तार देते हुए लिखा कि योग भारत की ऋषि परंपरा से उपजा वह अनुपम जीवन-दर्शन है, जो व्यक्ति को स्वयं से, अपनी अंतरात्मा से, प्रकृति से और परम चेतना से जोड़ने का वास्तविक मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योग केवल शरीर को भौतिक रूप से स्वस्थ रखने की कोई विधा या कसरत मात्र नहीं है, बल्कि यह संतुलित, अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की एक संपूर्ण भारतीय जीवन-पद्धति है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक से योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का अभिन्न और अनिवार्य अंग बनाने की अपील की, ताकि एक स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जा सके।

अंबिकापुर के खेल मैदान में उमड़ा जनसैलाब, सामूहिक चेतना का अनूठा दृश्य

सरगुजा जिला प्रशासन और आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में अंबिकापुर के शासकीय पीजी कॉलेज मैदान (कलाकेंद्र मैदान) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में व्यवस्थाएं बेहद चाक-चौबंद थीं। सुबह 6:00 बजे से ही लोग अनुशासित कतारों में मैदान में प्रवेश करने लगे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ सरगुजा क्षेत्र के स्थानीय विधायक, जनप्रतिनिधि, संभाग आयुक्त, महानिरीक्षक (आईजी), कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी योग मुद्राओं में नजर आए।

सामूहिक योगाभ्यास की शुरुआत राष्ट्रगीत और योग प्रार्थना के साथ हुई। इसके बाद निर्धारित सामान्य योग प्रोटोकॉल (Common Yoga Protocol) के अनुसार कुशल योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में उपस्थित जनसमूह ने शिथिलीकरण अभ्यास (Greeva Chalan, Skandha Chalan), खड़े होकर किए जाने वाले आसन (ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन), बैठकर किए जाने वाले आसन (भद्रासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, शशकासन, वक्रासन), पेट और पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन (भुजंगासन, शलभासन, मकरासन, सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन, शवासन) का क्रमबद्ध अभ्यास किया। इसके पश्चात कपालभाति, प्राणायाम (नाड़ीशोधन, भ्रामरी, शीतली) और ध्यान (Meditation) का अभ्यास किया गया, जिससे पूरा परिसर शांत और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया।

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इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी दिखी। एक तरफ जहां 5 वर्ष के बच्चों ने अपनी लचीली देह से कठिन आसनों का प्रदर्शन किया, वहीं 80 वर्ष तक के बुजुर्गों ने भी “स्वस्थ आयु के लिए योग” की थीम को चरितार्थ करते हुए पूरे उत्साह के साथ प्राणायाम किया। विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों और महिलाओं की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को समावेशी और प्रेरणादायक बना दिया।

“स्वस्थ आयु के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing) थीम पर विशेष ध्यान

इस वर्ष आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्य मंच से अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक युग में जैसे-जैसे जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह आवश्यक हो गया है कि हमारी बढ़ती उम्र स्वस्थ, सक्रिय और गरिमापूर्ण हो। योग वृद्धावस्था में होने वाली शारीरिक व्याधियों जैसे जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से मुक्ति दिलाने का सबसे सरल, सुलभ और प्राकृतिक माध्यम है। यदि युवावस्था से ही योग को जीवन में ढाल लिया जाए, तो बुढ़ापे में भी शरीर की आत्मनिर्भरता और मानसिक सजगता बनी रहती है।

योग से समृद्ध समाज की मजबूत आधारशिला

मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि एक स्वस्थ समाज ही एक समृद्ध और सशक्त राज्य का निर्माण कर सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) पर विशेष ध्यान दे रही है, और योग इसका सबसे प्रमुख स्तंभ है। जब राज्य का प्रत्येक नागरिक शारीरिक रूप से निरोगी और मानसिक रूप से शांत होगा, तब उसकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के विकास और प्रगति पर पड़ेगा।

ग्राम पंचायतों से लेकर जिला स्तर तक महा-अभियान: छत्तीसगढ़ ने रचा डिजिटल इतिहास

मुख्य सचिव विकासशील के कुशल मार्गदर्शन में इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित न रखकर छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों, गांवों और प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर तक ले जाने का व्यापक खाका तैयार किया गया था। शासन के निर्देशों के अनुरूप राज्य की सभी ग्राम पंचायतों, विकासखंडों, नगरीय निकायों, स्कूलों, कॉलेजों, ऐतिहासिक स्थलों और अमृत सरोवरों के तट पर सामूहिक योग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ में इस बार एक बड़ा डिजिटल रिकॉर्ड बनाने की भी तैयारी की गई थी। इसके अंतर्गत:

  • व्यापक डिजिटल पंजीयन: आम नागरिकों को योग से जोड़ने के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-315-7008 और आयुष मंत्रालय के योग संगम पोर्टल के माध्यम से लाखों नागरिकों ने अपना डिजिटल पंजीकरण कराया।
  • ऑनलाइन अभ्यास सत्र: 14 जून से ही लगातार सुबह ऑनलाइन योग अभ्यास सत्रों का संचालन किया जा रहा था, ताकि लोग सही मुद्राओं और प्रोटोकॉल से परिचित हो सकें। इस व्यापक अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने जन-भागीदारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
  • प्रशासनिक समन्वय: इस वर्ष योग दिवस के ही दिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जा रही नीट (NEET) की पुनः परीक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने बेहद सराहनीय कार्य किया। मुख्य सचिव के कड़े निर्देशों के बाद सभी कलेक्टर्स ने रूट डायवर्जन और सुरक्षा के ऐसे पुख्ता प्रबंध किए थे कि सुबह योग कार्यक्रमों के भव्य आयोजनों के बावजूद परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में किसी भी प्रकार की असुविधा या यातायात जाम का सामना नहीं करना पड़ा।

योग का जीवन-दर्शन और ऋषि परंपरा का गौरव

समाचार के इस विशेष खंड में योग के उन पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है, जिनका उल्लेख मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में किया है। योग केवल शारीरिक कसरत नहीं बल्कि जीवन को उन्नत बनाने का विज्ञान है। भारतीय जीवन-पद्धति में योग को अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि) के रूप में परिभाषित किया गया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, मानसिक अवसाद, और बदलती जीवनशैली के बीच योग एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से किए जाने वाले प्राणायाम से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सुधरता है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और तंत्रिका तंत्र शांत होता है। वहीं ध्यान के माध्यम से मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और कार्यस्थल पर तनाव प्रबंधन में अभूतपूर्व मदद मिलती है। छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में, जहां एक बड़ी आबादी ग्रामीण और जनजातीय अंचलों में निवास करती है, वहां पारंपरिक स्वास्थ्य प्रथाओं के साथ योग का यह समन्वय बेहद प्रासंगिक और कल्याणकारी सिद्ध हो रहा है।

समारोह का समापन और छत्तीसगढ़ का संकल्प

अंबिकापुर के खेल मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम का समापन विश्व शांति पाठ और सभी उपस्थित जनों द्वारा प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम की अभूतपूर्व सफलता के लिए सरगुजा संभाग के नागरिकों, विशेष रूप से ऊर्जावान स्कूली बच्चों, योग शिक्षिकाओं-शिक्षकों, स्वयंसेवी संगठनों और दिन-रात तैयारियों में जुटे जिला प्रशासन व आयुष विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई दी और उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

निश्चित रूप से, सरगुजा की पावन धरा अंबिकापुर से उठा यह योग का संदेश संपूर्ण छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में गूंजेगा और राज्य के नागरिकों को “स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन” की ओर अग्रसर होने की नई प्रेरणा देगा। छत्तीसगढ़ में मनाया गया यह 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस केवल एक दिवसीय उत्सव न रहकर, राज्य में स्वास्थ्य और चेतना की एक नई लहर की शुरुआत के रूप में याद रखा जाएगा।


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