भोपाल: नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल नबील ताउआती ने DGP कैलाश मकवाना से की भेंट, ‘सेफ क्लिक 2.0’ पर हुई चर्चा






भोपाल: नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल नबील ताउआती ने डीजीपी कैलाश मकवाना से की सौहार्दपूर्ण भेंट, साइबर सुरक्षा और ‘सेफ क्लिक 2.0’ पर हुई व्यापक चर्चा

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अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नई दिशा: नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल नबील ताउआती ने मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना से की शिष्टाचार भेंट; साइबर सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग के वैश्विक नवाचारों पर हुआ गहन मंथन

रिपोर्टर: प्रदेश खबर नेटवर्क
स्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश
दिनांक: 30 जून, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) में आज एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और प्रशासनिक संवाद देखने को मिला। नीदरलैंड के मुंबई स्थित कॉन्सुल जनरल (Consul General) नबील ताउआती ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना से शिष्टाचार भेंट की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच आधुनिक पुलिसिंग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा और सामुदायिक सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील और समसामयिक विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर कॉन्सुल जनरल के साथ मुंबई से आए वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार कौस्तुभ परिहार एवं कृषि सलाहकार प्रसाद पारते भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने चर्चा के विभिन्न आयामों में तकनीकी और आर्थिक परिप्रेक्ष्य को रेखांकित किया।

यह बैठक केवल एक शिष्टाचार मुलाकात तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने वैश्विक मानकों के अनुरूप पुलिसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा विभिन्न देशों के अनुभवों का लाभ उठाकर स्थानीय स्तर पर नागरिकों को अधिक सुरक्षित वातावरण प्रदान करने की दिशा में एक प्रभावी मंच के रूप में कार्य किया। पुलिस महानिदेशक कैलाशक मकवाना ने विदेशी कूटनीतिक प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें मध्य प्रदेश पुलिस की संगठनात्मक संरचना तथा हाल के वर्षों में किए गए युगांतरकारी सुधारों से अवगत कराया।

मध्य प्रदेश पुलिस के तकनीकी नवाचार और कानून-व्यवस्था सुदृढ़ीकरण पर विमर्श

संवाद की शुरुआत करते हुए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए लागू की गई अत्याधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रदेश पुलिस परंपरागत तरीकों से आगे निकलकर डेटा-संचालित और पूर्वानुमानित पुलिसिंग (Predictive Policing) को अपना रही है। भौगोलिक और जनसांख्यिकीय दृष्टि से विविधतापूर्ण होने के कारण मध्य प्रदेश में प्रत्येक क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की चुनौतियां अलग हैं, और पुलिस बल इन चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर तकनीकी कौशल का विकास कर रहा है।

डीजीपी ने कॉन्सुल जनरल को बताया कि थानों के डिजिटलीकरण, अपराध अनुसंधान में फोरेंसिक विज्ञान के बढ़ते उपयोग और त्वरित रिस्पॉन्स प्रणालियों (जैसे डायल-112 और डायल-100 का सुदृढ़ीकरण) के माध्यम से आम नागरिकों तक पुलिस सहायता पहुंचाने की समयावधि में भारी कमी आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस का मुख्य ध्येय ‘सज्जनों को सुरक्षा और दुर्जनों को भय’ का वातावरण प्रदान करना है, जिसमें तकनीक एक बड़े संवाहक के रूप में उभरकर सामने आई है।

मुख्य बिंदु: बैठक के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस और नीदरलैंड के प्रतिनिधिमंडल के बीच इस बात पर पूर्ण सहमति बनी कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भौगोलिक सीमाएं अपराधियों को नहीं रोक सकतीं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोत्तम अभ्यासों (Best Practices) का आदान-प्रदान और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय समय की सबसे बड़ी मांग है।

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‘सेफ क्लिक 2.0’: साइबर अपराधों के विरुद्ध मध्य प्रदेश पुलिस का महा-अभियान

चर्चा का एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा साइबर अपराधों की रोकथाम और डिजिटल सुरक्षा पर केंद्रित रहा। डीजीपी कैलाश मकवाना ने नीदरलैंड के कूटनीतिक दल के साथ मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा वर्तमान में संचालित राज्यव्यापी साइबर जन-जागरूकता अभियान ‘सेफ क्लिक 2.0’ (Safe Click 2.0) की विस्तृत रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि बदलते दौर में जहां डिजिटल तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, गेमिंग रिवॉर्ड स्कैम, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी लोन ऐप्स के माध्यम से डिजिटल ठगी का एक बड़ा तंत्र भी सक्रिय हुआ है।

इस अभियान के उद्देश्यों और रणनीतियों पर प्रकाश डालते हुए पुलिस महानिदेशक ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा:

  • व्यापक जन-भागीदारी और लक्षित समूह: ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के तहत केवल पुलिस बल ही सक्रिय नहीं है, बल्कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों जैसे स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, युवाओं, कामकाजी महिलाओं, गृहणियों और विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों तक पहुंच बनाई जा रही है, जो अक्सर इन अपराधियों के आसान शिकार बनते हैं।
  • शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार: प्रदेश भर के विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विशेष सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां पुलिस के साइबर विशेषज्ञ युवाओं को सुरक्षित ब्राउजिंग, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) की अनिवार्यता और सोशल मीडिया सुरक्षा के व्यावहारिक तरीके सिखा रहे हैं।
  • संस्थागत सुरक्षा ढांचा: विभिन्न वित्तीय और व्यावसायिक संस्थानों के साथ मिलकर डिजिटल लेन-देन को सुरक्षित बनाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पहचान करने के लिए तकनीकी प्रोटोकॉल मजबूत किए जा रहे हैं।
  • तत्काल रिस्पॉन्स मैकेनिज्म (हेल्पलाइन 1930): डीजीपी ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर शुरुआती समय (गोल्डन ऑवर) बेहद महत्वपूर्ण होता है। मध्य प्रदेश पुलिस नागरिकों को जागरूक कर रही है कि वे किसी भी फ्रॉड की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि ठगी गई राशि को बैंक खातों में ही होल्ड किया जा सके।

‘नशे से दूरी है जरूरी’: नशामुक्त और सुरक्षित समाज का संकल्प

साइबर सुरक्षा के साथ-साथ समाज को अंदर से खोखला कर रही मादक पदार्थों की समस्या पर भी बैठक में गंभीर विमर्श हुआ। डीजीपी कैलाश मकवाना ने प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी अभियान ‘नशे से दूरी है जरूरी’ की प्रगति रिपोर्ट साझा की। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक सामाजिक सुधारक की भूमिका में भी काम कर रही है।

इस अभियान के तहत मध्य प्रदेश पुलिस त्रिस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है:

  • कठोर प्रवर्तन (Enforcement): मादक पदार्थों के अवैध व्यापार, तस्करी के नेटवर्कों और अंतरराज्यीय कड़ियों को तोड़ने के लिए पुलिस खुफिया तंत्र को मजबूत कर बड़े तस्करों के खिलाफ लगातार कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई कर रही है।
  • पुनर्वास और परामर्श (Rehabilitation & Counseling): नशे की लत के जाल में फंस चुके युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संस्थाओं के समन्वय से नशामुक्ति केंद्रों और परामर्श सत्रों का संचालन किया जा रहा है।
  • जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता: ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। ग्राम रक्षा समितियों, मोहल्ला समितियों और स्थानीय खेल क्लबों के माध्यम से युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों और खेलों से जोड़ा जा रहा है ताकि वे नशे के दुष्प्रभावों से दूर रह सकें।

कॉन्सुल जनरल नबील ताउआती ने की सराहना, पारस्परिक सहयोग की जताई इच्छा

मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे इन अभूतपूर्व और चौतरफा प्रयासों को सुनने के बाद नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल नबील ताउआती ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और अभियानों की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा एक वैश्विक चुनौती है और मध्य प्रदेश पुलिस जिस जमीनी और व्यावहारिक स्तर पर जाकर नागरिकों, विशेषकर बच्चों और अभिभावकों को जागरूक कर रही है, वह अनुकरणीय है।

कॉन्सुल जनरल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलिसिंग के अनुभवों को साझा करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड में भी साइबर सुरक्षा और स्मार्ट पुलिसिंग को लेकर कई उन्नत प्रणालियां कार्यरत हैं। उन्होंने भविष्य में मध्य प्रदेश पुलिस और नीदरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों के बीच पारस्परिक संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी प्रशिक्षण और विशेष क्षमता संवर्धन (Capacity Building) कार्यक्रमों को और अधिक सुदृढ़ तथा संस्थागत बनाने की तीव्र इच्छा व्यक्त की।

भविष्य की राह और कूटनीतिक निष्कर्ष

इस उच्च स्तरीय शिष्टाचार भेंट का समापन अत्यंत सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुआ। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय में आयोजित इस बैठक को आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के संवादों से न केवल दो देशों के बीच प्रशासनिक समझ बढ़ती है, बल्कि जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े वैश्विक तकनीकी नवाचारों को स्थानीय स्तर पर लागू करने में भी मदद मिलती है।

मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा स्थापित यह कूटनीतिक समन्वय निश्चित रूप से आने वाले समय में प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के समतुल्य लाने, पुलिस बल के तकनीकी दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और नागरिकों को एक भयमुक्त, नशामुक्त तथा सुरक्षित डिजिटल व भौतिक वातावरण प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।