डॉक्टर्स डे विशेष: गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में चिकित्सकों का सम्मान; मानसिक सशक्तिकरण के लिए ‘शेयर एंड केयर’ और ‘ग्रीन एवं क्लीन परिसर’ अभियान का भव्य शुभारंभ
भोपाल। राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (जीएमसी) में चिकित्सकों के अप्रतिम योगदान को रेखांकित करने, उनके सम्मान और सबसे महत्वपूर्ण रूप से उनके मानसिक स्वास्थ्य को समर्पित एक विशेष और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी समारोह में चिकित्सा जगत से जुड़े पेशेवरों के कार्य-जीवन संतुलन, तनाव प्रबंधन और आत्म-देखभाल (सेल्फ-केयर) जैसे गंभीर विषयों पर गहन विमर्श किया गया। इसके साथ ही संस्थान के विद्यार्थियों और चिकित्सकों के समग्र विकास के लिए कई दूरगामी और अभिनव पहलों की शुरुआत की गई।
सर्वधर्म प्रार्थना और दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का गरिमामयी आगाज़
गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात चिकित्सक भानु दुबे रहे। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ तृप्ति सक्सेना के स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। इसके बाद परिसर में उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों, चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने सर्वधर्म प्रार्थना में भाग लिया। पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ ही कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसने पूरे माहौल को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। स्वागत भाषण के दौरान संस्थान की गौरवशाली परंपरा और चिकित्सा क्षेत्र में यहां के डॉक्टरों के योगदान को याद किया गया।
अधिष्ठाता कविता एन. सिंह का संबोधन: चिकित्सकों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य-जीवन संतुलन पर विशेष बल
कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए गांधी चिकित्सा महाविद्यालय की अधिष्ठाता (डीन) कविता एन. सिंह ने एक बेहद संवेदनशील और समसामयिक विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने अपने संबोधन में चिकित्सकों के मानसिक स्वास्थ्य, उनके कार्य-जीवन संतुलन (वर्क-लाइफ बैलेंस) और आत्म-देखभाल के महत्व पर विशेष बल दिया।
कविता एन. सिंह ने कहा कि चिकित्सक दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, जिससे वे अक्सर अत्यधिक मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। एक स्वस्थ समाज का निर्माण तभी संभव है जब हमारे चिकित्सक स्वयं मानसिक और शारीरिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ और सशक्त हों। इसलिए चिकित्सा शिक्षा और अभ्यास के दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना समय की सबसे बड़ी मांग है।
“डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों पर काम का भारी दबाव होता है। उनके मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना और उन्हें एक ऐसा वातावरण देना जहां वे अपनी भावनाएं साझा कर सकें, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” – कविता एन. सिंह, अधिष्ठाता, जीएमसी
विद्यार्थियों के मानसिक सशक्तिकरण के लिए “शेयर एंड केयर” और “मेंटर-मेंटी” योजना शुरू
चिकित्सा महाविद्यालय के विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें शैक्षणिक व व्यक्तिगत स्तर पर सहयोग प्रदान करने के लिए अधिष्ठाता ने दो अत्यंत महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की घोषणा की और उन्हें धरातल पर उतारा:
- “शेयर एंड केयर” (Share & Care) पहल: यह कार्यक्रम महाविद्यालय के सभी विद्यार्थियों के समग्र विकास और मानसिक सशक्तिकरण के लिए शुरू किया गया है। इसके तहत छात्र-छात्राएं बिना किसी संकोच के अपने मन की बात, तनाव और समस्याओं को साझा कर सकेंगे, जिसका विशेषज्ञ परामर्शदाताओं के माध्यम से समाधान किया जाएगा।
- मेंटर-मेंटी (Mentor-Mentee) कार्यक्रम: यह विशेष रूप से स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) के विद्यार्थियों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अंतर्गत वरिष्ठ प्राध्यापक और अनुभवी चिकित्सक जूनियर विद्यार्थियों के मेंटर (मार्गदर्शक) बनेंगे, जो उन्हें पढ़ाई, करियर और व्यक्तिगत जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली और अनुसंधान में जीएमसी ने गाड़े झंडे
संस्थान में शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाने और प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए अधिष्ठाता कविता एन. सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों के कल्याण हेतु अधोसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) का लगातार विकास किया जा रहा है। परिसर में अनुशासन, समयबद्धता और पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को कड़ाई से लागू किया जा रहा है।
चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान (रिसर्च) को सुदृढ़ करने के संबंध में उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि साझा की। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय की:
- एमईयू (Medical Education Unit – MEU)
- एमआरयू (Multidisciplinary Research Unit – MRU)
इन दोनों महत्वपूर्ण इकाइयों ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय और उत्कृष्ट उपलब्धियां अर्जित की हैं। इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल चिकित्सा जगत में संस्थान का गौरव बढ़ाया है, बल्कि मध्य प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा को भी राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दी है।
“ग्रीन एवं क्लीन जीएमसी परिसर” अभियान का भव्य आगाज़: ली गई सुरक्षा की शपथ
डॉक्टर्स डे के इस पावन अवसर को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए अधिष्ठाता कविता एन. सिंह ने महाविद्यालय में “ग्रीन एवं क्लीन जीएमसी परिसर” अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अभियान के तहत पूरे मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि, सभी चिकित्सकों, संकाय सदस्यों, सीनियर व जूनियर रेजिडेंट्स, विद्यार्थियों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने परिसर को पूरी तरह से स्वच्छ, हरित (ग्रीन) और सुरक्षित बनाए रखने की सामूहिक शपथ ली। यह अभियान केवल एक दिन का सांकेतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक जन-आंदोलन बनेगा।
01 जुलाई से 2 अक्टूबर तक चलेंगे विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह विशेष स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण अभियान 01 जुलाई से शुरू होकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 02 अक्टूबर तक निरंतर जारी रहेगा। इस तीन महीने लंबी अवधि के दौरान परिसर में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निम्नलिखित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा:
- विभिन्न खेल और कला प्रतियोगिताएं
- साप्ताहिक सघन स्वच्छता अभियान
- प्लास्टिक मुक्ति और वृक्षारोपण गतिविधियां
- आम जनता और मरीजों के परिजनों के लिए जागरूकता कार्यक्रम
“बिहाइंड द मास्क: हू हील्स द हीलर!” नाटक ने दर्शकों को किया भावुक
समारोह में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के एमबीबीएस (MBBS) के छात्र-छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का लोहा मनवाया। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से डॉक्टरों के जीवन के अनछुए पहलुओं, उनकी पीड़ा और उनकी मानसिक स्थिति को अत्यंत प्रभावी ढंग से मंच पर जीवंत किया।
छात्रों द्वारा प्रस्तुत “हीलिंग हार्मनी” समूहगान ने जहां ऑडिटोरियम में उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं उनके द्वारा अभिनीत नाटक “बिहाइंड द मास्क: हू हील्स द हीलर!” (Behind the Mask: Who Heals the Healer!) ने हर आंख को नम कर दिया। इस नाटक में दिखाया गया कि जो डॉक्टर दिन-रात दूसरों का इलाज कर उन्हें जीवनदान देता है, मुस्कुराते हुए चेहरे के पीछे वह स्वयं कितने मानसिक तनाव, पारिवारिक अलगाव और सामाजिक अपेक्षाओं के बोझ से दबता है। नाटक ने संदेश दिया कि समाज को चिकित्सकों के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि भानु दुबे का संदेश: उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला है डॉक्टरों का मानसिक स्वास्थ्य
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भानु दुबे ने अपने संबोधन में नाटक और छात्र-छात्राओं के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि “बिहाइंड द मास्क” नाटक ने आज के दौर की सबसे कड़वी सच्चाई को उजागर किया है। उन्होंने डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य को उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की असली आधारशिला बताया।
भानु दुबे ने युवा डॉक्टरों और रेजिडेंट्स से संवाद करते हुए कहा कि जब तक आप स्वयं अंदर से शांत और स्वस्थ नहीं होंगे, तब तक आप मरीजों को सर्वश्रेष्ठ इलाज नहीं दे सकते। उन्होंने सभी से नियमित रूप से योग, ध्यान और आत्म-देखभाल (सेल्फ-केयर) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेता छात्र मंच पर हुए सम्मानित
इस विशेष अवसर पर महाविद्यालय में पूर्व में आयोजित की गई रचनात्मक फोटोग्राफी प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा की गई और विजेताओं को मुख्य अतिथि एवं अधिष्ठाता द्वारा मंच पर मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। विजेताओं की सूची इस प्रकार है:
| स्थान (Rank) | विजेता छात्र का नाम | प्रतियोगिता का नाम |
|---|---|---|
| प्रथम स्थान (First) | अश्विनी बड़ेतिया | फोटोग्राफी प्रतियोगिता, जीएमसी भोपाल |
| द्वितीय स्थान (Second) | आदर्श गुप्ता | फोटोग्राफी प्रतियोगिता, जीएमसी भोपाल |
| तृतीय स्थान (Third) | राहुल शाह | फोटोग्राफी प्रतियोगिता, जीएमसी भोपाल |
माउंट आबू से पधारे बीके कमल ने दिए तनाव प्रबंधन के अद्भुत गुरुमंत्र
चिकित्सकों और चिकित्सा छात्रों को व्यावहारिक रूप से तनाव से मुक्त करने के लिए कार्यक्रम में आध्यात्मिक और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ को आमंत्रित किया गया था। सुदूर माउंट आबू से विशेष रूप से पधारे बीके कमल ने ‘मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन’ विषय पर एक अत्यंत प्रेरणादायक व्याख्यान दिया।
उन्होंने अपने व्याख्यान में बहुत ही सरल शब्दों में समझाया कि किस प्रकार विचारों को नियंत्रित करके और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर कार्यस्थल पर होने वाले बड़े से बड़े तनाव को भी समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को राजयोग और ध्यान का संक्षिप्त अभ्यास भी कराया, जिससे पूरा सभागार शांति और सकारात्मकता के माहौल में डूब गया।
हमीदिया अस्पताल प्रबंधन सहित संपूर्ण चिकित्सा महाविद्यालय परिवार रहा मौजूद
इस भव्य और उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय और उससे संबद्ध हमीदिया अस्पताल भोपाल का पूरा प्रबंधन और स्टाफ एकजुट नजर आया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक सुनीत टंडन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
उनके साथ ही चिकित्सा महाविद्यालय के समस्त विभागों के विभागाध्यक्ष (HoDs), वरिष्ठ संकाय सदस्य, विशेषज्ञ चिकित्सक, जूनियर और सीनियर रेजिडेंट्स डॉक्टर, छात्र संघ के सक्रिय सदस्य वैभव सेठिया सहित भारी संख्या में स्नातक (MBBS) एवं स्नातकोत्तर (MD/MS) के छात्र-छात्राएं और पैरामेडिकल व गैर-प्रशासकीय कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी का आभार व्यक्त किया गया और डॉक्टरों के कल्याण के लिए इस तरह के आयोजनों को भविष्य में भी निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया।













