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MP PWD Rent Car Scam: 50 लीटर के टैंक में 55 लीटर फ्यूल! RTI में बड़ा खुलासा, पूर्व ENC की 67 करोड़ की संपत्ति कुर्क






MP PWD Rent Car Scam: 50 लीटर के टैंक में 55 लीटर फ्यूल! मध्य प्रदेश PWD में RTI से बड़ा खुलासा, पूर्व ENC की 67 करोड़ की संपत्ति कुर्क


50 लीटर का टैंक, फ्यूल भरा 52 लीटर: RTI में PWD की रेंटेड कार नीति की खुली पोल; तत्कालीन मंत्री को भी दी गाड़ी, पूर्व अफसर की 67 करोड़ की संपत्ति कुर्क

ब्यूरो रिपोर्ट, भोपाल | अपडेटेड: 2 जुलाई, 2026

भोपाल: मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में किराए की टैक्सी गाड़ियों के उपयोग और ईंधन खर्च को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सरकारी दस्तावेजों से सामने आया है कि विभाग में नियमों को ताक पर रखकर न सिर्फ वाहनों का वीआईपी आवंटन किया गया, बल्कि कागजों पर गाड़ियों के ईंधन टैंक की क्षमता से भी अधिक डीजल-पेट्रोल भरवाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

इस प्रशासनिक अनियमितता के बीच एक और बड़ी खबर लोक निर्माण विभाग से जुड़ी सामने आई है, जहाँ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए PWD के पूर्व इंजीनियर इन चीफ (ENC) गोविंद प्रसाद मेहरा और उनके परिजनों की लगभग 67.25 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति को कुर्क (Provisionally Attach) कर लिया है।

RTI की फाइलों से निकला अजूबा: जिस गाड़ी के फ्यूल टैंक की कुल क्षमता ही 50 लीटर है, सरकारी रिकॉर्ड में उसमें हर बार 52 से 55 लीटर तक ईंधन भराने का दावा किया गया है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर तीखे सवाल दागे हैं।

नियमों को ताक पर रखकर वाहनों का रेवड़ी की तरह आवंटन

कांग्रेस नेता भूपेन्द्र गुप्ता द्वारा आरटीआई के माध्यम से निकाले गए दस्तावेजों के अनुसार, 13 जून 2023 को पीडब्ल्यूडी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर टैक्सी वाहन आवंटित किए थे। नियमों के मुताबिक, वाहनों का आवंटन केवल पात्रता वाले पदों के लिए ही होना चाहिए, लेकिन यहाँ हर स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई।

दस्तावेजों के मुताबिक, प्रमुख अभियंता (भवन) कार्यालय के लिए अकेले 11 कारें आवंटित की गई थीं। इसके अलावा मुख्य अभियंता (भवन) के लिए चार, मुख्य वास्तुविद कार्यालय के लिए चार, कार्यपालन यंत्री (भवन) के लिए पांच और मंत्रालय के लिए दो कारें आवंटित की गई थीं। हद तो तब हो गई जब विभाग ने पात्रता न होने के बावजूद सब इंजीनियर स्तर के अधिकारियों को भी चमचमाती कारें किराए पर लेकर दे दीं।

दूसरे विभागों और मंत्रियों पर मेहरबान हुआ PWD

आरटीआई के खुलासे से यह गंभीर सवाल भी खड़ा हुआ है कि जब मध्य प्रदेश शासन के सभी विभाग अपने स्तर पर टैक्सी वाहन किराए पर लेने के लिए स्वतंत्र हैं और उनके पास अलग से बजट और टेंडर की व्यवस्था होती है, तो पीडब्ल्यूडी दूसरे विभागों पर क्यों मेहरबान हो रहा था?

दस्तावेजों के अनुसार, पीडब्ल्यूडी ने अपने कोटे से एक स्कॉर्पियो और एक बोलेरो गाड़ी सतपुड़ा भवन स्थित अनुसूचित जनजाति (ट्राइबल) कल्याण विभाग के अधिकारियों को आवंटित कर दी।

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सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूखदारों को भी नियम विरुद्ध गाड़ियां बांटी गईं। पीडब्ल्यूडी ने तत्कालीन राज्यमंत्री सुरेश धाकड़ के लिए एक लग्जरी इनोवा क्रिस्टा कार किराए पर ली थी। कांग्रेस का आरोप है कि जब मंत्रियों को सरकारी नियमों के तहत ‘स्टेट गैरेज’ से वाहन आवंटित किए जाते हैं, तो फिर पीडब्ल्यूडी ने अलग से सरकारी पैसे पर एक और इनोवा क्रिस्टा किराए पर क्यों ली? यह सीधे तौर पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन है।

वाहन आवंटन की पूरी गणित: एक नज़र में

कार्यालय / अधिकारी आवंटित वाहनों की संख्या / प्रकार विभाग जिसके द्वारा खर्च उठाया गया
प्रमुख अभियंता (भवन) कार्यालय 11 कारें PWD (लोक निर्माण विभाग)
मुख्य अभियंता (भवन) 04 कारें PWD (लोक निर्माण विभाग)
मुख्य वास्तुविद कार्यालय 04 कारें PWD (लोक निर्माण विभाग)
कार्यपालन यंत्री (भवन) 05 कारें PWD (लोक निर्माण विभाग)
मंत्रालय 02 कारें PWD (लोक निर्माण विभाग)
अनुसूचित जनजाति विभाग (अफसर) 01 स्कॉर्पियो और 01 बोलेरो PWD द्वारा किराए पर लेकर दी गई
तत्कालीन राज्यमंत्री सुरेश धाकड़ 01 इनोवा क्रिस्टा PWD द्वारा किराए पर लेकर दी गई
सब इंजीनियर (पात्रता नहीं) कार आवंटित PWD (लोक निर्माण विभाग)

दूसरी तरफ PWD के पूर्व शीर्ष अफसर पर ED का बड़ा चाबुक

एक तरफ जहाँ विभाग में किराए की गाड़ियों का खेल चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुँचते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश में बड़ी कार्रवाई की है। ED के भोपाल जोनल ऑफिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में PWD के पूर्व इंजीनियर इन चीफ (ENC) गोविंद प्रसाद मेहरा और उनके परिवार के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने पीएमएलए (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए गोविंद प्रसाद मेहरा की 67.25 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति को कुर्क कर लिया है। (इस कार्रवाई के तहत आबकारी विभाग के पूर्व अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया की संपत्ति मिलाकर कुल कार्रवाई 85.45 करोड़ रुपए की है, जिसमें से अकेले 67.25 करोड़ रुपए की संपत्ति पूर्व ईएनसी मेहरा की है)।

यह पूरा मामला सबसे पहले लोकायुक्त पुलिस (SPE) भोपाल द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद सामने आया था। जांच में पाया गया कि सेवाकाल के दौरान गोविंद प्रसाद मेहरा की वैध आय केवल 4 करोड़ रुपए के आसपास थी, जबकि उनके पास से 10 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां और खर्च पाए गए थे, जो उनकी वैध आय से 150 प्रतिशत से भी अधिक थे। बाद में जब मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ED ने जांच संभाली, तो बेनामी संपत्तियों का एक विशाल साम्राज्य खुलकर सामने आया।

आलीशान रिसॉर्ट, सोना और मिला था 17 टन शहद

पूर्व ईएनसी के ठिकानों पर जब शुरुआती दौर में छापे मारे गए थे, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए थे। भोपाल स्थित आलीशान अपार्टमेंट्स के अलावा नर्मदापुरम (सोहागपुर) के सैनी गांव में लगभग 70 से 72 एकड़ भूमि पर फैला ‘कस्तूरी कृषि फार्म’ मिला, जिसे एक बेहद महंगे लग्जरी फार्म-रिसॉर्ट के रूप में विकसित किया गया था। इस फार्म में प्रीमियम कॉटेज, कृत्रिम जलाशय और बेहतरीन बुनियादी ढांचा तैयार किया गया था, जिसकी बाजार कीमत ही करीब 50 करोड़ रुपए आंकी गई है।

इसके अलावा छापों के दौरान 3.51 करोड़ रुपए से अधिक का सोना-चांदी, लाखों की नकदी, चार लग्जरी गाड़ियां (एंडेवर, स्लाविया, सोनेटा, सियाज) और एक पीवीसी पाइप फैक्ट्री का पता चला था। सबसे अनोखा खुलासा इसी कस्तूरी फार्म हाउस से हुआ था, जहाँ भारी मात्रा में (करीब 17 टन) शहद बैरलों में भरकर रखा गया था।

पीडब्ल्यूडी विभाग के भीतर रेंटेड कारों में ईंधन का यह फर्जीवाड़ा और शीर्ष स्तर पर बैठे पूर्व अधिकारियों के घर से निकल रही करोड़ों की काली कमाई यह बताने के लिए काफी है कि विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी थीं। फिलहाल कांग्रेस इन दोनों ही मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है।


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