ग्वालियर में शिक्षिका से 3.05 लाख की हाईटेक ठगी: मोबाइल हैक कर शातिरों ने बैंक खाते से उड़ाई रकम, स्टेटमेंट देखने पर उड़ा होश; 1930 पोर्टल पर शिकायत दर्ज
मुख्य बिंदु: मोबाइल फोन हैक कर बिना किसी ओटीपी या मैसेज के खाते से निकाली गई राशि। पीड़िता ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई एफआईआर।
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक निजी स्कूल में पदस्थ महिला शिक्षिका के मोबाइल फोन को रिमोटली हैक कर साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से धीरे-धीरे कर 3 लाख 5 हजार रुपए की बड़ी रकम पार कर दी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी ठगी के दौरान पीड़िता को भनक तक नहीं लगी। जब शिक्षिका ने अपना बैंक अकाउंट स्टेटमेंट चेक किया, तब जाकर उन्हें इस भारी-भरकम धोखाधड़ी का पता चला। आनन-फानन में पीड़िता ने भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (National Cyber Crime Portal) की हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस की तकनीकी विंग मामले की तफ्तीश में जुट गई है।
अकाउंट चेक करने पर हुआ सनसनीखेज खुलासा
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, फरियादिया नीतू मिश्रा ग्वालियर के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। उनका एक बचत खाता बैंक ऑफ महाराष्ट्र की आदर्श कॉलोनी स्थित शाखा में है। बीते 14 जून को दोपहर करीब 1:57 बजे नीतू मिश्रा ने सामान्य प्रक्रिया के तहत अपने मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन के जरिए खाते का बैलेंस और पुराना स्टेटमेंट चेक किया। जैसे ही उन्होंने स्टेटमेंट स्क्रीन पर देखा, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके खाते से पिछले कई दिनों के भीतर अलग-अलग तारीखों में हजारों रुपए की ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जा चुकी थी, जबकि उन्होंने खुद ऐसा कोई वित्तीय लेन-देन नहीं किया था और न ही उनके पास कोई अलर्ट मैसेज आया था।
टुकड़ों में निकाली गई रकम: तारीख-दर-तारीख ठगी का ब्योरा
साइबर अपराधियों ने बेहद शातिर तरीके से बैंक और पीड़िता की नजरों से बचने के लिए एक ही बार में मोटी रकम निकालने के बजाय टुकड़ों में ट्रांजेक्शन किए। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाते से निम्नलिखित तारीखों को अवैध रूप से राशि ट्रांसफर की गई:
| क्र.सं. | ट्रांजेक्शन की तारीख | निकाली गई अवैध राशि (रुपए में) |
|---|---|---|
| 1 | 02 जून | 85,000 /- |
| 2 | 04 जून | 5,000 /- |
| 3 | 05 जून | 5,000 /- |
| 4 | 06 जून | 5,000 /- |
| 5 | 07 जून | 95,000 /- |
| 6 | 08 जून | 40,000 /- |
| 7 | 10 जून | 25,000 /- |
| 8 | 14 जून | 45,000 /- |
| कुल ठगी गई राशि | 3,05,000 /- | |
बिना ओटीपी और बिना मैसेज के मोबाइल कैसे हुआ हैक?
पीड़िता नीतू मिश्रा का आरोप है कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति के साथ अपना बैंक अकाउंट नंबर, डेबिट कार्ड की जानकारी, नेट बैंकिंग का पासवर्ड या कोई भी वन टाइम पासवर्ड (OTP) साझा नहीं किया था। साइबर विशेषज्ञों का अनुमान है कि ठगों ने शिक्षिका के मोबाइल फोन में किसी संदिग्ध लिंक, फर्जी एपीके (APK) फाइल या किसी अनधिकृत स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए मैलवेयर (सॉफ्टवेयर वायरस) डाल दिया था। मोबाइल पूरी तरह हैक होने के बाद अपराधियों ने पीड़िता के टेक्स्ट मैसेज इनबॉक्स का एक्सेस भी ब्लॉक कर दिया था, जिससे बैंक से पैसे कटने के रीयल-टाइम अलर्ट मैसेज शिक्षिका तक पहुंच ही नहीं पाए और अपराधी लगातार 12 दिनों तक खाते से पैसे निकालते रहे।
साइबर सेल और पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने अज्ञात डिजिटल डकैतों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत धोखाधड़ी का मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में उन बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स (UPI/Wallets) को ट्रैक किया जा रहा है, जिनमें यह राशि ट्रांसफर की गई है। इसके साथ ही, वारदात के समय इस्तेमाल किए गए आईपी एड्रेस (IP Address) और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लोकेशन खंगाली जा रही है ताकि गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके।
“डिजिटल युग में वित्तीय सुरक्षा बेहद जरूरी है। यदि आप भी किसी ऐसी धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो बिना समय गंवाए तत्काल गोल्डन आवर्स (शुरुआती 1-2 घंटे) के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें ताकि ठगी गई रकम को संबंधित बैंक स्तर पर ही होल्ड (फ्रीज) कराया जा सके।” – साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स
भविष्य में ऐसे साइबर हमलों से खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
ग्वालियर की इस घटना ने साफ कर दिया है कि अब ठग केवल ओटीपी मांगकर ही नहीं, बल्कि आपके फोन को दूर बैठे रिमोट कंट्रोल पर लेकर भी निशाना बना सकते हैं। ऐसे हमलों से बचने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- अज्ञात लिंक्स पर क्लिक न करें: व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल पर आने वाले किसी भी लॉटरी, बिजली बिल अपडेट या नौकरी के लुभावने लिंक्स पर कभी क्लिक न करें।
- थर्ड पार्टी ऐप्स से बचें: गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर के अलावा किसी भी अन्य वेबसाइट या अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई एपीके (APK) फाइल डाउनलोड न करें।
- स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स पर नियंत्रण: AnyDesk, TeamViewer या RustDesk जैसे ऐप्स किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में इंस्टॉल न करें। यह आपके फोन का पूरा कंट्रोल दूसरों को दे देते हैं।
- नियमित रूप से चेक करें बैंक बैलेंस: अपने बैंक खातों के स्टेटमेंट को हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर चेक करें, भले ही आपको कोई मैसेज मिला हो या न मिला हो।













