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सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी पर सीएम मोहन यादव सख्त, मंत्रालय में बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य






भोपाल समाचार: सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी पर सीएम मोहन यादव सख्त, केन-मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना पर यूपी सरकार के साथ होगी बड़ी बैठक


देर से दफ्तर आने वालों पर एक्शन लेगी सरकार: मुख्यमंत्री बोले- अधिकारी समय पर ऑफिस आएं, केन-मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना पर उत्तर प्रदेश सरकार से होगी बैठक

स्थान: भोपाल (मध्य प्रदेश)
श्रेणी: प्रशासनिक, विकास एवं सुशासन

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार अब शासकीय कार्यालयों में समय की पाबंदी और अनुशासन को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। राज्य मंत्रालय में आयोजित विभिन्न विभागों की समसामयिक और महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शासकीय कामकाज में किसी भी तरह की ढिलाई या लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सुशासन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में अनिवार्य रूप से बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

कार्यालयीन समय का सख्ती से हो पालन: मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश

समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब राज्य सरकार ने कार्यदिवस में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में उपस्थित रहने की व्यवस्था निर्धारित कर दी है, तो उसका धरातल पर सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक कसावट पर जोर देते हुए कहा कि राज्य मंत्रालय सहित प्रमुख प्रशासनिक भवनों जैसे विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति और रवानगी दर्ज करने के लिए आधुनिक बायोमेट्रिक अटेंडेंस की सुदृढ़ व्यवस्था बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि बार-बार निर्देशों के बाद भी कोई नियमों का उल्लंघन करता है या समय की पाबंदी का पालन नहीं करता है, तो आवश्यकता पड़ने पर ऐसे लेटलतीफ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई भी की जानी चाहिए। उन्होंने सुशासन का मूल मंत्र देते हुए कहा कि आम जनता के कार्यों में समय पर उपस्थिति न होने के कारण कोई व्यवधान नहीं आना चाहिए।

मुख्यमंत्री का संदेश: “समय की पाबंदी की शुरुआत सबसे पहले वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं से करनी चाहिए। जब वरिष्ठ अधिकारी समय पर कार्यालय उपस्थित होकर आदर्श प्रस्तुत करेंगे, तभी उनके अधीनस्थ कर्मचारी भी प्रेरित होंगे। सभी वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थों की नियमित मॉनिटरिंग करें और यह सुनिश्चित करें कि हर काम समय-सीमा में पूरा हो।”

केन-मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना: उत्तर प्रदेश सरकार के साथ जल्द होगी बैठक

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में जल संकट को दूर करने तथा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री ने केन-मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बैठक में बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह से सहमत है। इस अंतर-राजकीय जल परियोजना को अंतिम रूप देने और तकनीकी पहलुओं को सुलझाने के लिए बहुत जल्द ही दोनों राज्यों के शीर्ष अधिकारियों और मुख्यमंत्रियों के बीच एक उच्च स्तरीय संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक के बाद परियोजना के मैदानी कार्यों की रूपरेखा तय हो जाएगी, जिससे बुंदेलखंड और आसपास के क्षेत्रों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।

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धार्मिक पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं का कायाकल्प

धार्मिक स्थलों के समग्र विकास और वहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं को बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट के विकास कार्यों की विशेष तौर पर समीक्षा की और निर्देश दिए कि क्षेत्र की सभी विकास परियोजनाओं में अभूतपूर्व तेजी लाई जाए।

बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश निम्नलिखित हैं:

  • चित्रकूट विकास: सती अनुसुईया मंदिर परिसर, मल्टी फैसिलिटी सेंटर और गुप्त गोदावरी मंदिर परिसर के निर्माण कार्यों को बिना किसी देरी के शीघ्र पूरा किया जाए। इसके अलावा रामवन गमन पथ परियोजना और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजना को एक निश्चित समय-सीमा तय कर गति दी जाए।
  • जनसुविधाओं का विस्तार: अमरकंटक, चित्रकूट, ओंकारेश्वर, महेश्वर, दतिया, ओरछा और मैहर जैसे मध्य प्रदेश के परम पावन और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए। यहां आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए आधुनिक धर्मशालाएं, सराय, अन्न क्षेत्र, प्याऊ, पेयजल टंकी, अस्पताल और अन्य जनसुविधाओं का निर्माण व्यापक स्तर पर किया जाएगा।
  • संस्थाओं को रियायतें: इन धार्मिक और सामाजिक बुनियादी ढांचों के निर्माण को गति देने के लिए धार्मिक एवं सामाजिक ट्रस्टों व संस्थाओं को भूमि रजिस्ट्री शुल्क में छूट, विशेष अनुदान अथवा अन्य आवश्यक रियायतें देने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं।

प्रमुख मंदिरों में होमगार्ड की तैनाती और अग्निवीरों को 20% आरक्षण

सुरक्षा व्यवस्था और युवाओं के रोजगार को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के जितने भी प्रमुख और बड़े मंदिर हैं, वहां की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर होमगार्ड के विशेष पद सृजित किए जाएं। इन सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति संबंधित मंदिर समितियों के स्वयं के व्यय और बजट से की जाएगी, ताकि शासकीय खजाने पर अतिरिक्त भार न पड़े और सुरक्षा भी पुख्ता हो सके।

इसके साथ ही, देश की सेवा करने वाले अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से गृह विभाग को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निवीरों को मध्य प्रदेश पुलिस के विशेष सशस्त्र बल (SAF) में आरक्षक (कांस्टेबल) पदों पर होने वाली भर्ती में 20 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को बिना किसी विलंब के शीघ्रता से पूरा किया जाए, ताकि हमारे जांबाज युवाओं को राज्य पुलिस में सेवा का बेहतर अवसर मिल सके।

भेल की अनुपयोगी जमीन की वापसी और भोपाल में भव्य स्मारक की तैयारी

राजधानी भोपाल के औद्योगिक और ऐतिहासिक परिदृश्य को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) को पूर्व में आवंटित की गई ऐसी सरकारी भूमि जो लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी है, उसे राज्य सरकार के नियंत्रण में वापस लेने के लिए केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के साथ तत्काल और प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए। इस जमीन का उपयोग जनहित और अन्य विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा।

इसके अलावा, भोपाल गैस त्रासदी के दंश से जुड़े यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के परिसर को लेकर सरकार ने एक संवेदनशील और रचनात्मक योजना बनाई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जो क्षेत्र पूरी तरह से रासायनिक कचरे से मुक्त हो चुका है, वहां एक भव्य और विचारोत्तेजक स्मारक विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। यह स्मारक न केवल पीड़ितों की स्मृति को समर्पित होगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा। इस स्मारक के बेहतर स्वरूप और नियोजन के लिए अधिकारियों को गुजरात के भुज में स्थित भूकंप स्मृति संग्रहालय (स्मृति वन) का दौरा कर वहां की केस स्टडी और आधुनिक तकनीकों का गहन अध्ययन करने को कहा गया है ताकि एक उत्कृष्ट प्रस्ताव तैयार किया जा सके।

उज्जैन में नए हवाई अड्डे के निर्माण की प्रक्रिया तेज

धार्मिक और व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र उज्जैन को हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना अब अंतिम चरण में पहुंच रही है। समीक्षा बैठक के दौरान विमानन विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उज्जैन में बनने वाले नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की सभी वैधानिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रगति पर संतोष जताते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि हवाई अड्डे के निर्माण कार्य का भूमिपूजन कार्यक्रम जल्द से जल्द आयोजित करने की तैयारियां सुनिश्चित की जाएं ताकि निर्माण कार्य समय पर प्रारंभ होकर गति पकड़ सके।

मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा ली गई इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि मध्य प्रदेश सरकार सुशासन, बुनियादी ढांचे के विकास, धार्मिक पर्यटन के संवर्धन और शासकीय विभागों में पूर्ण अनुशासन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले दिनों में धरातल पर इसके व्यापक परिणाम दिखाई देंगे।


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