छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने धमतरी में अपनी 13वीं जनसुनवाई की

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने धमतरी में अपनी 13वीं जनसुनवाई की। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई इस सुनवाई में धमतरी, बालोद और कांकेर जिले के कुल 32 मामलों पर चर्चा हुई। इनमें एक मामला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, जिसमें 77 साल की एक बुजुर्ग महिला ने 40 साल के युवक पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।

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जनसुनवाई में महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, प्रभारी सदस्य दीपिका सोरी और सह-प्रभारी सरला कोसरिया मौजूद रहीं। उन्होंने महिला उत्पीड़न से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई की। यह आयोग की प्रदेश स्तर पर आयोजित 408वीं जनसुनवाई थी।

आयोग के सामने आए मामलों में एक मामला 77 साल की एक विधवा महिला का था। महिला ने शिकायत की कि 40 साल का एक युवक बार-बार उसे अपने साथ घर चलने के लिए कहता है।

महिला का कहना है कि उसका बेटा मानसिक रूप से बीमार है और युवक उसकी इस मजबूरी का फायदा उठाकर उसकी संपत्ति पर कब्जा करना चाहता है। इसी वजह से वह उसे लगातार परेशान कर रहा है।

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने बालोद की महिला संरक्षण अधिकारी को एक साल तक इस मामले पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही, हर हफ्ते महिला की काउंसलिंग कराने, गांव के लोगों से जानकारी लेने और बालोद थाने से रिपोर्ट मंगाने के लिए सखी सेंटर बालोद को भी जिम्मेदारी सौंपी गई। इन निर्देशों के साथ आयोग ने फिलहाल इस मामले का निपटारा कर दिया।

विवाद बढ़ा तो दोनों कर्मचारियों के ट्रांसफर के आदेश

एक मामले में महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी के खिलाफ विभाग में शिकायत की थी। वहीं, सहकर्मी ने भी महिला के बारे में अभद्र टिप्पणी की थी। इसके बाद महिला से कार्यभार वापस ले लिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें फिर से कार्यभार सौंपने का आदेश जारी किया गया।

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दोनों पक्षों की बात और बयान सुनने के बाद आयोग ने निर्देश दिया कि दोनों का तत्काल प्रभाव से बागोडार विकासखंड को छोड़कर कांकेर जिले के किसी अन्य विकासखंड में तबादला किया जाए, ताकि विवाद पूरी तरह खत्म हो सके।

आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी, कांकेर को भी दोनों की सभी शिकायतों का अंतिम निपटारा कर उसकी रिपोर्ट आयोग को भेजने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले को बंद कर दिया जाएगा।

बार-बार वेतन काटने की शिकायत

एक दूसरे मामले में महिला कर्मचारी ने शिकायत की कि उसके अधिकारी बार-बार उसका वेतन काट देते हैं। जबकि वह डाटा एंट्री ऑपरेटर है, फिर भी उससे उसके काम के अलावा दूसरे काम भी कराए जाते हैं और उसी के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाता है।

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने निर्देश दिया कि महिला का बकाया वेतन जल्द से जल्द दिया जाए। साथ ही, उससे डाटा एंट्री ऑपरेटर के काम के अलावा कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी न ली जाए, उसका वेतन न काटा जाए और उसे किसी तरह से परेशान भी न किया जाए।

आयोग ने यह भी साफ किया कि अगर अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं करते हैं और महिला दोबारा शिकायत करती है, तो संबंधित अधिकारी की सेवा समाप्त करने की अनुशंसा करते हुए मंत्री केदार कश्यप को पत्र भेजा जाएगा। इसके बाद आयोग ने फिलहाल इस मामले का निपटारा कर दिया।