अंबिकापुर में संभाग स्तरीय सूचना का अधिकार अधिनियम कार्यशाला आयोजित: सरगुजा संभाग के 6 जिलों के अधिकारी हुए शामिल
अंबिकापुर: पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला पंचायत सभाकक्ष अंबिकापुर में संभाग स्तरीय सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शासकीय कार्यों में पारदर्शिता को बढ़ावा देना और आरटीआई आवेदनों के समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से निराकरण को सुनिश्चित करना था। इस संभाग स्तरीय आयोजन में सरगुजा संभाग के सभी 6 जिलों से भारी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
मुख्य आकर्षण: कार्यशाला में सरगुजा संभाग के सभी 6 जिलों से जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), पंचायत सचिव, संकाय सदस्य एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। राज्य सूचना आयोग और संभाग स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने अधिनियम के प्रावधानों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
विशिष्ट अतिथियों और अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण संभाग स्तरीय कार्यशाला में राज्य स्तर और संभाग स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने अपने व्यापक प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर आरटीआई अधिनियम के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में राज्य सूचना आयोग से अवर सचिव गीता दीवान, अतुल वर्मा, संयुक्त संचालक SIRD निमोरा सीमा मिश्रा, उपायुक्त (विकास) सरगुजा संभाग राजकुमार खुंटे, संयुक्त कलेक्टर शारदा अग्रवाल, उप संचालक पंचायत रितु साहू एवं सहायक परियोजना अधिकारी कुबेर सिंह उरेती सहित कई संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
मंच पर उपस्थित सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का स्वागत स्थानीय स्तर पर किया गया, जिसके पश्चात कार्यशाला के सत्रों का औपचारिक शुभारंभ हुआ। उपस्थित अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि आरटीआई अधिनियम लोकतंत्र का एक ऐसा सशक्त औजार है, जो आम नागरिकों को शासन प्रणाली से सीधे जोड़ता है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
आरटीआई अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों और नियमों पर विस्तृत चर्चा
कार्यशाला के मुख्य सत्र के दौरान राज्य सूचना आयोग से उपस्थित अधिकारियों द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों एवं नियमों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्होंने अधिनियम की धारा दर धारा व्याख्या करते हुए बताया कि किस प्रकार जन सूचना अधिकारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
प्रशिक्षण सत्र में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया:
- समय-सीमा का अनुपालन: निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदकों को सटीक और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी स्तर पर विलंब न हो।
- आवेदनों का निराकरण: आरटीआई आवेदनों के निराकरण के दौरान मैदानी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान कैसे किया जाए, इस पर तकनीकी चर्चा हुई।
- ऑनलाइन अपडेटेशन: सरकारी दफ्तरों द्वारा ऑनलाइन जानकारी को नियमित रूप से अपडेट करने के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया, जिससे नागरिकों को घर बैठे सूचनाएं प्राप्त हो सकें।
- अधिनियम की उपयोगिता: शासन की योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए आरटीआई की प्रासंगिकता और इसके सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया गया।
व्याहारिक समस्याओं पर खुला संवाद और समाधान
कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा खुला संवाद सत्र रहा, जिसमें संभाग के 6 जिलों से आए जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एवं पंचायत सचिवों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन मैदानी अधिकारियों ने अपने-अपने कार्यस्थल पर सूचना का अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं एवं उनके निराकरण के संबंध में खुलकर चर्चा की।
अधिकारियों द्वारा प्रतिभागियों की विभिन्न जिज्ञासाओं, जटिल मामलों और तकनीकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया। साथ ही, आरटीआई अधिनियम के प्रभावी और त्रुटिरहित क्रियान्वयन के लिए सभी उपस्थित कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य में आवेदकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य: पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन
इस संभाग स्तरीय कार्यशाला के आयोजन का मुख्य उद्देश्य सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के प्रति अधिकारियों एवं कर्मचारियों की समझ को और अधिक सुदृढ़ करना था। कार्यशाला के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि सरकारी योजनाओं और कार्यों से जुड़ी जानकारी पूरी पारदर्शिता के साथ आम जनता तक पहुंचे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अधिनियम का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जन-उन्मुख बनाना है। जब मैदानी स्तर के अधिकारी और कर्मचारी नियमों के प्रति पूरी तरह स्पष्ट और जागरूक होंगे, तो स्वतः ही अपीलों और शिकायतों की संख्या में कमी आएगी और जनता का शासन प्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
निष्कर्ष: अंबिकापुर में आयोजित यह संभाग स्तरीय कार्यशाला सरगुजा संभाग के सभी 6 जिलों में प्रशासनिक कसावट लाने और आरटीआई मामलों के त्वरित निस्तारण में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यशाला के अंत में सभी अधिकारियों को पूरी निष्ठा और समयबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संकल्प दिलाया गया।
Ashish Sinha
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