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हरेली तिहार पर कुसमी-शंकरगढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय पैकरा ने दी बधाई, कहा- “हमारी संस्कृति और किसानों की समृद्धि का प्रतीक है हरेली”






हरेली तिहार पर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय पैकरा का शुभकामना संदेश


छत्तीसगढ़ न्यूज | बलरामपुर-सामरी

छत्तीसगढ़ के प्रथम पर्व ‘हरेली तिहार’ पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुसमी-शंकरगढ़ ने दी बधाई; अध्यक्ष विजय पैकरा बोले- “हमारी संस्कृति व किसानों की समृद्धि का प्रतीक है हरेली”

स्थान: कुसमी-शंकरगढ़ (बलरामपुर) |
अपडेटेड: स्पेशल रिपोर्ट |
प्रस्तुति: डिजिटल न्यूज डेस्क

“हरेली के पावन तिहार पर बलरामपुर-रामानुजगंज जिले सहित कुसमी, शंकरगढ़ एवं सामरी क्षेत्र के सभी किसान भाइयों, माताओं, बहनों एवं प्रदेशवासियों को गाड़ा-गाड़ा बधाई अउ सुभकामना।”
— विजय पैकरा, अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुसमी (शंकरगढ़)

कुसमी/शंकरगढ़ (बलरामपुर): छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, परंपरा और कृषि परंपरा के संवाहक प्रथम पर्व ‘हरेली तिहार’ के शुभ अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुसमी-शंकरगढ़ (विधानसभा क्षेत्र- सामरी) के अध्यक्ष विजय पैकरा ने समस्त क्षेत्रवासियों, अन्नदाताओं एवं कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। विजय पैकरा ने कहा कि हरेली केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी माटी, प्रकृति, कृषि औजारों और पशुधन के प्रति हमारी गहरी आस्था और कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है।

छत्तीसगढ़ की माटी और परंपरा से जुड़ा पर्व

अपने संदेश में विजय पैकरा ने हरेली तिहार के सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सावन मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान और ग्रामीण संस्कृति का मूल आधार है। इस दिन हमारे किसान भाई भोर से ही उठकर अपने कृषि यंत्रों—हल, नागर, गैंती, कुदाल, रापा और हंसिया की साफ़-सफ़ाई कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान शिव और माता अन्नपूर्णा से प्रार्थना की जाती है कि आने वाली फसल लहलहाती रहे और प्रदेश का हर किसान धन-धान्य से परिपूर्ण हो।

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पशुधन और प्रकृति पूजा की अनुपम परंपरा

विजय पैकरा ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में पशुधन (गाय और बैलों) को परिवार के सदस्य का दर्जा दिया जाता है। हरेली के दिन किसान अपने मवेशियों की पूजा करते हैं, उन्हें बछली व औषधीय जड़ी-बूटियों से युक्त आटे की लोई और गुड़ खिलाते हैं ताकि वे वर्षभर निरोगी रहें। इसके साथ ही, इस दिन घरों के मुख्य द्वार पर नीम की पत्तियां लगाई जाती हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहे और पर्यावरण शुद्ध हो। यह परंपरा दर्शाती है कि हमारे पूर्वज प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति कितने सजग थे।

“बलरामपुर और सामरी क्षेत्र की पहाड़ियों और वनों के बीच बसा हमारा कुसमी-शंकरगढ़ अंचल प्राकृतिक रूप से बेहद समृद्ध है। हरेली तिहार हमें याद दिलाता है कि जब तक हमारी खेत-खलिहान हरी-भरी रहेंगी और हमारे किसान मजबूत रहेंगे, तब तक छत्तीसगढ़ की आत्मा समृद्ध रहेगी।”

— विजय पैकरा (अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुसमी)

गेड़ी दौड़, पारंपरिक खेल और छत्तीसगढ़िया उत्साह

हरेली का त्योहार बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी के लिए उल्लास लेकर आता है। इस दिन गांव-गांव में बांस से बनी ‘गेड़ी’ पर चढ़कर चलने का अनोखा उत्साह देखने को मिलता है। विजय पैकरा ने कहा कि गेड़ी दौड़, नारियल फेंक और अन्य पारंपरिक खेल हमारी ग्रामीण प्रतिभा और भ्रातृत्व भाव को मजबूत करते हैं। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं से अपील की कि वे अपनी इन लोक-परंपराओं को संजो कर रखें और अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी छत्तीसगढ़िया धरोहर पर गर्व करना सिखाएं।

किसानों के कल्याण और खुशहाली की कामना

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुसमी (शंकरगढ़) के अध्यक्ष विजय पैकरा ने इस अवसर पर ईश्वर से प्रार्थना की कि इस वर्ष सामरी और बलरामपुर जिले समेत पूरे प्रदेश में पर्याप्त बारिश हो, जिससे किसानों की फसलें लहलहा उठें और खेतों में हरियाली की चादर बिछ जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सदैव अन्नदाताओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए समर्पित रही है और आगे भी किसानों के हक, न्याय और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

क्षेत्रवासियों से सौहार्दपूर्वक मनाने की अपील

विजय पैकरा ने कुसमी, शंकरगढ़, सामरी और आसपास के तमाम ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के निवासियों से अपील की है कि वे हरेली तिहार को आपसी भाईचारे, प्रेम, सौहार्द और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाएं। उन्होंने ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों को भी ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले हरेली उत्सवों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाने का आह्वान किया।


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