मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक: 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास प्रस्तावों को मंजूरी
भोपाल: मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगभग 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें ग्रामीण विकास, सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी शिक्षा का विस्तार, डेयरी विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और किसान कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।
वीबी जी राम जी योजना: ग्रामीण रोजगार और आजीविका की नई पहल
ग्रामीण विकास के ढांचे को गति देने के लिए “विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी जी राम जी योजना” को 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील किए जाने का अनुसमर्थन किया गया।
- कुल वित्तीय प्रावधान: योजना के कार्यान्वयन के लिए 29,619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3,183 करोड़ रुपये और 2026-27 से 2030-31 तक 26,436 करोड़ रुपये अनुमानित लागत है।
- वित्तीय ढांचा: केंद्र और राज्य का अंश 60:40 के अनुपात में होगा (राज्यांश 10,574 करोड़ रुपये)। प्रशासनिक व्यय के 946 करोड़ रुपये राज्य सरकार वहन करेगी।
- 125 दिन का रोजगार: ग्रामीण परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को अब प्रति वित्तीय वर्ष 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी।
- तकनीकी समावेश: ग्राम पंचायतों में GIS तकनीक, ‘पीएम गति शक्ति’ और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ बनेगी। बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और हर 6 माह में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य रहेगा। त्वरित शिकायत निवारण के लिए प्रत्येक जिले में ‘लोकपाल’ नियुक्त होंगे।
सड़क कनेक्टिविटी: पश्चिम भोपाल बायपास और बीना-मालथौन मार्ग स्वीकृत
प्रदेश में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख परियोजनाओं को प्रशासकीय मंजूरी दी गई:
- पश्चिम भोपाल बायपास (4-लेन): 35.61 कि.मी. लंबे निर्माण कार्य के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) अंतर्गत 3,774 करोड़ रुपये (निर्माण लागत 3,225.51 करोड़ + निर्माण पूर्व कार्य 548.29 करोड़) की पुनरीक्षित स्वीकृति दी गई। इससे जबलपुर/नर्मदापुरम से इंदौर जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर के अंदर से नहीं गुजरना पड़ेगा और 21 कि.मी. की दूरी कम होगी।
- मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग: 67.116 कि.मी. 4-लेन निर्माण के लिए 3,272 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली (निर्माण लागत 2,776.83 करोड़, भू-अर्जन 428.94 करोड़, सुपरविजन 65.77 करोड़)। यह मार्ग बीपीसीएल रिफाइनरी, पावर प्लांट और औद्योगिक परिवहन के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर बनेगा।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा: RGPV का पुनर्गठन, 3 नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
क्षेत्रीय संतुलन और गुणवत्ता विस्तार के उद्देश्य से राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) भोपाल का पुनर्गठन कर 3 पृथक प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे:
- मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय (भोपाल): क्षेत्राधिकार – भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग।
- मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय (उज्जैन): क्षेत्राधिकार – उज्जैन और इंदौर संभाग।
- महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय (जबलपुर): क्षेत्राधिकार – जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग।
तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए पृथक अधिनियम लागू होंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय ‘मध्यप्रदेश प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय साधिकार समिति’ का गठन भी मंजूर किया गया।
डेयरी विकास और ‘सांची’ ब्रांड का उन्नयन
दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण और ‘सांची’ ब्रांड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी गई। आगामी 5 वर्षों में:
- सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26,000 गांवों तक किया जाएगा।
- दुग्ध संकलन 12 लाख किग्रा/दिन से बढ़ाकर 52 लाख किग्रा/दिन किया जाएगा।
- दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन की जाएगी।
- दुग्ध पैकेट बिक्री 7 लाख लीटर से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाएं और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण
- चिकित्सा उपकरण अनुरक्षण: स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीनों एवं उपकरणों के रख-रखाव के लिए (2026 से 2031 तक) 488.41 करोड़ रुपये स्वीकृत।
- विभागीय परिसंपत्ति संधारण: मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओ.टी. इत्यादि की मरम्मत के लिए 915.77 करोड़ रुपये मंजूर।
- किसानों के हित में निर्णय: ग्रीष्मकालीन मूंग उपज के उपार्जन की सीमा को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के निर्णय का अनुसमर्थन।
- नए जिलों में पद सृजन: नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा में सामाजिक न्याय विभाग के लिए 21 पद तथा निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति।












