बलरामपुर विशेष
बलरामपुर: छात्रावास अधीक्षकों की समीक्षा बैठक में कड़े निर्देश; कलेक्टर बोलीं— “अधीक्षक निभाएं पालक की भूमिका, बच्चों के पोषण व शिक्षा से समझौता नहीं”
‘मिशन आचार्य’ पर जोर, प्रतिदिन 20 मिनट की रीडिंग गतिविधि अनिवार्य; दीवारों को थीम आधारित शिक्षाप्रद बनाने का आदेश
बलरामपुर: कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में छात्रावास अधीक्षकों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले भर के छात्रावासों की व्यवस्थाओं, मेस संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विस्तार से समीक्षा की गई। Collector ने अधीक्षकों को स्पष्ट हिदायत दी कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों के लिए अधीक्षक पालक की भूमिका में होते हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य को गढ़ने में उनका योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
बैठक के प्रमुख दिशा-निर्देश
- पालक की भूमिका: अधीक्षक केवल व्यवस्था संचालक न बनें, बल्कि बच्चों के साथ आत्मीय जुड़ाव बनाकर उनके सर्वांगीण विकास में सहभागी बनें।
- मिशन आचार्य एवं रीडिंग: प्रत्येक छात्र के लिए प्रतिदिन कम से कम 20 मिनट की रीडिंग गतिविधि अनिवार्य रूप से संचालित की जाए।
- थीम आधारित दीवारें: सीखने की प्रक्रिया को रुचिकर बनाने हेतु छात्रावास परिसरों की दीवारों को ज्ञानवर्धक चित्रों एवं थीम आधारित स्वरूप में रंगा जाए।
- गुणवत्तापूर्ण मेस व सफाई: भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता और परिसर की साफ-सफाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
- सतत निरीक्षण: अधीक्षकों को अपने कार्यस्थल पर नियमित उपस्थित रहने तथा मंडल सहायकों व निरीक्षकों को सतत निरीक्षण के निर्देश दिए गए।
‘मिशन आचार्य’ पर विशेष बल, शैक्षणिक प्रगति की होगी ट्रैकिंग
बैठक में ‘मिशन आचार्य’ के क्रियान्वयन पर विशेष बल देते हुए Collector चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का पढ़ना और सीखना ही उसके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। उन्होंने अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए कि प्रतिदिन कम से कम बीस मिनट की रीडिंग गतिविधि अनिवार्य रूप से कराई जाए और प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जाए।
पढ़ाई के प्रति उत्सुकता और जिज्ञासा बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों को अपनी छिपी प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा नए कौशल (Skills) सीखने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करने को कहा गया। छात्रावास परिसर को शिक्षाप्रद रूप देने के लिए दीवारों को ज्ञानवर्धक चित्रों और थीम आधारित माध्यमों से सजाने के निर्देश दिए गए, ताकि बालक-बालिकाएं खेल-खेल में सीख सकें।
| क्षेत्र / विषय | कलेक्टर द्वारा जारी मुख्य निर्देश | अपेक्षित परिणाम |
|---|---|---|
| शैक्षणिक सुधार | प्रतिदिन 20 मिनट की अनिवार्य रीडिंग और मिशन आचार्य का प्रभावी पालन | छात्रों की पठन क्षमता और बुनियादी शिक्षा में सुधार |
| छात्रावास वातावरण | दीवारों को थीम आधारित चित्रों व शिक्षाप्रद माध्यमों से तैयार करना | सीखने की प्रक्रिया रुचिकर और दृश्य-समृद्ध बनेगी |
| पोषण एवं स्वास्थ्य | मेस में पौष्टिक, गुणवत्तापूर्ण भोजन और स्वच्छता का सख्त पालन | बच्चों के स्वास्थ्य और शारीरिक विकास में सुधार |
| प्रशासनिक अनुशासन | अधीक्षकों की कार्यस्थल पर नियमित उपस्थिति व निरीक्षकों द्वारा सतत मॉनिटरिंग | व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमितता कायम होगी |
“स्वास्थ्य और पोषण से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं” — Collector चंदन संजय त्रिपाठी
मेस संचालन और खान-पान की समीक्षा करते हुए Collector ने दोटूक शब्दों में कहा— “बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और भोजन की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्रावासों में साफ-सफाई का उच्चतम स्तर बनाए रखना अनिवार्य है।” उन्होंने चेतावनी दी कि निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस समीक्षा बैठक में सहायक आयुक्त समीक्षा जायसवाल, जिला मंडल संयोजक, विभिन्न विकासखंडों के छात्रावास अधीक्षक एवं शिक्षा व जनजातीय विकास विभाग से जुड़े अन्य संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।















