रायपुर : साहित्य सिरजन ल धरम कारज मानथें डा. दशरथ लाल निषाद

 

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साहित्य सिरजन ल धरम कारज मनइया डा. दशरथ लाल जी निषाद के कहना हे, लोगन ल अपन जिनगी ले धन नहीं, धरम लेके जाना चाही. एकरे सेती मैं सन् 1958 ले लेके आज तक सरलग साहित्य सिरजन म लगे हंव. अभी तक मोर 30 अकन किताब छपगे हावय, अउ अतके अकन के पुरती ह छपे के अगोरा म हे.


धमतरी जिला के गाँव मगरलोड म 20 नवंबर 1938 के महतारी बोधनी बाई अउ ददा ठाकुर राम निषाद जी के घर जन्मे दशरथ लाल जी 1958 ले लेखन कारज म भिड़े हें. उंकर पहला साहित्य संकलन 1965 म ‘राष्ट्रीय चेतना’ के नांव ले आए रिहिसे.


दशरथ लाल जी संग मोर भेंट पहिली बेर तब होए रिहिसे, जब मैं छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका ‘मयारु माटी’ के प्रकाशन- संपादन करत रेहेंव. बात सन् 1988 के आय तब मैं छत्तीसगढ़ी सेवक के संपादक जागेश्वर प्रसाद जी संग उंकर हांडीपारा रायपुर वाले कार्यालय म बइठे रेहेंव. तभे निषाद जी उहाँ पहुंचिन. उंकर संग मोर परिचय जागेश्वर जी कराइन, अउ बताइन के ए मन डा. दशरथ लाल जी आंय, क्रांतिकारी साहित्यकार हें. हमन मीसा बंदी हन. दूनों झन एके संग जेल म रहेन.


दशरथ लाल जी के शिक्षा गाँव म आठवीं तक ही हो पाए रिहिसे. एकर बाद उन भिलाई चले गेइन वो बखत डेढ़ दू रुपिया म रायपुर अउ भिलाई म रोजी मजूरी करत आईटीआई म पढ़ीन. तेकर पाछू भोपाल म एक इंटरव्यू होइस, जेमा उन पास होइन, तहाँ ले उनला भिलाई टेक्निकल इंस्टीट्यूट म नौकरी मिलगे.


नौकरी लगे के बाद उन प्रायव्हेट म हायर सेकेण्डरी पास करीन. फेर डिप्लोमा घलो करीन. शिक्षा खातिर उंकर लगन अतेक रिहिस के आयुर्वेद रत्न, साहित्य रत्न अउ फेर कृषि रत्न के घलो उपाधि लेइन. उन भिलाई म रहिके ही अपन समाज के गतिविधि संग घलो जुड़िन. एक पाछू फेर साहित्य म आना होइस.

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साहित्य म सफा-सफा बात लिखंय तेकर सेती उन अपन उपनाम ‘विद्रोही’ लिखे लागिन. इही कलम के विद्रोह के सेती उनला ए देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था म काला अध्याय के रूप म चिन्हे जाने वाला ‘मीसा काल’ म करीब पौने दू बछर मीसा बंदी के रूप म जेल म बीताए बर लागिस. एकर एक दुष्परिणाम इहू होइस के भिलाई टेक्निकल इंस्टीट्यूट के नौकरी ले हाथ धोना परगे.
बाद म उन प्रायव्हेट नौकरी करत अपन परिवार के जीविका चलाए लागिन. तेकर पाछू फेर अपन जन्मभूमि मगरलोड लहुट आइन, जिहां 13 अक्टूबर 1996 म “संगम साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति” के स्थापना करिन. ए समिति के माध्यम ले मगरलोड क्षेत्र के साहित्य प्रेमी मन ल जोड़िन. आज ए समिति के नांव पूरा प्रदेश म सम्मान के साथ लिए जाथे. एकर मन के साहित्य खातिर समर्पण अउ सक्रियता ल लोगन उदाहरण के रूप म रखथें, जे मन के एक ग्रामीण क्षेत्र म रहि के घलो अपन खुद के भवन हे.
निषाद जी के लेखन छत्तीसगढ़ के विशेषता मन ऊपर बहुत होए हे. जइसे- छत्तीसगढ़ के बासी, छत्तीसगढ़ के मितानी, छत्तीसगढ़ के भाजी, छत्तीसगढ़ के गांधी, छत्तीसगढ़ के पान, छत्तीसगढ़ के भक्तिन, छत्तीसगढ़ के कांदा, छत्तीसगढ़ के सिंगार, एकर मन के संगे-संग राम-केंवट संवाद, मुक्तक संग्रह, जइसन अबड़ अकन विशुद्ध साहित्यिक विषय मन ऊपर घलोक लिखे हें. अभी तक उंकर 30 किताब प्रकाशित हो चुके हे, अउ अतकेच अकन के पुरती ह छपे के अगोरा म हे.
दशरथ निषाद जी ल साहित्यिक अउ सामाजिक मिला के करीब 82 सम्मान मिल गये हे. फेर एक ताज्जुब के बात आय के अभी तक उनला कोनो किसम के सरकारी सम्मान नइ मिल पाए हे. एकर एक बड़का कारन मैं मानथंव, के एकर चयन विधि. सरकारी सम्मान खातिर सबले बड़े बाधा ए आय, के जे मन अपन सम्मान करे खातिर आवेदन करथें या कोनो समिति द्वारा ककरो नांव के प्रस्ताव भेजे जाथे, सिरिफ वोकरेच भर मन के नांव के चयन सम्मान खातिर होथे. जे मन आवेदन नइ करंय, तेकर मन के नांव ऊपर कोनो किसम के विचार नइ करे जाय.
एकर संबंध म मोला छत्तीसगढ़ के महान संगीतकार रहे स्व. खुमान लाल साव जी के वो बात के सुरता आथे, जब उन कहंय के, “कोनो भी स्वाभिमानी मनखे मोर सम्मान कर दे कहिके आवेदन करय. मैं खुद नइ करंव, एकरे सेती मोला आज तक कोनो किसम के सम्मान नइ मिल पाये हे.”
मोला लागथे, के सरकार ल अपन ये नियम ऊपर फिर से विचार करना चाही, अउ साठ बछर ले ऊपर हो चुके कलाकार या साहित्यकार मन के खुदे सोर-खबर लेना चाही.
आदरणीय निषाद जी के तो अड़बड़ सम्मान होए हे. दू पइत महूं ल उंकर सम्मान करे के सौभाग्य मिले हे. एक पइत जब उन अपन जिनगी के 75 बछर पूरा करीन, त संगम साहित्य समिति द्वारा उंकर प्रकाशित साहित्य म तउल के सम्मान के गे रिहिसे, संग म एक स्मारिका के प्रकाशन घलो करे गे रिहिसे. ए ह मोर सौभाग्य आय के, ए कार्यक्रम म मोला अतिथि के रूप म उपस्थित होके आदरणीय निषाद जी के स्मारिका के विमोचन अउ सम्मान करे के अवसर मिले रिहिसे. दूसरा पइत तब, जब हमन रायपुर म छत्तीसगढ़ी व्याकरण के सर्जक हीरालाल काव्योपाध्याय जी के सुरता म कार्यक्रम करे रेहेन, जेमा छत्तीसगढ़ के पांच साहित्य रत्न मन के सम्मान करे रेहेन, वोमा के एक रत्न आदरणीय निषाद जी घलो रिहिन हें.
वइसे तो मैं मगरलोड हर बछर के स्थापना दिवस कार्यक्रम म जावंंव त निषाद जी संग भेंट हो जावत रिहिसे. कभू कभार उन रायपुर के कार्यक्रम म आवंय तभो भेंट हो जावय. फेर जब ले (24 अक्टूबर 2018) मोला लकवा के अटैक आए हे, तब ले कोनो डहार बंद होगे. एकरे संग निषाद जी संग भेंट होवइ घलो बंद होगे. बीच- बीच म संगम साहित्य के सक्रिय सदस्य चिंताराम सिन्हा फोन के माध्यम ले निषाद जी संग गोठबात करा देथे, त जानेंव के उहू मन अभी खटिया म हें.
भगवान उनला स्वस्थ करंय अउ लम्बा जिनगी देवंय, तेमा उंकर अप्रकाशित किताब मन छप सकय. संग म नवा पीढ़ी ले घलो भरोसा करत हंव के उंकर सपना ल पूरा करे के उदिम करंय.

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