रायपुर : नि:शक्तों का सहारा बन रही छत्तीसगढ़ सरकार

रायपुर : नि:शक्तों का सहारा बन रही छत्तीसगढ़ सरकार

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समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए किया जा रहा काम

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में सरकार लगातार अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की जा रही हैं। राज्य के नि:शक्तों के लिए सरकार सहारा बन रही है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के माध्यम से राहत पहुंचाने का प्रयास हो रहा है। फिर चाहे वह बुजुर्ग हों, दिव्यांग हों या भिक्षुक अथवा तृतीय लिंग के समुदाय के लोग हों। हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाओं पर काम हो रहा है।
गौरतलब है कि वर्तमान सरकार ने राज्य में नई पहल करते हुए तृतीय लिंग समुदाय के लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकारी नौकरियों में उन्हें अवसर देने की शुरुआत की। पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2021-22 में 13 तृतीय लिंग (उभय लिंगी) समुदाय के व्यक्तियों की नियुक्ति राज्य पुलिस सेवा में की गई। इसके साथ ही उभय लिंगी व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए आश्रय सह पुनर्वास केन्द्र संचालन को स्वीकृति प्रदान की गई है। देश में इस प्रकार का यह पहला केन्द्र है, जो उभय लिंगी व्यक्तियों के लिए स्थापित किया जा रहा है। दूसरी ओर वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं का निराकरण टेलीफोनिक माध्यम से किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम-2016 के प्रावधानों के अनुसार दिव्यांग व्यक्तियों को पुनर्वास सेवाएं एवं संसाधन उपलब्ध कराने के लिए अत्याधुनिक पुनर्वास केन्द्र स्थापित करने का निर्णय किया गया है। इस कड़ी में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर एवं जगदलपुर में कुल पांच भवनों का निर्माण किया जाएगा। इस प्रयोजन के लिए वर्ष 2022-23 में 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। इधर विभागीय गतिविधियों के सुचारू संचालन एवं अतिसंवेदनशील हितग्राहियों को एक ही परिसर में सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नवा रायपुर अटल नगर में राज्यस्तरीय कार्यालय स्थापित करने के लिए दो एकड़ भूखण्ड पर बाधारहित भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में पांच करोड़ रुपये का बजट प्रावधान प्रस्तावित है।

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बुजुर्गों के लिए देखभाल गृह –
वृद्धावस्था के कारण गंभीर बीमारी जैसे डेमेन्शिया या बिस्तर पर निष्क्रिय अवस्था में रह रहे वरिष्ठ नागरिकों को चिकित्सकीय सुविधा तथा देख-रेख के लिए प्रशासक देखरेख गृह की स्थापना दुर्ग, कबीरधाम एवं बालोद जिले में की गई। यहां वर्तमान में 44 हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं।

आस्था के अनुरूप तीर्थयात्रा के लिए बजट –
छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांग व्यक्तियों को उनकी आस्था के अनुसार तीर्थयात्रा कराने का इंतजाम किया हुआ है। इसके के लिए वर्ष 2022-23 के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट भी प्रस्तावित किया है।