Advertisement

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए डॉप्लर तकनीक का शिलान्यास किया…

रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए डॉप्लर तकनीक का शिलान्यास किया…

डॉप्लर तकनीक का शिलान्यास किया

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए डॉप्लर तकनीक का शिलान्यास किया

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि विश्वविद्यालय की ओर से विकसित किए गए कृषि रोज़गार मोबाइल एप्लिकेशन का लोकार्पण किया

हम धरती माता की सेवा करेंगे तो धरती माता भी हमारा ध्यान रखेंगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल:-

यह समय खेती के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल समय होता है। कीड़े और बाकी जीवन जिसने फसलों को हानि हो सकती है, मर जाते हैं। खेत की जमीन को किसान बड़ी मेहनत से बनाते हैं। कृषि की जमीन का ध्यान किसान अपने बच्चे की तरह रखता है, वैसे ही जैसे पैदा होने के बाद बच्चे का ध्यान रखा जाता है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल:- यह समय खेती के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल समय होता है। कीड़े और बाकी जीवन जिसने फसलों को हानि हो सकती है, मर जाते हैं। खेत की जमीन को किसान बड़ी मेहनत से बनाते हैं। कृषि की जमीन का ध्यान किसान अपने बच्चे की तरह रखता है, वैसे ही जैसे पैदा होने के बाद बच्चे का ध्यान रखा जाता है

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल:- यह समय खेती के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल समय होता है। कीड़े और बाकी जीवन जिसने फसलों को हानि हो सकती है, मर जाते हैं। खेत की जमीन को किसान बड़ी मेहनत से बनाते हैं। कृषि की जमीन का ध्यान किसान अपने बच्चे की तरह रखता है, वैसे ही जैसे पैदा होने के बाद बच्चे का ध्यान रखा जाता है। यदि हम धरती माता की सेवा करेंगे तो धरती माता भी हमारा ध्यान रखेंगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए डॉप्लर तकनीक का शिलान्यास कियायदि हम धरती माता की सेवा करेंगे तो धरती माता भी हमारा ध्यान रखेंगी।

68 लाख क्विंटल गोबर हमने खरीदा, अब हम गौमूत्र भी खरीदेंगे।, जैविक खेती प्रकृति, धरती माता और पशुधन की सेवा है, जो मानव समाज को भी सुरक्षित रखेगी।

आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से चिंतित है, मैं पूरी दुनिया से कहना चाहता हूं कि हमने इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना 1987 में हुई थी. आज 35 साल में लगभग 110 तरह के बीज हमारे विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने तैयार किए हैं. लेकिन उससे भी बड़ी बात है कि हमारे छत्तीसगढ़ के किसानों ने 23 हज़ार क़िस्म के बीज तैयार किया है, यह बताता कि हमारे किसान भी वैज्ञानिक सोच रखते थे.

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47